Haryana News: हरियाणा सरकार का बड़ा फैसला, अब शादी और निकाह के मंच से दिया जाएगा ‘बेटी बचाओ’ का संदेश

हरियाणा सरकार ने शादी और निकाह समारोहों को लेकर ऐसा बड़ा फैसला लिया है, जिसकी चर्चा पूरे राज्य में शुरू हो गई है। अब हर विवाह मंच से एक खास सामाजिक संदेश सुनाई देगा। सरकार का दावा है कि यह कदम समाज की सोच बदल सकता है और बेटियों के सम्मान को नई पहचान देगा।

शादी और निकाह के मंच से दिया जाएगा 'बेटी बचाओ' का संदेश

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 15, 2026

Haryana News: हरियाणा सरकार ने राज्य में गिरते लिंगानुपात को सुधारने और कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक बुराइयों को जड़ से खत्म करने के लिए एक बेहद अनूठी और व्यापक रणनीति तैयार की है। सरकार अब केवल कानूनी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि सामाजिक और धार्मिक मंचों के माध्यम से एक बड़ा जन आंदोलन शुरू करने जा रही है।

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शादी और निकाह के मंच से जागरूकता की नई पहल

इस अभियान का सबसे अनोखा पहलू यह है कि अब विवाह और निकाह जैसे मांगलिक उत्सवों का उपयोग ‘बेटी बचाओ’ के संदेश को फैलाने के लिए किया जाएगा। सरकार इसके लिए समाज के धार्मिक गुरुओं—जैसे पंडितों, मौलवियों और ग्रंथियों का सहयोग लेगी। विवाह समारोहों के दौरान नवविवाहित जोड़ों और उनके परिवारों को बेटा-बेटी की समानता और भ्रूण लिंग जांच के दुष्परिणामों के प्रति जागरूक किया जाएगा, ताकि नई पीढ़ी इस सामाजिक अपराध के खिलाफ खड़ी हो सके।

पीसी-पीएनडीटी और एमटीपी एक्ट का कड़ाई से पालन

पीसी-पीएनडीटी और एमटीपी एक्ट का कड़ाई से पालन
पीसी-पीएनडीटी और एमटीपी एक्ट का कड़ाई से पालन

स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) डॉ. सुमिता मिश्रा ने भ्रूण लिंग जांच और अवैध गर्भपात पर पूरी तरह रोक लगाने के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि:

  • सख्त छापेमारी: सभी जिलों में पीसी-पीएनडीटी (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques) और एमटीपी (Medical Termination of Pregnancy) कानूनों के तहत नियमित जांच और छापेमारी की जाएगी।
  • त्वरित कार्रवाई: कानून का उल्लंघन करने वाले या अवैध गतिविधियों में शामिल पाए जाने वाले क्लिनिकों और डॉक्टरों के खिलाफ तुरंत और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

जिला स्तर पर कड़ी निगरानी और समीक्षा बैठकें

प्रशासनिक स्तर पर तत्परता दिखाते हुए सरकार ने सभी सिविल सर्जनों को अगले तीन कार्य दिवसों के भीतर डिप्टी कमिश्नर (DC) की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समितियों और टास्क फोर्स की बैठकें बुलाने का निर्देश दिया है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य होगा:

  1. जिलों के लिंगानुपात की वर्तमान स्थिति की गहन समीक्षा करना।
  2. उन संवेदनशील क्षेत्रों (Hotspots) की पहचान करना जहाँ लिंगानुपात की स्थिति चिंताजनक है।
  3. अवैध गर्भपात और लिंग जांच को रोकने के लिए ठोस रणनीति तैयार करना।

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‘सहेली नेटवर्क’ और गर्भवती महिलाओं की विशेष ट्रैकिंग

जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य टीमों और ‘सहेली नेटवर्क’ को सक्रिय किया गया है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे गर्भवती महिलाओं, विशेषकर उन महिलाओं की विशेष निगरानी और देखभाल करें जिनके पहले से बेटियां हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी महिला पर भ्रूण लिंग जांच या जबरन गर्भपात के लिए पारिवारिक या सामाजिक दबाव न बनाया जा सके।

सामाजिक संगठनों का साथ और भविष्य का लक्ष्य

सरकार का मानना है कि प्रशासनिक सख्ती के साथ-साथ समाज की सोच को बदलना बेहद जरूरी है। इसलिए इस अभियान में महिला समूहों, सामाजिक संस्थाओं और स्थानीय संगठनों को जोड़ा जा रहा है ताकि इसे एक जन आंदोलन बनाया जा सके। सरकार ने सामूहिक प्रयासों के जरिए मई 2026 तक राज्य के लिंगानुपात में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार लाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

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