Harsh Firing Case: हर्ष फायरिंग मामले में बड़ा एक्शन, बीजेपी विधायक को 4 साल की कैद

हर्ष फायरिंग मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 4 साल की सजा और 25 लाख रुपये मुआवजे का आदेश दिया है। न्यू ईयर पार्टी में हुई गोलीबारी में महिला की मौत हुई थी, लेकिन सवाल यह है कि आगे क्या होगा और क्या विधायकी भी जाएगी?

बीजेपी विधायक को 4 साल की कैद

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

जुलाई 4, 2026

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Harsh Firing Case: दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट ने 2018 के चर्चित हर्ष फायरिंग मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए बिहार के बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें चार साल की सजा और 25 लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। यह मामला न्यू ईयर पार्टी के दौरान हुई उस घटना से जुड़ा है, जिसमें एक महिला की जान चली गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह सजा भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 304 पार्ट-II के तहत गैर इरादतन हत्या के मामले में दी गई है। इसके अलावा आर्म्स एक्ट के तहत भी उन्हें दोषी माना गया है।

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न्यू ईयर पार्टी में हुआ था हादसा

यह पूरा मामला दिल्ली के फतेहपुर बेरी इलाके में स्थित एक फार्महाउस में आयोजित न्यू ईयर सेलिब्रेशन के दौरान हुआ था। आरोप है कि जश्न के दौरान की गई हर्ष फायरिंग में गोली लगने से अर्चना गुप्ता नामक महिला की मौत हो गई थी।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हर्ष फायरिंग जैसी घटनाएं समाज में गंभीर खतरा बन चुकी हैं और अक्सर इनका परिणाम जानलेवा साबित होता है। कोर्ट ने इसे एक लापरवाही भरा कृत्य माना, जिसने एक निर्दोष व्यक्ति की जान ले ली।

अदालत की टिप्पणी और सबूतों का विश्लेषण

स्पेशल जज विशाल गोगने ने अपने विस्तृत फैसले में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से यह साबित होता है कि गोली चलाने की घटना में राजू कुमार सिंह की भूमिका थी, जिससे महिला की मौत हुई।

कोर्ट ने अपने 97 पन्नों के फैसले में यह भी कहा कि यह मामला ऐसे कई उदाहरणों में से एक है, जहां उत्सव के दौरान की गई लापरवाही गंभीर परिणामों में बदल जाती है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जनप्रतिनिधि होने के बावजूद कानून से ऊपर कोई नहीं है।

सजा और मुआवजे का आदेश

कोर्ट ने विधायक को चार साल की साधारण कैद की सजा सुनाई है। साथ ही आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की अतिरिक्त सजा भी दी गई है। इसके अलावा अदालत ने यह भी आदेश दिया कि 25 लाख रुपये का जुर्माना पीड़िता के परिवार को मुआवजे के रूप में दिया जाए। विधायक ने अदालत से प्रोबेशन पर रिहाई की मांग की थी, यह कहते हुए कि उनका किसी की जान लेने का इरादा नहीं था और उनका राजनीतिक रिकॉर्ड भी अब तक साफ रहा है। हालांकि, अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

विधायकी पर संकट और कानूनी स्थिति

इस फैसले के बाद राजू कुमार सिंह की विधायकी पर भी संकट गहरा गया है। भारतीय कानून के अनुसार, यदि किसी सांसद या विधायक को दो साल या उससे अधिक की सजा मिलती है, तो उसकी सदस्यता स्वतः समाप्त हो जाती है। यह प्रावधान जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8 के तहत लागू होता है। सुप्रीम कोर्ट के 2013 के ऐतिहासिक लिली थॉमस फैसले के बाद यह नियम और सख्त हो गया है, जिसके तहत दोषसिद्धि होते ही सदस्यता समाप्त मानी जाती है। हालांकि, यदि उच्च अदालत (हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट) दोषसिद्धि पर रोक लगा देती है, तभी सदस्यता बहाल रह सकती है। केवल सजा पर रोक या जमानत मिलने से विधायकी सुरक्षित नहीं रहती।

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