Haryana News: हरियाणा सरकार ने स्कूलों में दिए जाने वाले मिड-डे मील को और ज्यादा प्रभावी बनाने के लिए एक नई योजना तैयार की है। इस पहल का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें संतुलित और संतुलित और पौष्टिक आहार प्रदान कर उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाना भी है। सरकार चाहती है कि बच्चों को ऐसा भोजन मिले जो उनके शारीरिक और मानसिक विकास में सहायक हो।
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‘मास्टर ट्रेनर’ मॉडल की शुरुआत
इस नई योजना के मुताबिक अब सीधे कुक-कम हेल्पर्स को प्रशिक्षण देने के बजाय पहले शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इन शिक्षकों को “मास्टर ट्रेनर” की भूमिका दी जाएगी। वे आगे स्कूलों में काम करने वाले कुक-कम-हेल्पर्स को पोषण, स्वच्छता और सुरक्षित भोजन बनाने के तरीकों की जानकारी देंगे। इस मॉडल से प्रशिक्षण अधिक व्यवस्थित और प्रभावी तरीके से लागू किया जा सकेगा।
शिक्षकों का चयन और प्राथमिकता
जानकारी के अनुसार, प्रत्येक जिले के हर ब्लॉक से 3 से 5 प्रतिक्षित स्नातक शिक्षक टीजीटी चुने जाएंगे। खास बात ये है कि गृह विज्ञान विषय से जुड़े शिक्षकों को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका कारण यह है कि उन्हें भोजन, पोषण और स्वास्थ्य से संबंधित विषयों की गहरी समझ होती है, जिससे वे बेहतक तरीके से प्रशिक्षण दे सकते हैं।
विशेषज्ञों द्वारा दी जाएगी ट्रेनिंग
चयनित शिक्षकों को पहले विशेषज्ञों द्वारा प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा। इस प्रशिक्षण में उन्हें पोषण संबंधी मानकों, स्वच्छता के नियमों, खाद्य सुरक्षा और भोजन की गुणवत्ता बनाए रखने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद यही शिक्षक स्कूल स्तर पर कुक-कम-हेल्पर्स को प्रशिक्षित करेंगे, जिससे सही जानकारी जमीनी स्तर तक पहुंचेगी।
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भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता में सुधार
इस पहल का मुख्य लाभ यह होगा कि स्कूलों में तैयार होने वाला भोजन अधिक पौष्टिक और सुरक्षित बनेगा। साफ-सफाई के बेहतर नियमों का पालन किया जाएगा, जिससे बच्चों को स्वच्छ और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिल सकेगा। साथ ही, खाना बनाने वाले कर्मचारियों की कार्यक्षमता और कौशल में भी वृद्धि होगी, जिससे भोजन की गुणवत्ता में निरंतर सुधार आएगा।
बच्चों के स्वास्थ्य और शिक्षा पर सकारात्मक असर
बेहतर पोषण का सीधा प्रभाव बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ेगा। जब बच्चों को संतुलित आहार मिलेगा, तो उनकी शारीरिक क्षमता बढ़ेगी और वे बीमारियों से भी कम प्रभावित होंगे। इसके अलावा, अच्छे स्वास्थ्य का असर उनकी पढ़ाई पर भी दिखाई देगा। बच्चों की एकाग्रता बढ़ेगी और स्कूल में उनकी उपस्थिति भी बेहतर होगी।
समग्र विकास की दिशा में कदम
यह योजना केवल भोजन तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के समग्र विकास को ध्यान में रखते हुए तैयार की गई है। सरकार का उद्देश्य है कि शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के स्वास्थ्य को भी मजबूत किया जाए, ताकि वे भविष्य में बेहतर नागरिक बन सकें।
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