Greenland Embassies: ट्रंप की ‘ग्रीनलैंड योजना’ को झटका, कनाडा और फ्रांस ने खोले दूतावास; संप्रभुता पर जंग तेज

डोनल्ड ट्रंप के 'ग्रीनलैंड मिशन' के खिलाफ कनाडा और फ्रांस ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में दोनों देशों ने अपने दूतावासों का उद्घाटन किया। क्या अमेरिका के 'राष्ट्रीय सुरक्षा' तर्क के आगे ये देश टिक पाएंगे? क्या यह आर्कटिक की संप्रभुता बचाने की आखिरी कोशिश है?

Greenland Embassies

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 7, 2026

Geopolitical War:  आर्कटिक महासागर के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण द्वीप ‘ग्रीनलैंड’ को लेकर वैश्विक कूटनीति में एक नया मोड़ आ गया है। शुक्रवार को कनाडा और फ्रांस ने आधिकारिक तौर पर ग्रीनलैंड की राजधानी ‘नुक्क’ (Nuuk) में अपने राजनयिक दूतावासों का उद्घाटन किया। यह घटनाक्रम केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं है, बल्कि इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा इस अर्ध-स्वायत्त डेनिश क्षेत्र को खरीदने या उस पर नियंत्रण हासिल करने की महत्वाकांक्षी कोशिशों के सीधे जवाब के रूप में देखा जा रहा है। ग्रीनलैंड की संप्रभुता को लेकर यूरोप और उत्तरी अमेरिका के देशों के बीच एक नई कूटनीतिक बिसात बिछ गई है।

डेनमार्क के साथ एकजुटता: कनाडा की विदेश मंत्री का महत्वपूर्ण दौरा

कनाडा का यह कदम उसके नाटो सहयोगी डेनमार्क के प्रति अटूट समर्थन और एकजुटता का प्रतीक है। दूतावास के उद्घाटन समारोह के लिए कनाडा की विदेश मंत्री अनिता आनंद और स्वदेशी गवर्नर जनरल मैरी साइमन स्वयं नुक्क पहुँचीं। अनिता आनंद ने समारोह के दौरान स्पष्ट किया कि एक आर्कटिक राष्ट्र के रूप में कनाडा, डेनमार्क के साथ मिलकर इस क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है। यह दौरा इस बात का संकेत है कि कनाडा ग्रीनलैंड को किसी भी बाहरी दबाव या खरीद-फरोख्त की राजनीति से दूर रखना चाहता है।

फ्रांस की बढ़ती सक्रियता: यूरोपीय संघ का पहला मिशन

फ्रांस ने भी इस रणनीतिक दौड़ में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए जीन-नोएल पोइरियर को अपना महावाणिज्य दूत नियुक्त किया है। इसके साथ ही फ्रांस, ग्रीनलैंड में अपना स्थायी मिशन स्थापित करने वाला यूरोपीय संघ (EU) का पहला देश बन गया है। फ्रांस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मिशन का प्राथमिक उद्देश्य संस्कृति, विज्ञान, और अर्थव्यवस्था के क्षेत्रों में सहयोग को गहरा करना है। साथ ही, फ्रांस स्थानीय अधिकारियों के साथ राजनीतिक संबंधों को प्रगाढ़ कर आर्कटिक क्षेत्र में अपनी वैज्ञानिक और रणनीतिक पहुंच को विस्तार देना चाहता है।

ट्रंप की धमकियां और आर्कटिक सुरक्षा का संकट

यह पूरी कूटनीतिक गहमागहमी तब शुरू हुई जब डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड के अधिग्रहण के मुद्दे पर डेनमार्क सहित आठ यूरोपीय देशों पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। हालांकि, नाटो महासचिव मार्क रुटे के हस्तक्षेप के बाद एक समझौता ढांचा (Framework) तैयार हुआ और ट्रंप ने अपनी धमकियां वापस ले लीं। वर्तमान में, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और उपराष्ट्रपति जेडी वेंस आर्कटिक सुरक्षा समझौते को लेकर डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ तकनीकी बातचीत कर रहे हैं। अमेरिका इस क्षेत्र में अपनी सैन्य और आर्थिक उपस्थिति बढ़ाने के लिए लगातार दबाव बना रहा है।

संप्रभुता की ढाल: इनुइट अधिकार और जलवायु सहयोग

कनाडा ने ग्रीनलैंड में दूतावास खोलने का वादा वर्ष 2024 में ही किया था, लेकिन प्रतिकूल मौसम के कारण इसमें देरी हुई। अब इन नए दूतावासों के खुलने से न केवल जलवायु परिवर्तन और इनुइट (Inuit) समुदाय के अधिकारों पर आपसी सहयोग बढ़ेगा, बल्कि यह ग्रीनलैंड की स्वायत्तता के लिए एक कूटनीतिक कवच का काम करेगा। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा और फ्रांस की यह उपस्थिति अमेरिका की उन कोशिशों के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश है जो ग्रीनलैंड की भौगोलिक और राजनीतिक स्थिति को बदलने की मंशा रखती हैं।