Gwalior Temple Accident : ग्वालियर मंदिर हादसे में 14 मौतें, मोहन यादव का बड़ा एक्शन, पुलिसकर्मी निलंबित

ग्वालियर में रविवार तड़के मंदिर के बाहर अचानक मौत बनकर आया तेज रफ्तार ट्रक श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। हादसे में 14 लोगों की जान चली गई। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जांच के आदेश दिए और पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की। लेकिन सबसे बड़ा सवाल है—प्रतिबंधित क्षेत्र में ट्रक पहुंचा कैसे?

Gwalior Temple Accident

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अक्टूबर 18, 2026

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Gwalior Temple Accident :  मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में रविवार तड़के एक दर्दनाक सड़क हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। मंदिर के बाहर श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच तेज रफ्तार ट्रक घुस गया और कई लोगों को कुचलते हुए मंदिर के प्रवेश द्वार से जा टकराया। इस भीषण हादसे में कई लोगों की जान चली गई, जबकि बड़ी संख्या में श्रद्धालु घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाने के लिए तत्काल प्रयास शुरू किए गए।

हादसे में 14 लोगों की मौत, कई घायल

पुलिस के अनुसार, इस दुर्घटना में 14 लोगों की मौत हुई है। हादसे में घायल लोगों को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 28 लोग घायल हुए थे, जबकि बाद के विवरण में 27 घायलों के अस्पताल में इलाज जारी होने की बात कही गई है। घायलों की स्थिति और हादसे के सटीक कारणों को लेकर प्रशासन की ओर से जांच की जा रही है। घटना ने मंदिरों के आसपास यातायात व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जताया दुख

ग्वालियर हादसे पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने गहरा दुख व्यक्त किया है। इंदौर में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में ट्रक के प्रवेश करने के कारण यह दुर्घटना हुई। उन्होंने जिला प्रशासन को घटना की तथ्यपरक जांच करने और विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं, ताकि हादसे के कारणों और जिम्मेदारी से जुड़े तथ्यों का पता लगाया जा सके।

पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई, जांच के आदेश

मुख्यमंत्री ने घटना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नगर पुलिस अधीक्षक को हटाने और आठ अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित करने का आदेश दिया है। प्रतिबंधित क्षेत्र में भारी वाहन कैसे पहुंचा और वहां सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी किस तरह की जा रही थी, इन सवालों के जवाब जांच के बाद सामने आ सकते हैं। प्रशासन की जांच में यातायात नियंत्रण और पुलिस की जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की पड़ताल अहम होगी।

मृतकों के परिजनों को चार लाख रुपये की सहायता

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। गंभीर रूप से घायल लोगों का इलाज सरकार की ओर से कराया जाएगा। इसके अलावा हादसे में घायल अन्य लोगों को 50-50 हजार रुपये की सहायता दी जाएगी। सरकार की ओर से घोषित आर्थिक मदद का उद्देश्य पीड़ित परिवारों को तत्काल राहत पहुंचाना है। हालांकि, इस अपूरणीय क्षति के बीच प्रभावित परिवारों के लिए अपनों को खोने का दर्द सबसे बड़ा है।

जानिए हादसे में जान गंवाने वालों के नाम

इस दुर्घटना में जान गंवाने वालों में महलगांव निवासी सतेंद्र सिंह गुर्जर उर्फ जगदीश सिंह, राजीव नगर निवासी सरला तोमर, खुरेरी के बड़ागांव निवासी गौरव परिहार, श्योपुर के सहसराम निवासी महेश शर्मा और शौर्य शर्मा शामिल हैं। इनके अलावा शिवपुरी जिले के महागावरा निवासी विमलेश, भितरवार के मावटा निवासी देवेश बघेल, ठाठीपुर निवासी प्रिंस उर्फ छोटू जाटव, शिवनगर गदाईपुरा निवासी हेमंत राठौर, महेशपुरा निवासी दिव्यांश कुशवाह और गदाईपुरा निवासी पवन राठौर के नाम भी मृतकों की सूची में बताए गए हैं।

हादसे ने सुरक्षा व्यवस्था पर खड़े किए सवाल

ग्वालियर की यह घटना मंदिरों के आसपास भीड़ प्रबंधन और प्रतिबंधित क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही रोकने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। अब जांच के जरिए यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि ट्रक प्रतिबंधित क्षेत्र में कैसे पहुंचा और हादसे को रोकने के लिए पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं थे। मुख्यमंत्री के निर्देशों के बाद प्रशासनिक जांच और पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई पर नजर रहेगी।