Greater Noida News: दिल्ली से सटे ग्रेटर नोएडा के डेल्टा क्षेत्र में सरकारी महकमे की बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। यहां के घरों में पीने के पानी की पाइपलाइन में सीवर का गंदा पानी मिल जाने से हड़कंप मच गया है। पिछले तीन दिनों से दूषित पानी की आपूर्ति होने के कारण अब तक 8 लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए हैं, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। स्थानीय निवासियों में प्राधिकरण के खिलाफ भारी रोष है।
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दूषित जल आपूर्ति और स्वास्थ्य संकट
डेल्टा क्षेत्र के निवासियों के मुताबिक, पिछले तीन दिनों से नलों से आने वाले पानी में तेज दुर्गंध आ रही थी और उसका रंग पूरी तरह काला व मटमैला था। दूषित जल (Polluted Water) के सेवन से घरों में बच्चे और बुजुर्ग बीमार होने लगे। डॉक्टरों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती 8 मरीजों को उल्टी, दस्त, तेज पेट दर्द और संक्रमण की शिकायत है। कुछ मरीजों की हालत इतनी खराब हुई कि उन्हें ड्रिप चढ़ानी पड़ी। यह स्थिति साफ तौर पर पीने के पानी में सीवर की गंदगी मिलने की पुष्टि करती है।
प्राधिकरण की लापरवाही और जन-शिकायतों की अनदेखी
आपको बता दे कि, पीड़ित परिवारों का आरोप है कि गंदा पानी आने की सूचना तुरंत ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और जल विभाग के अधिकारियों को दी गई थी। लगातार तीन दिनों तक फोन और लिखित शिकायतों के बावजूद किसी भी जिम्मेदार अधिकारी ने सुध नहीं ली। विभाग की इस चुप्पी के कारण लोग वही जहरीला पानी इस्तेमाल करने को मजबूर रहे। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन की इस लापरवाही ने उनकी जान जोखिम में डाल दी है।
पाइपलाइन लीकेज और तकनीकी खामियां
जानकारों का मानना है कि पेयजल और सीवर की लाइनें एक-दूसरे के बेहद करीब होने के कारण कहीं न कहीं बड़ा लीकेज हुआ है। इसी लीकेज (Pipeline Seepage) की वजह से सीवर का गंदा पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। यह पहली बार नहीं है जब ग्रेटर नोएडा में इस तरह की समस्या देखी गई हो; इससे पहले भी कई सेक्टरों में जलभराव और सीवर मिक्स पानी की शिकायतें आती रही हैं, लेकिन पाइपलाइन नेटवर्क को कभी स्थायी रूप से दुरुस्त नहीं किया गया।
बुनियादी सुविधाओं की बदहाली और अतिरिक्त आर्थिक बोझ
करोड़ों रुपये के मेंटेनेंस बजट के बावजूद डेल्टा क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं (Basic Amenities) की स्थिति बेहद चिंताजनक है। अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लोगों ने कहा कि कागजों में सफाई दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत में लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं। मध्यम और गरीब परिवारों पर अब शुद्ध पानी खरीदने का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है, जबकि वे नियमित रूप से प्राधिकरण को पानी का बिल भरते हैं।
लोग नल का पानी पीने से डर रहे
फिलहाल इलाके में दहशत का माहौल है और लोग नल का पानी पीने से डर रहे हैं। जब तक प्राधिकरण पाइपलाइन की मरम्मत कर आपूर्ति बहाल नहीं करता, तब तक लोगों को पानी उबालकर पीने या वैकल्पिक स्रोतों का उपयोग करने की सलाह दी गई है। स्थानीय निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे प्राधिकरण कार्यालय का घेराव करेंगे।










