Guyana Parliament News: गुयाना की संसद में गूंजी हिंदी, मंत्री विकाश रामकिसून ने विपक्ष को दी खुली चुनौती

भारत से 14,000 किमी दूर गुयाना की संसद में तब सन्नाटा पसर गया जब कृषि मंत्री विकाश रामकिसून ने धाराप्रवाह हिंदी में विपक्षी सांसद को ललकारा। उन्होंने कहा, 'विषय आप तय करें, मैं बिना कागज देखे इसी वक्त हिंदी में बहस करने को तैयार हूं।' आखिर क्यों छिड़ी विदेशी संसद में हिंदी पर जंग?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 11, 2026

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Guyana Parliament News: दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना की संसद में हाल ही में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जिसने दुनिया भर में बसे भारतीयों का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। ‘बजट 2026’ पर चर्चा के दौरान भारतीय मूल के मंत्री विकाश रामकिसून ने अपनी सांस्कृतिक जड़ों और भाषाई क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया। जब सदन में उनकी हिंदी बोलने की काबिलियत पर सवाल उठाए गए, तो उन्होंने किसी विदेशी भाषा का सहारा लेने के बजाय शुद्ध हिंदी में अपनी बात रखकर सबको निरुत्तर कर दिया। यह घटना वैश्विक मंच पर हिंदी के बढ़ते प्रभाव और अपनी विरासत के प्रति अटूट सम्मान का जीवंत उदाहरण बन गई है।

विपक्ष के तंज पर ‘हिंदी’ की दहाड़: सन्न रह गया पूरा सदन

विवाद की शुरुआत तब हुई जब विपक्षी सांसद विष्णु पांडे ने सदन की कार्यवाही के दौरान विकाश रामकिसून की भाषाई दक्षता पर तंज कसा। इस चुनौती को स्वीकार करते हुए मंत्री रामकिसून तुरंत अपनी सीट पर खड़े हुए और बिना किसी हिचकिचाहट के धाराप्रवाह हिंदी बोलना शुरू कर दिया। उन्होंने आदरणीय अध्यक्ष को संबोधित करते हुए विपक्षी सदस्य को किसी भी गंभीर विषय पर तत्काल चर्चा करने के लिए आमंत्रित किया। उनकी शुद्ध शब्दावली और आत्मविश्वास को देखकर सदन में मौजूद अन्य सदस्य हक्का-बक्का रह गए और कुछ क्षणों के लिए पूरे सदन में सन्नाटा पसर गया।

बिना कागज और तैयारी के बहस की चुनौती: ‘विषय आप चुनें, भाषा मेरी होगी’

विकाश रामकिसून ने संसद में ताल ठोकते हुए कहा कि वे किसी भी स्तर पर और किसी भी स्थान पर डिबेट करने के लिए तैयार हैं। उन्होंने विपक्ष को खुली चुनौती देते हुए कहा, “विषय आप तय करें, मैं बिना किसी कागज या पूर्व तैयारी के केवल हिंदी में अपनी बात रखूंगा।” उनकी इस निर्भीक घोषणा ने न केवल उनकी विद्वत्ता को साबित किया, बल्कि यह भी दिखाया कि एक राजनेता के रूप में उनकी वैचारिक पकड़ कितनी मजबूत है। सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जहाँ लोग उनकी साहसी शैली की प्रशंसा कर रहे हैं।

दिल्ली से गहरा नाता: शिक्षा और पेशेवर पृष्ठभूमि

विकाश रामकिसून का भारत से केवल सांस्कृतिक ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक जुड़ाव भी बहुत गहरा है। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा भारत की राजधानी दिल्ली से प्राप्त की है। रामकिसून ने दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) से मास्टर ऑफ कॉमर्स और फाइनेंस की डिग्री हासिल की है, जिसने उनके व्यक्तित्व को एक नई दिशा दी। राजनीति में आने से पहले वे बैंकिंग क्षेत्र में एक सफल मैनेजर के रूप में कार्य कर चुके हैं और उनके पास कानून की डिग्री भी है। वर्तमान में वे गुयाना के कृषि मंत्रालय में राज्य मंत्री के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

गुयाना में भारतीय विरासत: 40 प्रतिशत आबादी का प्रतिनिधित्व

गुयाना की लगभग 40 प्रतिशत आबादी भारतीय मूल की है। इनके पूर्वज 1838 से 1917 के बीच उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों से गिरमिटिया मजदूर के रूप में वहां गए थे। आज विकाश रामकिसून जैसे नेता उसी गौरवशाली परंपरा के वाहक बने हैं। जॉर्जटाउन स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी इस पल की सराहना करते हुए इसे भारत और गुयाना के प्रगाढ़ सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक बताया है। उच्चायोग ने गर्व व्यक्त किया कि विदेशी संसद में हमारी भाषा का गूंजना एक सुखद अनुभूति है।

वैश्विक मंच पर बढ़ता भारतीय संस्कृति का प्रभाव

विकाश रामकिसून द्वारा दी गई यह चुनौती केवल एक भाषाई उत्तर नहीं था, बल्कि अपनी पहचान और पूर्वजों की विरासत के प्रति अटूट विश्वास का शंखनाद था। उनकी इस प्रतिक्रिया ने साबित कर दिया है कि भारतीय संस्कृति की जड़ें सीमाओं को लांघकर दुनिया भर में अपनी सुगंध फैला रही हैं। इस घटना ने प्रवासी भारतीयों के मन में अपनी भाषा के प्रति सम्मान को और अधिक बढ़ा दिया है, जिसकी चर्चा आज हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर हो रही है।

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