Haryana News: हरियाणा के सरकारी स्कूलों के लिए बड़ी खबर! CM सैनी ने शुरू किया नया शिक्षक पोर्टल

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए CM नायब सिंह सैनी ने स्वयंसेवक शिक्षक पंजीकरण पोर्टल शुरू किया है। इसके जरिए सेवानिवृत्त शिक्षक, पूर्व सैनिक और इच्छुक नागरिक विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा देने में योगदान दे सकेंगे।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अक्टूबर 14, 2026

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Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में अध्यापकों की कमी को दूर करने और विद्यार्थियों को उच्च स्तर की गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक बेहद महत्वपूर्ण और अनूठी पहल की है। इसी उद्देश्य के तहत मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने आधिकारिक रूप से ‘स्वयंसेवक शिक्षक पंजीकरण पोर्टल’ का शुभारंभ किया है। इस पोर्टल के माध्यम से समाज के अनुभवी और शिक्षा के प्रति समर्पित प्रबुद्ध वर्ग को सीधे तौर पर स्कूली शिक्षा प्रणाली से जोड़ा जाएगा, जिससे विद्यार्थियों की शैक्षणिक नींव को और अधिक मजबूत किया जा सके।

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पोर्टल के माध्यम से कौन कर सकेगा पंजीकरण?

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CM सैनी ने शुरू किया नया शिक्षक पोर्टल

इस विशेष रूप से तैयार किए गए पोर्टल पर मुख्य रूप से तीन श्रेणियों के योग्य और इच्छुक व्यक्ति अपना पंजीकरण करवा सकेंगे। इसमें सबसे पहले वे सेवानिवृत्त शिक्षक शामिल हैं, जो अपनी लंबी सेवा के दौरान प्राप्त शैक्षणिक अनुभव और दक्षता का लाभ विद्यार्थियों को देना चाहते हैं। इसके अलावा, देश सेवा के बाद समाज सेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहने वाले पूर्व सैनिक भी इस पोर्टल पर जुड़ सकेंगे। साथ ही, वे सभी प्रतिष्ठित नागरिक और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े अन्य इच्छुक व्यक्ति जो स्वेच्छा से यानी बिना किसी औपचारिक बाध्यता के बच्चों को पढ़ाने का जज्बा रखते हैं, इस डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अपनी सेवाएं दे सकेंगे।

शिक्षकों की कमी दूर करने और बेहतर शिक्षा की दिशा में बड़ा कदम

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CM सैनी ने शुरू किया नया शिक्षक पोर्टल

राज्य के दूरदराज और ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में अक्सर अध्यापकों के रिक्त पदों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई बाधित होने की समस्या सामने आती है। इस पोर्टल के जरिए सरकार ने इस चुनौती का एक व्यावहारिक और प्रभावी समाधान निकाला है। जब स्वैच्छिक रूप से पढ़ाने वाले योग्य शिक्षक और पूर्व सैनिक विद्यालयों से जुड़ेंगे, तो न केवल शिक्षण कार्यों में आ रही बाधाएं दूर होंगी, बल्कि विद्यार्थियों को उनके मार्गदर्शन से अनुशासित और संस्कारयुक्त शिक्षा भी प्राप्त होगी। सरकार की यह दूरदर्शी पहल यह सुनिश्चित करती है कि संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे की शिक्षा प्रभावित न हो और हर छात्र को अपने भविष्य को उज्ज्वल बनाने के समान अवसर मिल सकें।

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