Haryana News: अनिल विज का बड़ा बयान, कांग्रेस के आंदोलन पर साधा निशाना

हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने कांग्रेस के धरने पर तंज कसते हुए कहा कि संसद सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष हर बार नई कहानी या "डॉक्यूमेंट्री" लेकर आ जाता है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जुलाई 21, 2026

Haryana News: नीट (NEET) पेपर लीक मामले को लेकर दिल्ली में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में हुए कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन और मार्च पर हरियाणा के कैबिनेट मंत्री अनिल विज ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। प्रदेश के ऊर्जा, परिवहन एवं श्रम मंत्री अनिल विज ने इस धरने को महज एक “राजनीतिक नौटंकी” करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब भी देश में संसद का कोई सत्र शुरू होने वाला होता है, विपक्ष जानबूझकर इसी तरह का माहौल तैयार करता है। विज के अनुसार, कांग्रेस का वास्तविक उद्देश्य छात्रों की भलाई या शिक्षा में सुधार नहीं, बल्कि आगामी संसद सत्र की कार्यवाही में बाधा डालना और सुर्खियां बटोरना है।

अनिल विज ने तंज कसते हुए कहा कि यह विपक्ष की एक पुरानी और घिसी-पिटी रणनीति बन चुकी है। हर बार संसद सत्र से ठीक पहले एक नई कहानी या नई “डॉक्यूमेंट्री” पेश कर दी जाती है, जिसमें स्क्रिप्ट पुरानी ही होती है और किरदार भी वही रहते हैं, बस समय के साथ चेहरे बदल जाते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सिर्फ जनता का ध्यान भटकाने और देश में अस्थिरता का माहौल दिखाने का प्रयास कर रही है, जो कि पूरी तरह से एक सुनियोजित एजेंडा है।

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‘संसद में बात रखने की जगह सड़कों पर राजनीति करना पसंद करते हैं राहुल गांधी’

अनिल विज ने प्रदर्शन के स्थान और तरीकों पर सवाल उठाते हुए कहा कि भारत निश्चित रूप से एक जीवंत लोकतांत्रिक देश है, जहाँ हर किसी को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी असहमति जताने और धरना देने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन, इस अधिकार की आड़ में सैकड़ों की भीड़ लेकर सीधे संसद भवन या अति-सुरक्षित लोकसभा परिसर की तरफ मार्च करने की इजाजत किसी को नहीं दी जा सकती। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि दुनिया के किसी भी विकसित लोकतांत्रिक देश में संसद जैसी सर्वोच्च विधायी संस्था के ठीक सामने या भीतर इस प्रकार के अराजक प्रदर्शन की अनुमति नहीं होती है।

भाजपा नेता ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सीधे आड़े हाथों लेते हुए कहा कि देश की जनता ने उन्हें सांसद चुनकर सदन के भीतर अपनी बात रखने के लिए भेजा है। अगर विपक्ष को किसी भी विषय या प्रशासनिक विफलता पर सरकार को घेरना है, तो उसके लिए संसद के भीतर लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके उपलब्ध हैं। लेकिन राहुल गांधी सदन के भीतर सार्थक बहस करने के बजाय हमेशा सड़कों पर उतरकर सस्ती राजनीति करना अधिक पसंद करते हैं, जो एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि के आचरण के विपरीत है।

महात्मा गांधी से तुलना पर आपत्ति

कांग्रेस के विरोध प्रदर्शनों की तुलना ऐतिहासिक आंदोलनों से किए जाने पर भी अनिल विज ने कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेता अक्सर अपने धरनों की तुलना राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के आंदोलनों से करने लगते हैं, जबकि दोनों में जमीन-आसमान का अंतर है। महात्मा गांधी के आंदोलन पूरी तरह से अहिंसक और आत्मशुद्धि पर आधारित होते थे, जहाँ पुलिस पर पथराव या प्रशासनिक व्यवस्था को ठप करने जैसी हिंसक प्रवृत्तियों की कोई जगह नहीं थी। इसलिए आज के हिंसक और राजनीतिक रूप से प्रेरित प्रदर्शनों की तुलना गांधीजी के पवित्र आंदोलनों से करना उनका अपमान है।

पेपर लीक के गंभीर मुद्दे पर कांग्रेस द्वारा मांगे जा रहे इस्तीफों का जवाब देते हुए अनिल विज ने कांग्रेस के इतिहास का आईना दिखाया। उन्होंने सवाल किया कि राहुल गांधी आज परीक्षाओं में पारदर्शिता की बात कर रहे हैं, लेकिन उन्हें देश को यह भी बताना चाहिए कि कांग्रेस के लंबे शासनकाल के दौरान ऐसी कौन सी बड़ी परीक्षा थी जो बिना किसी धांधली, विवाद या अदालती हस्तक्षेप के पूरी हुई हो? विज ने पलटवार करते हुए कहा कि उस दौर में बार-बार पेपर लीक होने के बावजूद कभी कांग्रेस के किसी मंत्री ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा नहीं दिया था। इसके विपरीत, वर्तमान मोदी सरकार पेपर लीक की घटनाओं को बेहद गंभीरता से ले रही है, कड़े कानून बनाए गए हैं और जांच एजेंसियां मुस्तैदी से काम करते हुए दोषियों को जेल भेज रही हैं।

विज ने अंत में कांग्रेस को “बाधा पार्टी” की संज्ञा देते हुए कहा कि राहुल गांधी विपक्ष के नेता के रूप में अपनी भूमिका निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं। जब उन्हें देश में रहकर रचनात्मक सुझाव देने चाहिए, तब वे विदेश यात्राओं में व्यस्त रहते हैं और सत्र आते ही देश का माहौल बिगाड़ने की पटकथा लिख देते हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि विपक्ष इस राजनीतिक टकराव को छोड़कर संसद के भीतर जनहित के मुद्दों पर एक स्वस्थ और सार्थक बहस का हिस्सा बनेगा।

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