Greenland Sovereignty: ग्रीनलैंड पर यूरोप का अमेरिका को स्पष्ट संदेश, संप्रभुता और सीमाओं पर कोई समझौता नहीं

ग्रीनलैंड पर छिड़ी 'शीत जंग': क्या डोनाल्ड ट्रंप के मंसूबों पर पानी फेर देगा यूरोप? डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड में अमेरिका की दिलचस्पी फिर से दिखाए जाने के बाद डेनमार्क और यूरोपीय संघ ने मोर्चा खोल दिया है। कोपेनहेगन से लेकर ब्रुसेल्स तक, एक ही गूंज है "ग्रीनलैंड बिकाऊ नहीं है।" क्या ट्रंप की 'आर्कटिक नीति' अमेरिका और उसके सबसे पुराने सहयोगियों के बीच एक ऐसी दरार पैदा कर देगी जिसे भरना नामुमकिन होगा?

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Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 6, 2026

Greenland Sovereignty: यूरोप के कई प्रमुख देशों ने ग्रीनलैंड को लेकर एक साझा बयान जारी कर अमेरिका को कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। इस संयुक्त बयान में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर मर्ज, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ-साथ पोलैंड, स्पेन, ब्रिटेन और डेनमार्क के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। सभी नेताओं ने एक स्वर में कहा कि ग्रीनलैंड किसी भी तरह के सौदे, दबाव या बाहरी हस्तक्षेप का विषय नहीं है।

Greenland Sovereignty: ग्रीनलैंड पर फैसला केवल डेनमार्क और वहां के लोगों का अधिकार

यूरोपीय नेताओं ने साफ किया कि ग्रीनलैंड से जुड़े सभी निर्णय लेने का अधिकार केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों को ही है। किसी भी अन्य देश को इस क्षेत्र के भविष्य को लेकर दखल देने का अधिकार नहीं है। बयान में कहा गया कि ग्रीनलैंड की स्थिति अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के सिद्धांतों से जुड़ी हुई है।

Greenland Sovereignty: आर्कटिक क्षेत्र की रणनीतिक और सुरक्षा अहमियत

संयुक्त बयान में आर्कटिक क्षेत्र को यूरोप और वैश्विक सुरक्षा के लिए अत्यंत संवेदनशील बताया गया। यूरोपीय देशों ने कहा कि यह इलाका केवल भौगोलिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि सामरिक और पर्यावरणीय रूप से भी महत्वपूर्ण है। इसी कारण यूरोप इस क्षेत्र में सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए सामूहिक रणनीति अपना रहा है।

NATO के साथ मिलकर आर्कटिक की सुरक्षा का भरोसा

यूरोपीय देशों ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा NATO के सहयोग से सुनिश्चित की जाएगी। बयान में कहा गया कि सदस्य देश मिलकर इस इलाके की रक्षा करेंगे और किसी भी तरह की अस्थिरता को रोकने के लिए समन्वित कदम उठाए जाएंगे। इससे यह संकेत मिलता है कि यूरोप इस क्षेत्र को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता नहीं चाहता।

सीमाएं और संप्रभुता गैर-परिवर्तनीय

संयुक्त राष्ट्र चार्टर का हवाला देते हुए यूरोपीय नेताओं ने कहा कि किसी भी देश की सीमाएं और उसकी संप्रभुता अटूट होती हैं। न तो सीमाएं बदली जा सकती हैं और न ही किसी देश की जमीन पर जबरन दावा किया जा सकता है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून का मूल सिद्धांत है, जिसका सभी देशों को सम्मान करना चाहिए।

अमेरिका को अप्रत्यक्ष लेकिन सख्त संदेश

हालांकि बयान में किसी देश या नेता का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन इसे अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुराने बयानों के संदर्भ में देखा जा रहा है। ट्रंप पहले ग्रीनलैंड को लेकर विवादित टिप्पणियां कर चुके हैं। यूरोप का यह बयान अमेरिका को बिना नाम लिए यह समझाने का प्रयास माना जा रहा है कि ग्रीनलैंड कोई रियल एस्टेट डील नहीं है।

यूरोप ने साफ किया अपना रुख

यूरोपीय देशों ने यह भी कहा कि अमेरिका NATO का एक महत्वपूर्ण साझेदार जरूर है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि वह ग्रीनलैंड से जुड़े फैसलों में हस्तक्षेप कर सकता है। ग्रीनलैंड की जमीन, उसकी सीमाएं और उसका भविष्य किसी भी तरह के मोलभाव के लिए खुला नहीं है।

बाहरी दखल को नहीं मिलेगी मंजूरी

कुल मिलाकर यूरोप ने अमेरिका और दुनिया को स्पष्ट रूप से यह संदेश दे दिया है कि ग्रीनलैंड का मुद्दा संप्रभुता और अंतरराष्ट्रीय कानून से जुड़ा है। इस पर किसी भी तरह का बाहरी दबाव या हस्तक्षेप स्वीकार नहीं किया जाएगा, और अंतिम निर्णय केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड के लोगों का ही होगा।

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