जीपीएस से ओटीपी तक निगरानी, टेक होम राशन में पारदर्शिता की नई व्यवस्था

लखनऊ उत्तर प्रदेश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पोषण पहुंचाने की व्यवस्था सिर्फ राशन वितरण तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में टेक होम राशन व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी और वितरण की पारदर्शिता को मजबूत किया गया है। करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही इस व्यवस्था में जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सत्यापन जैसे डिजिटल उपायों को शामिल किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पोषण सामग्री को उत्पादन इकाई से लेकर वास्तविक लाभार्थी तक सुरक्षित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पहुंचाना है। परिवहन

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Published On :

अगस्त 10, 2026

लखनऊ

उत्तर प्रदेश में बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं तक पोषण पहुंचाने की व्यवस्था सिर्फ राशन वितरण तक सीमित नहीं रह गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में टेक होम राशन व्यवस्था को तकनीक से जोड़कर आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी और वितरण की पारदर्शिता को मजबूत किया गया है। करीब 1.56 करोड़ लाभार्थियों तक पहुंच रही इस व्यवस्था में जीपीएस ट्रैकिंग, क्यूआर कोड और ओटीपी आधारित सत्यापन जैसे डिजिटल उपायों को शामिल किया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य पोषण सामग्री को उत्पादन इकाई से लेकर वास्तविक लाभार्थी तक सुरक्षित और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार पहुंचाना है। परिवहन के दौरान वाहनों की जीपीएस के जरिए निगरानी की जाती है। इससे आपूर्ति में लगे वाहनों की आवाजाही पर नजर रखना संभव हुआ है। वहीं पैकेट पर लगाए गए क्यूआर कोड के जरिए सामग्री की पहचान और वितरण संबंधी जानकारी को डिजिटल प्रक्रिया से जोड़ा गया है।
 

जरूरत के अनुरूप उपलब्ध हो रहा अनुपूरक पोषण

लाभार्थी को पोषण सामग्री उपलब्ध कराते समय ओटीपी आधारित सत्यापन की व्यवस्था भी लागू है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि सामग्री निर्धारित लाभार्थी तक ही पहुंचे। पूरी प्रक्रिया में डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होने से निगरानी करने वाले अधिकारियों के लिए भी व्यवस्था को ट्रैक करना आसान हुआ है। सरकार ने टेक होम राशन के लिए अलग-अलग आयु और जरूरत के अनुसार पोषण उत्पाद भी तैयार किए हैं। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं और बच्चों को उनकी जरूरत के अनुरूप अनुपूरक पोषण उपलब्ध कराया जा रहा है।
 

डिजिटल निगरानी से गड़बड़ी की पहचान करना हुआ आसान

बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग के मुताबिक, पोषण व्यवस्था में तकनीक के इस्तेमाल का महत्वपूर्ण पहलू जवाबदेही है। उत्पादन, परिवहन और वितरण के अलग-अलग स्तरों पर डिजिटल निगरानी होने से व्यवस्था में किसी स्तर पर होने वाली गड़बड़ी की पहचान करना पहले की तुलना में आसान हुआ है। इससे विभागीय निगरानी को भी मजबूती मिली है। योगी सरकार ने पोषण को स्वास्थ्य और सुशासन से जोड़ते हुए व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया है। सरकार का जोर केवल अधिक से अधिक लाभार्थियों तक सामग्री पहुंचाने पर नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर भी है कि पोषण सामग्री समय पर, निर्धारित गुणवत्ता के साथ और सही व्यक्ति तक पहुंचे।