Uttarakhand News: हरिद्वार अर्धकुंभ में हाईटेक सुरक्षा, 82.13 लाख से लगेंगे AI कैमरे, चेहरे से होगी पहचान

हरिद्वार अर्धकुंभ से पहले गंगा घाटों की सुरक्षा के लिए हाईटेक इंतजाम की तैयारी है। 82.13 लाख रुपये की लागत से एआई कैमरे लगाए जाएंगे, जो चेहरों की पहचान और भीड़ का आकलन कर सकेंगे। रात में निगरानी से लेकर प्रतिबंधित क्षेत्रों पर नजर तक, जानिए इस योजना की खास बातें।

82.13 लाख से लगेंगे AI कैमरे, चेहरे से होगी पहचान

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

अक्टूबर 25, 2026

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Uttarakhand News: उत्तराखंड के हरिद्वार में अर्धकुंभ की तैयारियों के बीच गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की सुरक्षा को मजबूत बनाने की योजना तैयार की जा रही है। इसके तहत घाटों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई तकनीक से लैस सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण (एचआरडीए) ने इस परियोजना के लिए 82.13 लाख रुपये की अनुमानित लागत निर्धारित की है। इन कैमरों के जरिए केवल वीडियो रिकॉर्डिंग ही नहीं, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों और भीड़ की स्थिति का विश्लेषण करने में भी मदद मिलेगी।

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चेहरे की पहचान से लेकर भीड़ की निगरानी तक होगी सुविधा

प्रस्तावित एआई कैमरों की खासियत यह होगी कि वे चेहरे की पहचान करने और लोगों तथा वाहनों की गतिविधियों को पहचानने में सक्षम होंगे। इसके साथ ही प्रतिबंधित क्षेत्रों में किसी व्यक्ति के प्रवेश करने या निर्धारित सीमा पार करने जैसी गतिविधियों का पता लगाने की सुविधा भी प्रस्तावित है। इससे घाटों पर निगरानी करने वाले कर्मचारियों को संवेदनशील स्थानों की स्थिति समझने और जरूरत के अनुसार कार्रवाई करने में सहायता मिल सकती है।

भीड़ का घनत्व और कतारों की लंबाई का भी होगा आकलन

अर्धकुंभ के दौरान गंगा स्नान के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए भीड़ प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। एआई तकनीक से लैस कैमरों के माध्यम से घाटों पर भीड़ का घनत्व, कतारों की लंबाई और अधिक भीड़ वाले क्षेत्रों का आकलन करने की सुविधा प्रस्तावित है। इससे प्रशासन को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किन स्थानों पर भीड़ बढ़ रही है और कहां अतिरिक्त सुरक्षा कर्मचारियों की जरूरत पड़ सकती है।

गंगा घाटों पर हादसों की आशंका को देखते हुए निगरानी जरूरी

गंगा घाटों पर हादसों की आशंका को देखते हुए निगरानी जरूरी
गंगा घाटों पर हादसों की आशंका को देखते हुए निगरानी जरूरी

हरिद्वार के गंगा घाटों पर पर्वों और विशेष स्नान के दौरान श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में फिसलन, पानी का तेज बहाव, गहरे पानी में चले जाना और भीड़ का दबाव हादसों की वजह बन सकते हैं। भीड़ के बीच किसी व्यक्ति के लापता होने या परिवार से बिछड़ने पर उसे तलाशना भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।

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ऐसी परिस्थितियों में सीसीटीवी कैमरों से घाटों के विभिन्न हिस्सों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। किसी संवेदनशील स्थान पर स्थिति बिगड़ने की आशंका होने पर निगरानी कर्मचारी संबंधित टीम को वहां भेजने के लिए जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। हालांकि, इस व्यवस्था की प्रभावशीलता कैमरों की तैनाती, नियंत्रण कक्ष और सुरक्षा टीमों के बीच बेहतर समन्वय पर भी निर्भर करेगी।

दो तरह के कैमरों से होगी दिन-रात निगरानी

योजना के तहत आउटडोर बुलेट कैमरे और पीटीजेड कैमरे लगाने का प्रावधान है। बुलेट कैमरों में रात के समय निगरानी के लिए इन्फ्रारेड तकनीक होगी। इनके लिए 50 से 80 मीटर तक की इन्फ्रारेड दूरी, मोटर से नियंत्रित लेंस और मेमोरी कार्ड की सुविधा निर्धारित की गई है। कैमरों को धूल और पानी से बचाव के तय मानकों के अनुरूप रखने का भी प्रावधान है।

पीटीजेड कैमरों में होगा 33 गुना ऑप्टिकल जूम

दूसरी श्रेणी में पीटीजेड कैमरे शामिल हैं, जिन्हें जरूरत के अनुसार अलग-अलग दिशाओं में घुमाया जा सकता है। इनमें 33 गुना ऑप्टिकल जूम और 200 मीटर तक की इन्फ्रारेड निगरानी क्षमता का प्रावधान है। इससे दूर स्थित क्षेत्रों को करीब से देखने और रात के समय भी निगरानी करने में सहायता मिल सकती है। इन कैमरों में भी एआई आधारित विश्लेषण की सुविधाएं प्रस्तावित हैं।

82.13 लाख की परियोजना से सुरक्षा प्रबंधन को मिलेगी मदद

82.13 लाख की परियोजना से सुरक्षा प्रबंधन को मिलेगी मदद
82.13 लाख की परियोजना से सुरक्षा प्रबंधन को मिलेगी मदद

हरिद्वार में अर्धकुंभ से पहले एआई आधारित निगरानी व्यवस्था विकसित करने का उद्देश्य घाटों पर सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना है। 82.13 लाख रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना के लागू होने से प्रशासन को वास्तविक समय में स्थिति पर नजर रखने में मदद मिल सकती है। अब परियोजना के क्रियान्वयन, कैमरों की स्थापना और निगरानी व्यवस्था के संचालन से जुड़ी आगे की जानकारी महत्वपूर्ण होगी। श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए तकनीक के साथ पर्याप्त कर्मचारी, समय पर सूचना और प्रभावी आपातकालीन प्रबंधन भी जरूरी रहेगा।

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