Hamirpur Bridge Collapse: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से शुक्रवार तड़के एक अत्यंत हृदय विदारक खबर सामने आई है। यहाँ बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल का एक बड़ा हिस्सा (स्लैब) अचानक भरभराकर गिर गया। इस भीषण दुर्घटना में मलबे के नीचे दबकर 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया। फिलहाल घटनास्थल पर बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है ताकि मलबे में दबे अन्य लोगों को सुरक्षित निकाला जा सके।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लिया घटना का संज्ञान
बताते चले कि, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट की हैं। सीएम ने वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल घटनास्थल पर पहुँचने के कड़े निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन शोक संतप्त परिवारों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखे और उन्हें हर संभव सरकारी सहायता और मुआवज़ा तत्काल उपलब्ध कराया जाए।
राहत और बचाव कार्य में जुटी SDRF की टीम
मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा कि हमीरपुर में हुई जनहानि अत्यंत दुखद है। उन्होंने जिला प्रशासन को राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के साथ समन्वय स्थापित कर बचाव अभियान में तेजी लाने को कहा है। वर्तमान में, प्रशासनिक अमला और बचाव दल मलबे को हटाने और फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए जेसीबी व अन्य आधुनिक उपकरणों का उपयोग कर रहे हैं। राहत टीम की प्राथमिकता मलबे में दबे आखिरी व्यक्ति तक पहुँचने की है।
हादसे की भयावह रात और एएसपी का घटनाक्रम विवरण
हमीरपुर के एएसपी अरविंद कुमार वर्मा ने घटना का विवरण देते हुए बताया कि 28-29 मई की मध्यरात्रि करीब 2 बजे पुलिस को सूचना मिली थी कि थाना लालपुर क्षेत्र के मोराकंदर और कुरारा को जोड़ने वाले पुल का स्लैब गिर गया है। एएसपी के अनुसार, जब सूचना मिली तो पुलिस बल मौके पर पहुँचा। अभी भी कुछ लोग ढांचे पर फंसे हुए हैं, जिन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। अब तक 5 मृतकों की पहचान कर ली गई है, जो हमीरपुर और बांदा जिले के निवासी बताए जा रहे हैं।
निर्माण कार्य और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि बेतवा नदी पर बन रहे इस पुल का निर्माण स्थानीय स्तर पर काफी समय से चल रहा था, जिसे राज्यसभा सांसद बाबूराम निषाद के प्रयासों से स्वीकृति मिली थी। हादसे के बाद अब निर्माण की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जिला प्रशासन ने अब जांच के आदेश दिए हैं कि क्या निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे। फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान घायलों के उपचार और मलबे से शवों को बाहर निकालने पर केंद्रित है।










