Haridwar News: हरिद्वार अर्धकुंभ 2027 की तैयारियों के बीच नगर निगम शहर में मीट और अंडों की बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। इस प्रस्ताव पर 6 अप्रैल को होने वाली निगम बोर्ड की बैठक में चर्चा होगी। नगर निगम की मेयर किरण जैसल का कहना है कि अर्धकुंभ के दौरान शहर में भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, इसलिए स्वच्छता और धार्मिक भावनाओं को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया जा रहा है।
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शहर में दुकानों को बाहर शिफ्ट करने की योजना
प्रस्ताव के अनुसार, शहर की सीमा के भीतर संचालित मीट की दुकानों को बाहर शिफ्ट करने की योजना बनाई गई है। इसके लिए नगर निगम ने पहले ही 56 दुकानों का निर्माण कराया है, लेकिन अभी इनका आवंटन नहीं हुआ है। प्रस्ताव में यह भी शामिल है कि रेस्टोरेंट्स में मांस और अंडों की बिक्री पर रोक लगाई जाए। यदि यह प्रस्ताव पास होता है, तो अनुमान के अनुसार 100 से अधिक दुकानों और प्रतिष्ठानों पर असर पड़ेगा और करीब 10 हजार लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
पहले से लागू है आंशिक प्रतिबंध
हरिद्वार में पहले से ही हर की पौड़ी से 5 किलोमीटर के दायरे में मांस की बिक्री पर रोक लागू है। यह नियम ब्रिटिश काल के पुराने उपनियमों के तहत प्रभावी है। नगर निगम के अधिकारियों के अनुसार, प्रस्ताव पारित होने के बाद जनसुनवाई आयोजित की जाएगी, जिसमें आम लोग अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे।
प्रस्ताव लागू करने की प्रक्रिया
जनसुनवाई के बाद प्रस्ताव को गजट में प्रकाशित किया जाएगा और इसे लागू करने में लगभग दो महीने का समय लग सकता है। इस दौरान नगर निगम सुनिश्चित करेगा कि शहर के बाहर निर्मित दुकानों में आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी हों। इससे श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण बनाए रखने में मदद मिलेगी।
धार्मिक और सामाजिक महत्व
हरिद्वार नगर निगम का मानना है कि अर्धकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजन के दौरान धार्मिक भावनाओं का सम्मान करना और स्वच्छता बनाए रखना अत्यंत जरूरी है। शहर में मीट और अंडों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने से श्रद्धालुओं के बीच धार्मिक अनुकूलता बढ़ेगी और धार्मिक आयोजनों का संचालन सुचारू रूप से होगा।
संभावित प्रभाव
इस प्रस्ताव के लागू होने से मीट और अंडे की दुकानों के मालिक, रेस्टोरेंट संचालक और सप्लायर्स पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। हालांकि नगर निगम ने लोगों को बाहर शिफ्ट करने की सुविधा और वैकल्पिक व्यवस्थाएं देने की तैयारी की है। इस कदम से शहर में धार्मिक और सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। हरिद्वार नगर निगम की इस पहल का उद्देश्य केवल धार्मिक भावनाओं का सम्मान नहीं बल्कि अर्धकुंभ के दौरान शहर में स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।
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