Digital Piracy: केंद्र सरकार ने देश में तेजी से फैल रही डिजिटल पायरेसी के खिलाफ एक बड़ा और निर्णायक कदम उठाया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय (I&B Ministry) ने लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को औपचारिक नोटिस जारी कर निर्देश दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म पर मौजूद अवैध और पायरेटेड कंटेंट को हटाने के लिए तत्काल सख्त कदम उठाए। मंत्रालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि टेलीग्राम के जरिए प्रसारित की जा रही पायरेटेड फिल्में, वेब सीरीज और अन्य ओटीटी कंटेंट पर बिना किसी देरी के रोक लगाई जानी चाहिए। सरकार ने टेलीग्राम से इस बाबत की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट अगले 15 दिनों के भीतर तलब की है।
एंटरटेनमेंट सेक्टर की आर्थिक कमर तोड़ रही ऑनलाइन पायरेसी
बताते चले कि, सरकार का यह कड़ा रुख इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पायरेसी के कारण भारतीय फिल्म उद्योग और डिजिटल एंटरटेनमेंट सेक्टर को भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है। अक्सर देखा गया है कि नई फिल्मों और लोकप्रिय वेब सीरीज के रिलीज होते ही वे अवैध तरीके से टेलीग्राम के माध्यम से लीक हो जाती हैं, जिससे कंटेंट निर्माताओं की कमाई पर गहरा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कई ओटीटी प्लेटफॉर्म और फिल्म निर्माताओं द्वारा की गई शिकायतों के आधार पर मंत्रालय ने जांच की, जिसमें करीब 3,142 ऐसे टेलीग्राम चैनलों की पहचान की गई है जो धड़ल्ले से पायरेटेड सामग्री फैला रहे थे।
अवैध कंटेंट पर नकेल
यह नोटिस सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2000 के प्रावधानों के अंतर्गत जारी किया गया है। सरकार ने टेलीग्राम को आदेश दिया है कि वह न केवल सभी अवैध कंटेंट को तुरंत हटाए, बल्कि अपनी नीतियों को और अधिक कठोर बनाए। आईटी नियम 2021 के मुताबिक, किसी भी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए यह अनिवार्य है कि सरकार या अदालत द्वारा आदेश मिलने पर वह तुरंत गैर-कानूनी सामग्री को अपने प्लेटफॉर्म से हटाए। सरकार का उद्देश्य डिजिटल कंटेंट क्रिएटर्स के अधिकारों की रक्षा करना और ऑनलाइन पायरेसी के जाल को जड़ से खत्म करना है।
यूजरनेम फीचर की सुरक्षा पर भी सरकार की पैनी नजर
पायरेसी पर कार्रवाई के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मैसेजिंग ऐप्स के ‘यूजरनेम फीचर’ को लेकर भी जांच तेज कर दी है। सरकार ने टेलीग्राम और सिग्नल जैसे ऐप्स को नोटिस भेजकर इस फीचर से जुड़ी सुरक्षा प्रणालियों की जानकारी मांगी है। मंत्रालय को आशंका है कि यूजरनेम फीचर का गलत इस्तेमाल पहचान की चोरी, फर्जी अकाउंट बनाने या ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसी गतिविधियों के लिए किया जा सकता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सरकार ने कंपनियों से स्पष्टीकरण मांगा है कि वे अपने यूजरनेम सिस्टम में सुरक्षा के क्या उपाय अपना रहे हैं ताकि किसी भी प्रकार के दुरुपयोग को रोका जा सके। ऑनलाइन धोखाधड़ी और सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए, जिस प्रकार से व्हाट्सएप के नए फीचर्स पर पहले सवाल उठाए गए थे, उसी तर्ज पर अब अन्य मैसेजिंग ऐप्स की कार्यप्रणाली की भी गहन समीक्षा की जा रही है। डिजिटल स्पेस को अधिक सुरक्षित और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार का यह अभियान आने वाले समय में अन्य प्लेटफार्मों के लिए भी एक नजीर साबित हो सकता है।










