Hamid Ansari on Dhankhar Resign: उपराष्ट्रपति पद से धनखड़ का इस्तीफा, अंसारी ने दिया बड़ा बयान

पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि जगदीप धनखड़ के उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफे के पीछे की असल वजह उन्हें पता नहीं है और इतना ऊंचा पद छोड़ना बेहद असामान्य है।

Hamid Ansari on Dhankhar Resign

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

फ़रवरी 7, 2026

Hamid Ansari on Dhankhar Resign: 6 जनवरी 2026 को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के इस्तीफे ने पूरे देश में राजनीतिक हलचल पैदा कर दी। यह घटना इसलिए भी खास रही क्योंकि भारतीय राजनीति के इतिहास में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देना बेहद दुर्लभ है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने कहा कि उन्हें अब तक यह नहीं पता कि असल में क्या हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि उपराष्ट्रपति का पद बहुत बड़ा होता है और इस पद से इस्तीफा देना पहले कभी नहीं हुआ है।

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इस्तीफा देने की सामान्य स्थिति

हामिद अंसारी ने कहा कि उपराष्ट्रपति केवल एक ही स्थिति में इस्तीफा देता है—जब वह देश का राष्ट्रपति बनता है। उस समय वह अपने पद से इस्तीफा देकर नया पद ग्रहण करता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने ऊंचे पद से कोई क्यों इस्तीफा देगा और इसके पीछे की कहानी क्या है, यह उन्हें ज्ञात नहीं है।

दबाव की बातों पर अंसारी का जवाब

जगदीप धनखड़ पर किसी तरह के दबाव होने की अटकलों पर हामिद अंसारी ने कहा कि उन पर कोई दबाव नहीं था। उन्होंने बस इस्तीफा दिया और चले गए।

भाईचारे पर चिंता

उत्तराखंड के कोटद्वार में एक कपड़ों की दुकान पर हुए हमले को लेकर अंसारी ने समाज में बढ़ते तनाव पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जातिवाद, भाषा और क्षेत्रीय विवाद अलग-अलग मुद्दे नहीं हैं, बल्कि यह सब इस बात का नतीजा है कि देश में आपसी भाईचारा धीरे-धीरे खत्म हो रहा है।

विविधता ही भारत की ताकत

अंसारी ने कहा कि लद्दाख से कन्याकुमारी तक लोगों की भाषा, खान-पान और रहन-सहन अलग है, लेकिन एक चीज सबको जोड़ती है—वे सभी भारतीय नागरिक हैं। यही भावना हमें एकजुट रखती है। अगर इस भावना को सींचा नहीं जाएगा, तो यह धीरे-धीरे कमजोर हो जाएगी।

भेदभाव के लिए कौन जिम्मेदार?

उन्होंने कहा कि आज अखबारों में भाषा, धर्म और अन्य विवादों की खबरें आती हैं। इस भेदभाव के लिए हर व्यक्ति जिम्मेदार है। किसी एक शख्स को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। समाज में जो माहौल बना है, उसमें हर किसी की भूमिका है। बड़े नेताओं की बड़ी भूमिका होती है और छोटे नेताओं की छोटी। उन्होंने कहा कि आज भाईचारे की भावना खत्म होती जा रही है और यह चिंता का विषय है।

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