Haryana News: हरियाणा सरकार ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के तेजी से बदलते शहरी ढांचे को देखते हुए रियल एस्टेट नीति में एक ऐतिहासिक संशोधन किया है। सरकार ने 13 साल पुराने नियमों में बदलाव करते हुए अब मेट्रो नेटवर्क और ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) जोन में आने वाले अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट्स को ‘मिक्स्ड लैंड यूज’ (Mixed Land Use) कॉलोनियों में बदलने की अनुमति दे दी है। इस फैसले से गुरुग्राम, फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और बहादुरगढ़ जैसे प्रमुख शहरों में चल रहे प्रोजेक्ट्स को सीधा और तत्काल लाभ मिलेगा।
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केवल टीओडी जोन को मिलेगी छूट
19 अगस्त 2013 को लागू की गई अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग नीति के तहत पहले इन किफायती आवास लाइसेंसों को किसी अन्य श्रेणी में बदलने की कोई अनुमति नहीं थी। अब सरकार ने इस कड़े प्रतिबंध को आंशिक रूप से हटा दिया है। हालांकि, सरकार ने साफ किया है कि यह नई रियायत केवल ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (TOD) और मेट्रो कॉरिडोर के दायरे में आने वाले प्रोजेक्ट्स पर ही लागू होगी। टीओडी क्षेत्र से बाहर स्थित अफोर्डेबल कॉलोनियों को मिक्स्ड लैंड यूज में बदलने की अनुमति बिल्कुल नहीं दी जाएगी।
मेट्रो शहरों में विकास की नई राह और फ्लैट खरीदारों की सुरक्षा
इस नीतिगत बदलाव का सबसे ज्यादा फायदा उन इलाकों को होगा जहाँ मेट्रो कनेक्टिविटी मौजूद है या भविष्य में विस्तार होने वाला है। गुरुग्राम और फरीदाबाद के अलावा बल्लभगढ़-पलवल और दिल्ली-कुंडली मेट्रो विस्तार पूरा होने के बाद इन नए रूटों के आसपास की कॉलोनियों को भी यह कारोबारी आजादी मिलेगी। डेवलपर्स अब बाजार की मांग के अनुसार नया लेआउट तैयार कर सकेंगे। हालांकि, नए नियमों के तहत मिक्स्ड लैंड यूज कॉलोनियों में न्यूनतम 7.5 प्रतिशत क्षेत्र व्यावसायिक (Commercial) गतिविधियों के लिए आरक्षित रखना अनिवार्य होगा, जिससे प्रोजेक्ट्स की आर्थिक उपयोगिता बढ़ेगी।
खरीदारों के हितों की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए सरकार ने यह अनिवार्य किया है कि जिन प्रोजेक्ट्स में ग्राहकों के फ्लैट बुक हो चुके हैं या थर्ड पार्टी राइट्स बन चुके हैं, वहाँ लाइसेंस बदलने के लिए सभी आवंटियों की लिखित सहमति जरूरी होगी। जिन प्रोजेक्ट्स में अभी राइट्स नहीं बने हैं और वे ‘हरेरा’ (HRERA) में पंजीकृत नहीं हैं, वहाँ डेवलपर को एक कानूनी शपथ पत्र देना होगा, ताकि किसी भी खरीदार के साथ धोखाधड़ी न हो।
नियमों के उल्लंघन पर बड़ी कार्रवाई
एक तरफ जहाँ सरकार ने ईमानदार डेवलपर्स को राहत दी है, वहीं नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग ने कड़ा रुख अपनाया है। रेवाड़ी जिले के बावल में एक अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट विकसित करने में लापरवाही बरतने पर विभाग ने ‘शिवा मेगा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ को ब्लैकलिस्ट कर दिया है।
कंपनी को साल 2014 में बावल में 5.44 एकड़ जमीन पर प्रोजेक्ट बनाने का लाइसेंस मिला था, लेकिन कंपनी ने न तो निर्माण शुरू किया, न लाइसेंस का रिन्यूअल कराया और न ही सरकारी ईडीसी (External Development Charges) का भुगतान किया। इसके चलते साल 2022 में ही इनका लाइसेंस रद्द कर दिया गया था। अब विभाग ने कड़ा एक्शन लेते हुए कंपनी, उसके तीनों निदेशकों और उनसे जुड़ी किसी भी अन्य फर्म को भविष्य में हरियाणा के भीतर नया लाइसेंस जारी करने पर पूरी तरह से रोक लगा दी है।
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