Gujarat Energy: गुजरात सरकार की ओर से राज्य बजट में Bio-CNG प्लांट के विस्तार और विकास के लिए 60 करोड़ रुपये का विशेष प्रावधान किया है। यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कचरे से धन’ (Waste to Wealth), आत्मनिर्भर भारत और हरित ऊर्जा के विज़न के अनुरूप उठाया गया है। राज्य सरकार का उद्देश्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देना है।
बनास डेयरी द्वारा विकसित Bio-CNG प्लांट मॉडल, गाय के गोबर जैसे जैविक कचरे को स्वच्छ ईंधन और जैविक खाद में बदलता है। यह मॉडल ग्रामीण किसानों के लिए आय का नया स्रोत बन गया है। अब इसे केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय और केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय के सहयोग से देश के लगभग 15 राज्यों में लागू किया जा रहा है।
बजट आवंटन और नए प्लांटों की योजना
मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सहकारी दुग्ध समितियों के माध्यम से नए Bio-CNG प्लांट स्थापित करने के लिए 60 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इस योजना के तहत पूरे राज्य में लगभग 10 नए प्लांट स्थापित करने की चरणबद्ध योजना प्रस्तावित की गई है।
बनासकांठा प्लांट – एक सफल मॉडल

बनासकांठा स्थित बनास Bio-CNG प्लांट पिछले छह वर्षों से काम कर रहा है और यह ग्रामीण ऊर्जा समाधान में एक सफल उदाहरण बन चुका है। यह प्लांट प्रतिदिन लगभग 40 मीट्रिक टन गोबर प्रोसेस करता है। इस सफलता से प्रेरित होकर पांच और बड़े प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं, जिनमें से दो पहले ही चालू हो गए हैं और तीसरा अंतिम चरण में है।
Gujarat: राजकोट में भीषण सड़क हादसा, पुल से गिरते ही कार में लगी आग, तीन की मौत
किसानों और रोजगार पर प्रभाव
प्रत्येक प्लांट प्रतिदिन लगभग 100 मीट्रिक टन गोबर प्रोसेस करता है। इसके तहत 20-25 गाँवों के करीब 400–450 पशुपालक किसानों को गोबर के लिए भुगतान किया जाता है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होती है। गोबर लाने के लिए 13 ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का इस्तेमाल होता है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होते हैं।
रेवेन्यू मॉडल और उत्पाद
Bio-CNG प्लांट सिर्फ गैस उत्पादन तक सीमित नहीं है। रोजाना लगभग 1,800 किलोग्राम CNG, 25 मीट्रिक टन ठोस जैविक खाद और 75 मीट्रिक टन तरल जैविक खाद का उत्पादन किया जाता है। इन उत्पादों की बिक्री से प्रतिदिन 3 लाख रुपये का रेवेन्यू होता है, जो सालाना लगभग 12 करोड़ रुपये तक पहुँच सकता है।
पर्यावरणीय लाभ
इस पहल से सालाना लगभग 6,750 टन CO2e ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होता है। यह न केवल स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देता है, बल्कि जलवायु परिवर्तन से निपटने में भी मदद करता है।
‘ग्रीन गुजरात’ की ओर कदम
Bio-CNG प्लांट के माध्यम से कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन, स्वच्छ ईंधन उत्पादन और बिना केमिकल वाली जैविक खाद उपलब्ध कराना संभव हुआ है। इस पहल से ‘ग्रीन बनासकांठा’ का सपना अब ‘ग्रीन गुजरात’ की हकीकत बन रहा है, जो पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समृद्धि का एक सफल मॉडल है।









