Greenland Rejects Trump: ग्रीनलैंड का अमेरिका को दोटूक जवाब, स्वाभिमान से समझौता नहीं, ट्रंप के दावों को नकारा

डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड अधिग्रहण के मास्टरप्लान ने दुनिया में खलबली मचा दी है। ग्रीनलैंड के नेताओं ने संयुक्त बयान जारी कर कहा, "हमें अमेरिकी नहीं बनना।" वहीं ट्रंप ने सैन्य विकल्प की धमकी देकर तनाव को युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। क्या 2026 में अमेरिका जबरन ग्रीनलैंड पर कब्जा करेगा?

Greenland Rejects Trump

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जनवरी 16, 2026

Greenland Rejects Trump: ग्रीनलैंड की मंत्री नाजा नतानिएल्सन ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की विस्तारवादी सोच को कड़ा जवाब देते हुए स्पष्ट किया है कि उनका देश अमेरिका का हिस्सा बनने के लिए कतई तैयार नहीं है। ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड को खरीदने या अमेरिकी नियंत्रण में लेने के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए नतानिएल्सन ने कहा कि ग्रीनलैंड के लोग अपने भविष्य के स्वामी खुद हैं और वे अपनी नियति का फैसला स्वयं करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति ने ग्रीनलैंड के नागरिकों के मन में एक पुराने और भरोसेमंद साथी (अमेरिका) के प्रति अविश्वास की भावना पैदा कर दी है।

रणनीतिक संबंध महत्वपूर्ण, मगर विलय असंभव

नतानिएल्सन ने स्वीकार किया कि ग्रीनलैंड और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच ऐतिहासिक संबंध काफी गहरे हैं। ग्रीनलैंड ने हमेशा अमेरिकी निवेश का स्वागत किया है और सुरक्षा मामलों में सहयोग भी दिया है। उन्होंने यह भी माना कि आर्कटिक क्षेत्र में बदलती भू-राजनीति को देखते हुए सुरक्षा और निगरानी बढ़ाना आवश्यक है। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि इस रणनीतिक सहयोग का अर्थ यह बिल्कुल नहीं है कि ग्रीनलैंड अपनी पहचान खोकर अमेरिका का एक नया राज्य या क्षेत्र बन जाए। उनके अनुसार, सहयोग और संप्रभुता दो अलग चीजें हैं।

‘भरोसेमंद साथी से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं लोग’

एनडीटीवी को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मंत्री ने ग्रीनलैंड के लोगों की भावनाओं को व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सालों से जिस अमेरिका को ग्रीनलैंड एक संरक्षक और मित्र मानता आया था, अब उसके बयानों से ऐसा लग रहा है जैसे उस भरोसे के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। नतानिएल्सन ने इसे “विश्वासघात” जैसा अनुभव बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में सम्मान सबसे महत्वपूर्ण है, और किसी भी देश की जमीन को संपत्ति की तरह नहीं देखा जा सकता।

वैश्विक व्यवस्था और सैन्य टकराव की चेतावनी

ग्रीनलैंड की मंत्री ने इस मुद्दे पर एक गंभीर चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिका ने कभी भी ग्रीनलैंड पर किसी भी प्रकार के सैन्य बल या हमले का विचार किया, तो इसके परिणाम वैश्विक स्तर पर विनाशकारी होंगे। नतानिएल्सन के अनुसार, ऐसी कोई भी कार्रवाई द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बनी मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था और सीमाओं की मर्यादा को पूरी तरह खत्म कर देगी। यह न केवल आर्कटिक बल्कि पूरी दुनिया के लिए एक खतरनाक मिसाल होगी।

आर्कटिक में यूरोप और नाटो की भूमिका का समर्थन

ग्रीनलैंड की स्थानीय जनता की राय साझा करते हुए मंत्री ने बताया कि वहां के लोग आर्कटिक क्षेत्र में यूरोपीय देशों और नाटो (NATO) की सक्रिय मौजूदगी का समर्थन करते हैं। यह समर्थन केवल सैन्य सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आर्थिक और रणनीतिक स्थिरता के लिए भी जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि ग्रीनलैंड अमेरिका के एकल वर्चस्व के बजाय एक बहुपक्षीय सुरक्षा ढांचे में अधिक सुरक्षित महसूस करता है।

ट्रंप की दिलचस्पी के पीछे के असली कारण

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड में दिखाई जा रही अत्यधिक रुचि पर बात करते हुए नतानिएल्सन ने कहा कि इसके पीछे कई छिपे हुए कारण हो सकते हैं। इसमें ग्रीनलैंड के विशाल प्राकृतिक संसाधन, भविष्य के समुद्री व्यापार मार्ग और रणनीतिक सैन्य बढ़त शामिल है। ट्रंप का तर्क है कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण आवश्यक है, लेकिन ग्रीनलैंड इसे अपनी स्वायत्तता पर हमले के रूप में देख रहा है।

डेनमार्क के साथ तनाव और सैन्य तैनाती

ग्रीनलैंड वर्तमान में डेनमार्क के अधीन एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है। इस मुद्दे ने डेनमार्क, अमेरिका और ग्रीनलैंड के बीच एक त्रिकोणीय कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया है। डेनमार्क के विदेश मंत्री ने भी माना है कि बातचीत के बावजूद अमेरिका अपने रुख पर अड़ा हुआ है। जवाब में, डेनमार्क और अन्य यूरोपीय सहयोगियों ने सुरक्षा मजबूत करने के लिए ग्रीनलैंड में अपने सैनिकों की तैनाती शुरू कर दी है, जिससे आर्कटिक क्षेत्र में सैन्य हलचल तेज हो गई है।

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