Ganga Expressway : ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे की दूरी होगी कम, योगी सरकार ने बनाया प्लान

ग्रेटर नोएडा से गंगा एक्सप्रेसवे तक सफर अब आसान और तेज होने वाला है। GNIDA ने हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क और करीब 15 किलोमीटर कनेक्टिविटी बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है। अधिकारियों के मुताबिक इससे यात्रा समय 30 से 45 मिनट रह सकता है। लेकिन इस योजना से NCR की कनेक्टिविटी कितनी बदलेगी?

Ganga Expressway

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

सितम्बर 8, 2026

Ganga Expressway : राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ती औद्योगिक गतिविधियों और परिवहन जरूरतों को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अहम सड़क परियोजना की योजना तैयार की है। ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण (GNIDA) ग्रेटर नोएडा को सीधे गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए नई कनेक्टिविटी विकसित करेगा। प्रस्तावित सड़क से दोनों क्षेत्रों के बीच सफर लगभग 30 से 45 मिनट में पूरा होने की उम्मीद है।

लखनऊ में हुई परियोजना की उच्चस्तरीय समीक्षा

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा लखनऊ में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में प्रस्तुत की गई। बैठक की अध्यक्षता औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता ‘नंदी’ ने की। इस दौरान औद्योगिक विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव आलोक कुमार समेत प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों ने परियोजना की प्रगति और प्रस्तावित कनेक्टिविटी से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की।

मास्टर प्लान 2041 में किया जाएगा संशोधन

अधिकारियों के मुताबिक, प्रस्तावित सड़क परियोजना को ग्रेटर नोएडा मास्टर प्लान 2041 में संशोधन के जरिए शामिल किया जा रहा है। योजना के पीछे मुख्य उद्देश्य यात्री वाहनों और भारी मालवाहक वाहनों के यातायात को अलग-अलग मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे भविष्य में औद्योगिक क्षेत्रों और प्रमुख एक्सप्रेसवे पर बढ़ने वाले ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी।

हापुड़ बाईपास तक 105 मीटर चौड़ी सड़क

ग्रेटर नोएडा को गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए करीब 15 किलोमीटर लंबी नई कनेक्टिविटी विकसित करने का प्रस्ताव है। इसके तहत हापुड़ बाईपास तक लगभग 105 मीटर चौड़ी सड़क बनाए जाने की योजना है। इस मार्ग के तैयार होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र से गंगा एक्सप्रेसवे तक पहुंचना काफी आसान हो जाएगा और यात्रा समय में भी कमी आएगी।

MMLH से जेवर एयरपोर्ट तक बनेगा एलिवेटेड कॉरिडोर

परियोजना के तहत मल्टी मॉडल लॉजिस्टिक्स हब (MMLH) को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर से जोड़ने के लिए छह लेन का एलिवेटेड रोड विकसित करने की भी योजना है। प्रस्तावित मार्ग वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के समानांतर बनाया जाएगा। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से मालवाहक और व्यावसायिक वाहनों के लिए किया जाएगा।

लॉजिस्टिक्स और कार्गो परिवहन होगा आसान

एलिवेटेड रोड बनने से MMLH से एयर कार्गो टर्मिनल तक माल पहुंचाने में सुविधा होगी। भारी वाहनों को शहरी ट्रैफिक से अलग मार्ग मिलने के कारण परिवहन व्यवस्था अधिक सुचारु होने की उम्मीद है। इससे लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को गति मिलेगी और औद्योगिक इकाइयों के लिए सामान की आवाजाही पहले की तुलना में अधिक प्रभावी हो सकेगी।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर सरकार का विशेष फोकस

राज्य सरकार पश्चिमी उत्तर प्रदेश को बड़े लॉजिस्टिक्स और मैन्युफैक्चरिंग केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में काम कर रही है। ग्रेटर नोएडा, दादरी, जेवर और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों को बेहतर सड़क, रेल और हवाई संपर्क से जोड़ने की योजनाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं। नई सड़क परियोजना से क्षेत्र में निवेश और औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

गंगा एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा एनसीआर

करीब 594 किलोमीटर लंबा गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज तक पश्चिमी और पूर्वी उत्तर प्रदेश को जोड़ता है। ग्रेटर नोएडा को हापुड़ बाईपास के जरिए इससे जोड़ने पर एनसीआर के उद्योगों को राज्य के मध्य और पूर्वी हिस्सों तक बेहतर पहुंच मिल सकती है। इससे प्रयागराज और आगे के प्रमुख शहरों के साथ माल परिवहन सुगम होने की संभावना है।

पीएम गतिशक्ति से जुड़ेंगे मल्टीमॉडल प्रोजेक्ट

दादरी और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में विकसित किए जा रहे MMLH और मल्टी मॉडल ट्रांसपोर्ट हब (MMTH) केंद्र की पीएम गतिशक्ति योजना से जुड़े हैं। MMLH में आधुनिक रेलवे क्रेन, कंटेनर डिपो और वेयरहाउसिंग जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य अलग-अलग परिवहन माध्यमों को एकीकृत कर लॉजिस्टिक्स व्यवस्था को अधिक सक्षम बनाना है।

जेवर एयरपोर्ट से मजबूत होगा सीधा कार्गो संपर्क

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन के बाद क्षेत्र में एयर कार्गो गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। ऐसे में MMLH और एयरपोर्ट के बीच प्रस्तावित छह लेन एलिवेटेड रोड महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। यात्री और मालवाहक वाहनों के लिए अलग-अलग कनेक्टिविटी विकसित होने से दादरी और आसपास के प्रमुख मार्गों पर भारी वाहनों का दबाव कम करने में मदद मिलेगी। इससे पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है।

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