Bomb Threat: हरियाणा की साइबर सिटी मंगलवार की सुबह उस वक्त दहशत में डूब गई, जब क्षेत्र के कई नामी शिक्षण संस्थानों को बम से उड़ाने का धमकी भरा ईमेल प्राप्त हुआ। ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’ के नाम से भेजे गए इस संदेश ने न केवल पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है, बल्कि अभिभावकों और बच्चों के बीच भी भारी डर का माहौल पैदा कर दिया है।
सुबह 7:13 बजे आया धमकी भरा ईमेल
मंगलवार की सुबह करीब 7:13 बजे डीएवी स्कूल (सेक्टर-14 और सेक्टर-49) सहित कई प्रमुख संस्थानों के इनबॉक्स में एक खौफनाक संदेश पहुंचा। खुद को प्रतिबंधित संगठन का हिस्सा बताने वाले प्रेषक ने हरियाणा में खालिस्तान समर्थक लहर तेज करने की बात कही। इस डिजिटल धमकी में न केवल स्कूलों को निशाना बनाया गया, बल्कि देश के प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का जिक्र करते हुए इसे ‘शहीद निज्जर’ की मौत का प्रतिशोध बताया गया। ईमेल में दोपहर 1:11 बजे स्कूलों और 3:11 बजे रेलगाड़ियों में सिलसिलेवार विस्फोट करने की चेतावनी दी गई थी।
स्कूलों में आनन-फानन में छुट्टी
धमकी की सूचना मिलते ही स्कूल प्रबंधन ने तत्परता दिखाते हुए स्थानीय पुलिस को सूचित किया। बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए तुरंत कक्षाओं को स्थगित कर छुट्टी घोषित कर दी गई। देखते ही देखते स्कूलों के बाहर अभिभावकों की भीड़ जमा हो गई। वर्तमान में गुरुग्राम पुलिस की टीमें, बम निरोधक दस्ता (BDS) और प्रशिक्षित डॉग स्क्वायड पूरे परिसर की बारीकी से जांच कर रहे हैं। हालांकि, पुलिस के आला अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि स्थिति नियंत्रण में है और घबराने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि यह किसी की शरारत भी हो सकती है।
पिछले तीन महीनों की घटनाओं का विश्लेषण
शैक्षणिक संस्थानों को निशाना बनाकर दहशत फैलाने की साजिश पिछले कुछ समय से लगातार जारी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो यह कोई पहली घटना नहीं है:
- जनवरी: अंबाला और चंडीगढ़ के लगभग 30 स्कूलों को इसी तरह डराया गया।
- फरवरी: मोहाली और चंडीगढ़ के नामी स्कूलों को ‘ह्यूमन बम’ हमले की चेतावनी मिली।
- मार्च: जालंधर के बाद अब 10 मार्च को गुरुग्राम के स्कूलों को निशाना बनाया गया है।
इन घटनाओं की पुनरावृत्ति दर्शाती है कि असामाजिक तत्व सोची-समझी रणनीति के तहत काम कर रहे हैं।
साइबर सेल की जांच के घेरे में ‘खालिस्तान नेशनल आर्मी’
पुलिस की स्पेशल साइबर सेल अब इस संदेश के तकनीकी स्रोत (Source) का पता लगाने में जुटी है। ईमेल में ‘खालिस्तान जनमत संग्रह’ का समर्थन करने की बात कही गई है, जो जांच एजेंसियों के लिए चिंता का विषय है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के छद्म हमलों (Faceless Attacks) का उद्देश्य वास्तविक क्षति पहुंचाना कम और सरकारी मशीनरी को मानसिक रूप से थकाना और जनता में असुरक्षा की भावना पैदा करना अधिक होता है।
आखिर क्यों पुलिस की पहुंच से बाहर हैं ये ‘डिजिटल हमलावर’?
इन साइबर अपराधियों को पकड़ना पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। तकनीकी विश्लेषण के अनुसार, इसके पीछे मुख्य रूप से तीन कारण हैं:
- विदेशी डोमेन: ये ईमेल अक्सर रूस, जर्मनी या अमेरिका जैसे देशों के सर्वरों से भेजे जाते हैं।
- इनविजिबल रूटिंग: हमलावर ‘Tor’ ब्राउज़र और मल्टी-लेयर VPN का उपयोग करते हैं, जिससे उनका वास्तविक आईपी एड्रेस छिप जाता है।
- रणनीतिक बदलाव: पहले दक्षिण भारतीय समूहों के नाम का उपयोग हो रहा था, लेकिन अब यह नैरेटिव बदलकर खालिस्तानी अलगाववाद की ओर मुड़ गया है।










