Haryana News: 11 मई से बदल जाएगी हरियाणा की सूरत? सफाई व्यवस्था पर सरकार का नया प्लान

11 मई से हरियाणा में सफाई व्यवस्था को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार ने नगर निकायों और प्रशासन के लिए नई रणनीति तैयार की है, जिसके बाद शहरों और कस्बों की तस्वीर बदलने का दावा किया जा रहा है। आखिर क्या है यह नया प्लान और कैसे बदलेगी व्यवस्था, जानिए पूरी रिपोर्ट।

सफाई व्यवस्था पर सरकार का नया प्लान

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 9, 2026

Haryana News: केंद्र सरकार द्वारा आयोजित स्वच्छ सर्वेक्षण-2026 के तहत निरीक्षण टीम कभी भी शहर का दौरा कर सकती है, लेकिन इससे पहले ही कैथल शहर की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होती नजर आ रही है। शहर के कई हिस्सों में कचरे के ढेर जमा हो गए हैं और मुख्य सड़कें, बाजार तथा रिहायशी इलाके गंदगी से अटे पड़े हैं। नगर परिषद के लिए इस स्थिति में “कचरा मुक्त शहर” और “वाटर प्लस” जैसी अहम श्रेणियों में बेहतर प्रदर्शन करना चुनौतीपूर्ण बन गया है।

पिछले एक सप्ताह से सफाई कर्मचारियों की जारी हड़ताल ने हालात को और गंभीर बना दिया है। नियमित सफाई कार्य ठप होने से गलियों और सड़कों पर पड़ा कचरा अब सड़ने लगा है। इससे उठ रही दुर्गंध ने स्थानीय लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। नागरिकों का कहना है कि गंदगी के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ रहा है और वातावरण दूषित होता जा रहा है।

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नगर परिषद के दावे और जमीनी हकीकत

नगर परिषद के अधिकारी लगातार यह दावा कर रहे हैं कि डोर-टू-डोर कचरा उठाने का कार्य जारी है और व्यवस्था को सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार हड़ताली कर्मचारियों से बातचीत चल रही है तथा वैकल्पिक संसाधनों की मदद से सफाई व्यवस्था संभालने की कोशिश की जा रही है।

हालांकि, शहर की वास्तविक स्थिति इन दावों से अलग दिखाई दे रही है। कई इलाकों में कई दिनों से कचरा नहीं उठाया गया है। सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी फैलने से आमजन में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासन को जल्द कोई ठोस कदम उठाना चाहिए ताकि शहर की हालत और खराब न हो।

सरकारी सेवाओं पर भी पड़ा असर

सफाई कर्मचारियों के प्रदर्शन का असर केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर परिषद से जुड़े कई जरूरी कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। कर्मचारियों ने परिषद कार्यालय के मुख्य गेट पर धरना दे रखा है, जिसके कारण लोगों को कार्यालय में आने-जाने में कठिनाई हो रही है।

जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र, प्रॉपर्टी आईडी, एनओसी तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं का काम प्रभावित हो गया है। दूर-दराज से आने वाले लोग घंटों इंतजार करने के बाद बिना काम कराए वापस लौटने को मजबूर हैं। इससे नागरिकों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

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600 कर्मचारियों की हड़ताल बनी बड़ी चुनौती

नगर परिषद के सामने सबसे बड़ी समस्या लगभग 600 सफाई कर्मचारियों का हड़ताल पर होना है। कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर कई दिनों से आंदोलन कर रहे हैं और उन्होंने हड़ताल को 11 मई तक बढ़ाने का फैसला लिया है।

कर्मचारी नेता शिवचरण का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर प्रशासन लगातार कर्मचारियों को मनाने की कोशिश कर रहा है ताकि शहर की सफाई व्यवस्था दोबारा पटरी पर लाई जा सके।

स्वच्छ सर्वेक्षण और रैंकिंग पर खतरा

इस बार नगर परिषद की योजना शहर को बेहतर स्वच्छता श्रेणी में लाने की है। “कचरा मुक्त शहर” की स्टार रेटिंग और “वाटर प्लस” प्रमाणपत्र प्राप्त करने के लिए वैज्ञानिक तरीके से कचरा निस्तारण और साफ-सुथरा वातावरण जरूरी माना जाता है। लेकिन वर्तमान हालात में शहर के कई हिस्से अस्थायी डंपिंग साइट जैसे दिखाई देने लगे हैं। अधिकारियों को चिंता है कि यदि इसी स्थिति में स्वच्छ सर्वेक्षण की टीम निरीक्षण के लिए पहुंच गई, तो शहर की रैंकिंग खराब हो सकती है। इसके साथ ही परिषद की ग्रेडिंग और भविष्य में मिलने वाले सरकारी फंड पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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