Haryana News: हरियाणा में भीषण गर्मी और तेज धूप से परेशान लोगों की निगाहें अब मानसून की बारिश पर टिकी हुई है। झुलसाने वाली गर्मी के बीच मौसम से जुड़ी एक राहत भरी खबर सामने आई है। आशंका जताई जा रही है कि इस बार मानसून हरियाणा में सामान्य समय से कुछ दिन पहले दस्तक दे सकता है। आमतौर पर प्रदेश में मानसून 25 जूव से 2 जुलाई के बीच पहुंचता है, लेकिन इस साल इसके करीब 5 दिन पहले आने की संभावना जताई जा रही है।
मौसम विभाग के अनुसार, हरियाणा में मानसून 22 जून के बाद कभी भी प्रवेश कर सकता है। अगर ऐसा होता है तो गर्मी से जूझ रहे लोगों को कुछ राहत मिल सकती है। हालांकि, मानसून की शुरुआत एंट्री के बावजूद पूरे प्रदेश में बारिश का फैलाव धीरे-धीरे हो सकता है।
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केरल में भी समय से पहले पहुचं सकता है मानसून
जानकारी के अनुसार, इस साल मानसून 26 मई तक केरल पहुंच सकता है। सामान्य तौर पर मानसूर केरल में 1 जून के आसपास दस्तक देता है। अगर मानसून केरल में जल्दी पहुंचता है, तो उत्तर भारत की ओर इसकी यात्रा भी सामान्य से पहले शुरू हो सकती है। इसी आधार पर हरियाणा में भी मानसून की एंट्री जल्दी होने की संभावना बन रही है।
हालांकि, मानसून का जल्दी आना यह जरूरी नहीं कि पूरे राज्य में तुरंत अच्छी बारिश हो जाए। कई बार मानसून की शुरुआत तो समय से पहले हो जाती है, लेकिन उसकी गति और फैलाव मौसमीय परिस्थितियों पर निर्भर करते हैं।
अलनीनो के असर की रफ्तार?

इस बार मानसून की चाल में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अलनीनो के असर के कारण मानसून की यात्रा में लंबे विराम आ सकते हैं। इसका मतलब है कि मानसून हरियाणा में प्रवेश तो जल्दी कर सकता है, लेकिन पूरे प्रदेश को कवर करने मे उसे सामान्य से ज्यादा समय लग सकता है।
अलनीनो की स्थिति में मानसूनी हवाओं की गति प्रभावित होती है और बारिश की गतिविधियां कमजोर या असमान हो सकती हैं। इसी वजह से इस बार मानसून की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कई इलाकों में बारिश जल्दी शुरू हो सकती है, जबकि कुछ हिस्सों को बारिश के लिए लंबा इंतजार करना पड़ सकता है।
पूरे हरियाणा को कवर
सामान्य परिस्थितियों में मानसून हरियाणा में प्रवेश करने के बाद करीब आठ से दस दिनों में पूरे प्रदेश को कवर कर लेता है। लेकिन इस साल यह प्रक्रिया लंबी खिंच सकती है। अगर मानसून की गति कमजोर रही तो राज्य के अलग-अलग हिस्सों में बारिश का अंतर साफ दिखाई दे सकता है। इसका असर खासकर ग्रामीण इलाकों और खेती पर पड़ सकता है। जिन क्षेत्रों में मानसून देर से पहुंचेगा, वहां किसानों को खरीफ फसलों की बुवाई की योजना बदलनी पड़ सकती है। धान, बाजरा, कपास और अन्य खरीफ फसलों के लिए समय पर बारिश बहुत जरूरी मानी जाती है।
किसानों की चिंता बढ़ा सकता है मानसून का ठहराव
हरियाणा में खरीफ सीजन की बुवाई मानसून पर काफी हद तक निर्भर करती है। अगर मानसून की बारिश समय पर और समान रूप से नहीं होती, तो किसानों को सिंचाई पर ज्यादा खर्च करना पड़ सकता है। मानसून की धीमी प्रगति से खेतों में नमी की कमी हो सकती है, जिससे बुवाई में देरी की आशंका बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए और जल्दबाजी में बुवाई करने से बचना चाहिए। बारिश की स्थिति और मिट्टी की नमी को देखते हुए ही फसल की योजना बनाना बेहतर रहेगा।
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हरियाणा में मानसून के पुराने रिकॉर्ड
हरियाणा में मानसून की एंट्री का इतिहास भी काफी दिलचस्प रहा है। प्रदेश में मानसून सबसे पहले साल 2008 में 13 जून को पहुंचा था। वहीं सबसे देरी से मानसून की दस्तक साल 1987 में 27 जुलाई को दर्ज की गई थी। इस बार मानसून की शुरुआती एंट्री की संभावना जरूर है, लेकिन पूरे राज्य को भिगोने में कितना समय लगेगा, यह आने वाले मौसमीय हालात पर निर्भर करेगा।










