Gujarat Election 2026 : अहमदाबाद में बीजेपी नेताओं को जनता ने खदेड़ा, विकास पर पूछे सवाल

गुजरात विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच अहमदाबाद की सड़कों पर हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। विकास कार्यों का हिसाब मांगने उतरी जनता ने बीजेपी नेताओं को घेर लिया और नारेबाजी करते हुए इलाके से खदेड़ दिया। इस अप्रत्याशित विरोध ने पार्टी आलाकमान की नींद उड़ा दी है। क्या यह सिर्फ ट्रेलर है?

Gujarat Election 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

अप्रैल 10, 2026

Gujarat Election 2026 : गुजरात में आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही राजनीतिक पारा चढ़ने लगा है। सभी पार्टियों ने मतदाताओं को रिझाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने भी राज्य भर में अपना सघन जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। हालांकि, अहमदाबाद के पॉश माने जाने वाले बोडकदेव इलाके में पार्टी को उस समय भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा, जब स्थानीय निवासियों ने न केवल प्रचार को रुकवा दिया, बल्कि नेताओं को खरी-खोटी सुनाकर वहां से जाने पर मजबूर कर दिया।

ढोल-नगाड़ों के साथ पहुंचे थे नेता, गुस्से से हुआ स्वागत

अहमदाबाद के बोडकदेव क्षेत्र में बीजेपी के पूर्व कॉर्पोरेटरों और कार्यकर्ताओं की एक बड़ी टीम पूरे लाव-लश्कर के साथ चुनाव प्रचार करने पहुंची थी। इस दल में पूर्व कॉर्पोरेटर वासंतीबेन पटेल और एएमटीएस (AMTS) कमेटी के पूर्व चेयरमैन धरमशी देसाई के पुत्र धनराज देसाई जैसे कद्दावर चेहरे शामिल थे। भाजपा नेता ढोल-नगाड़ों की थाप पर विजय के नारे लगाते हुए गलियों में प्रवेश कर रहे थे, लेकिन उनकी उम्मीदों के विपरीत स्थानीय लोगों ने उन्हें घेर लिया और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

बुनियादी सुविधाओं की बदहाली पर फूटा जनता का आक्रोश

जैसे ही प्रचार दल रिहायशी इलाके के भीतर पहुंचा, लोगों ने ढोल-नगाड़ों को बंद करा दिया। स्थानीय निवासियों का सबसे बड़ा गुस्सा सड़क की दयनीय स्थिति को लेकर था। लोगों ने नेताओं को सड़कों पर मौजूद गड्ढे दिखाए और पूछा कि मानसून के बाद भी मरम्मत क्यों नहीं की गई। इसके अलावा, क्षेत्र में स्ट्रीट लाइटों का आधा-अधूरा होना और गटर की पुरानी समस्या के कारण होने वाली जलजमाव की स्थिति पर भी जनता ने नेताओं को कटघरे में खड़ा किया। लोगों का आरोप था कि सुविधाओं के नाम पर उन्हें सिर्फ झूठे आश्वासन दिए गए हैं।

“5 साल कहां थे?” – मतदाताओं के कड़े सवालों से घिरे कार्यकर्ता

विरोध के दौरान सबसे तीखी प्रतिक्रिया उन बुजुर्गों और युवाओं की तरफ से आई, जिन्होंने नेताओं से सीधे सवाल किया कि वे पिछले पांच वर्षों के दौरान इलाके से क्यों गायब थे। स्थानीय लोगों ने कहा, “जब हम गटर और अंधेरी सड़कों की समस्याओं से जूझ रहे थे, तब किसी ने हमारी सुध नहीं ली। अब जब चुनाव सिर पर हैं, तो आप विकास के बड़े-बड़े दावे लेकर हमारे दरवाजों पर आ गए हैं।” लोगों ने स्पष्ट कर दिया कि वे केवल नारों से प्रभावित नहीं होंगे और उन्हें धरातल पर काम चाहिए।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, विपक्ष को मिला मुद्दा

बोडकदेव में हुए इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो वहां मौजूद लोगों ने अपने मोबाइल कैमरों में कैद कर लिया। देखते ही देखते यह वीडियो सोशल मीडिया के विभिन्न प्लेटफॉर्म्स पर जंगल की आग की तरह फैल गया। वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि भाजपा नेता सफाई देने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जनता की नाराजगी के आगे उन्हें पीछे हटना पड़ा। इस घटना ने विपक्षी दलों—कांग्रेस और आम आदमी पार्टी—को भी बैठे-बिठाए एक बड़ा मुद्दा दे दिया है। विपक्ष अब इस वीडियो को साझा कर बीजेपी के ‘गुजरात मॉडल’ पर सवाल उठा रहा है।

चुनावी तैयारियों के बीच बीजेपी के लिए खतरे की घंटी

अहमदाबाद जैसे गढ़ में भाजपा नेताओं का इस तरह विरोध होना पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गया है। विश्लेषकों का मानना है कि शहरी इलाकों में भी अगर बुनियादी ढांचे को लेकर इस तरह का रोष है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में प्रचार और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यह घटना दर्शाती है कि आगामी चुनाव में मतदाता केवल पार्टी के नाम पर नहीं, बल्कि पिछले पांच सालों के प्रदर्शन के आधार पर अपना मत तय करेंगे। अब देखना यह है कि भाजपा इस जन-आक्रोश को शांत करने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाती है।

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