Hardeep Singh Nijjar: खालिस्तानी अलगाववादी और भारत द्वारा घोषित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के मामले में एक बेहद चौंकाने वाला और बड़ा खुलासा हुआ है। इस खुलासे ने कनाडा के पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा भारत पर लगाए गए आरोपों की पूरी तरह हवा निकाल दी है। अमेरिका द्वारा सार्वजनिक किए गए एक नए आरोप-पत्र (Indictment) और कनाडा की राष्ट्रीय पुलिस ‘रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस’ (RCMP) के बयानों से साफ हो गया है कि निज्जर की हत्या के पीछे भारत सरकार का कोई हाथ नहीं था, बल्कि यह एक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक सिंडिकेट (गैंगस्टर नेटवर्क) की कारस्तानी थी।
अमेरिका की चार्जशीट में लॉरेंस बिश्नोई और गोल्डी बराड़ मुख्य आरोपी
अमेरिकी जांच एजेंसियों द्वारा जारी की गई आधिकारिक चार्जशीट में प्रतिबंधित ‘बिश्नोई गैंग’ के प्रमुख 33 वर्षीय गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और उसके करीबी सहयोगी सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ पर निज्जर की हत्या की साजिश रचने के सीधे आरोप तय किए गए हैं।
जेल से रची गई साजिश: अमेरिकी अभियोग के अनुसार, लॉरेंस बिश्नोई ने भारत की जेल में बंद रहते हुए इस हत्याकांड के निर्देश जारी किए थे।
उत्तरी अमेरिका में गोल्डी ने संभाली कमान: कनाडा और अमेरिका में इस पूरे ऑपरेशन और बिश्नोई गैंग की गतिविधियों की निगरानी गोल्डी बराड़ कर रहा था।
सरकारी संलिप्तता का जिक्र नहीं: सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस पूरे अमेरिकी आरोप-पत्र में भारत सरकार या उसके किसी एजेंट की भूमिका का दूर-दूर तक कोई जिक्र नहीं है।
कनाडाई रॉयल पुलिस (RCMP) का बड़ा यू-टर्न
भारतीय समयानुसार बुधवार (8 जुलाई 2026) को कनाडाई ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (CBC News) की एक रिपोर्ट ने ट्रूडो के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया।
कोई सबूत नहीं मिला: आरसीएमपी (RCMP) की उप आयुक्त लिसा मोरलैंड ने एक विशेष इंटरव्यू में स्पष्ट रूप से कहा, “हमारी जांच में निज्जर हत्याकांड में भारतीय अधिकारियों की संलिप्तता का कोई सबूत नहीं मिला है।”
भारत ने किया सहयोग: उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भारत सरकार ने इस मामले की जांच में कनाडाई सुरक्षा एजेंसियों का पूरा सहयोग किया है।
अमेरिकी अधिकारियों की पुष्टि: लॉस एंजिलिस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एस्ली सहित अमेरिकी अधिकारियों ने साफ किया कि यह मामला पूरी तरह संगठित अपराध नेटवर्क पर केंद्रित है, न कि किसी देश की संलिप्तता पर।
पूर्व पीएम जस्टिन ट्रूडो ने पैदा किया था राजनयिक संकट
याद दिला दें कि 18 जून 2023 को कनाडाई शहर ‘सरे’ के एक गुरुद्वारे के बाहर निज्जर की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। सितंबर 2023 में तत्कालीन कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो ने संसद में खड़े होकर भारत सरकार पर “विश्वसनीय आरोप” लगाए थे। भारत ने तब भी इन दावों को बेतुका और राजनीति से प्रेरित बताकर खारिज कर दिया था। ट्रूडो की इस जिद के कारण दोनों देशों के बीच गहरा राजनयिक गतिरोध पैदा हो गया था; राजनयिकों को निष्कासित कर दिया गया, वीजा सेवाएं बंद हो गईं और व्यापारिक वार्ताओं पर पूरी तरह ब्रेक लग गया था।
पीएम मार्क कार्नी के आने से सुधरे भारत-कनाडा संबंध
कनाडा की मीडिया जैसे ‘द ग्लोब एंड मेल’ और ‘टोरंटो सन’ के मुताबिक, सालों के अविश्वास के बाद अब दोनों देशों के संबंध सामान्य होने लगे हैं। मई 2025 में कनाडा के नए प्रधानमंत्री बने मार्क कार्नी ने भारत के प्रति ओटावा की नीति को पूरी तरह बदला।
पूर्व कनाडाई राजनयिक एलन केसल के अनुसार, पीएम मार्क कार्नी द्वारा अल्बर्टा में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के लिए भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित करना और उनके साथ द्विपक्षीय वार्ता करना इस बात का सबूत है कि कनाडा अब अलगाव की नीति छोड़ बातचीत की राह पर लौट आया है। राजनीतिक बदलाव के बाद दोनों देशों के उच्चायुक्त वापस लौट चुके हैं, वीजा सेवाएं बहाल हो गई हैं और ऊर्जा, सुरक्षा व पर्यावरण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर साझा रणनीतिक सहयोग और खुफिया इनपुट्स का आदान-प्रदान फिर से शुरू हो गया है।
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