Haryana: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, ट्रॉमा केयर के लिए बनेगी उच्च स्तरीय कमेटी

हरियाणा सरकार ने मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है।

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

अप्रैल 21, 2026

Haryana: हरियाणा सरकार ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। राज्य के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर (Level-3 Trauma Centers) स्थापित करने की प्रक्रिया आधिकारिक रूप से शुरू कर दी गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अमली जामा पहनाने के लिए सरकार ने एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जिसे 10 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं।

Haryana Politics: हरियाणा निकाय चुनाव से पहले गरमाई सियासत, दुष्यंत चौटाला का बड़ा बयान

उच्च स्तरीय कमेटी का गठन और कार्ययोजना

इस महत्वपूर्ण परियोजना की रूपरेखा तैयार करने के लिए गठित कमेटी की कमान पंडित भगवत दयाल शर्मा पीजीआईएमएस (ROHTAK) के निदेशक को सौंपी गई है। इस कमेटी में विशेषज्ञों और वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है, जिनमें सर्जरी विभाग के प्रमुख। कर्नाल (कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज), सोनीपत (खानपुर कलां) और नूंह (शहीद हसन खान मेवाती मेडिकल कॉलेज) के निदेशक।

कमेटी का मुख्य कार्य सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में चरणबद्ध तरीके से इन ट्रॉमा सेंटरों की स्थापना की संभावनाओं का आकलन करना है। उन्हें यह सुनिश्चित करना होगा कि कैसे कम से कम समय में इन सुविधाओं को धरातल पर उतारा जाए।

‘गोल्डन ऑवर’ में जान बचाना प्राथमिकता

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों का एक बड़ा कारण समय पर उचित इलाज न मिलना है। चिकित्सा विज्ञान में दुर्घटना के बाद के पहले घंटे को ‘गोल्डन ऑवर’ कहा जाता है। यदि घायल व्यक्ति को इस एक घंटे के भीतर विशेषज्ञ डॉक्टरों की देखरेख और प्राथमिक उपचार मिल जाए, तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। लेवल-3 ट्रॉमा सेंटर इसी कमी को पूरा करने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

क्या होंगी सुविधाएं?

इन सेंटरों को विशेष रूप से आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा। यहाँ मिलने वाली प्रमुख सुविधाएं निम्नलिखित हैं:

24/7 आपातकालीन सेवा

विशेषज्ञ डॉक्टर: सामान्य सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और एनेस्थीसिया विशेषज्ञों की ऑन-कॉल मौजूदगी।

आधुनिक बुनियादी ढांचा: सुसज्जित आईसीयू (ICU), अत्याधुनिक एक्स-रे मशीनें और चौबीसों घंटे चालू रहने वाली पैथोलॉजी लैब।

रेफरल सिस्टम: यदि मरीज की स्थिति बहुत अधिक नाजुक है, तो उसे तुरंत उच्च स्तरीय ट्रॉमा सेंटर में स्थानांतरित करने की सुचारू व्यवस्था।

क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

हरियाणा में सड़क हादसों के आंकड़े डराने वाले हैं। पिछले 11 वर्षों (2014 से अब तक) में राज्य में 57,901 लोगों ने सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवाई है। 2024 में 4,689 और 2025 में 4,885 मौतें दर्ज की गईं। सर्वाधिक दुर्घटना संभावित जिले: गुरुग्राम, सोनीपत, करनाल, पानीपत और झज्जर।

विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार और लापरवाही के साथ-साथ बुनियादी ढांचे की कमी भी इन मौतों का कारण है। ऐसे में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में इन सेंटरों का जाल बिछने से न केवल मौतों के आंकड़े कम होंगे, बल्कि हरियाणा की स्वास्थ्य प्रणाली पूरे देश के लिए एक मॉडल पेश करेगी। सरकार का यह कदम आम जनता के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक संजीवनी साबित होगा।

Haryana Police Recruitment Update: प्रेग्नेंट कैंडिडेट्स को राहत नहीं, अब चश्मा पहनने वालों के लिए खुला मौका