राज्यपाल बनाम सरकार: थावरचंद गहलोत पर CM का हमला, बोले—SC में देंगे चुनौती

बेंगलुरु कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत विधानसभा में अभिभाषण पढ़ते हुए सिर्फ दो लाइन ही बोले और फिर निकल गए। अब इसे लेकर राजनीति तेज हो गई है और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उन्हें केंद्र सरकार की कठपुतली बता दिया है। उन्होंने कहा कि गवर्नर का व्यवहार ऐसा था कि जैसे वह केंद्र सरकार की कठपुतली हों। विधानसभा सत्र की गुरुवार को शुरुआत थी और इस दौरान राज्यपाल ने सिर्फ शुरुआत की दो लाइनें ही पढ़ीं। उन्होंने हिंदी में पढ़ा, 'मेरी सरकार प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास की गति को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक।'

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Published On :

जनवरी 22, 2026

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बेंगलुरु
कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत विधानसभा में अभिभाषण पढ़ते हुए सिर्फ दो लाइन ही बोले और फिर निकल गए। अब इसे लेकर राजनीति तेज हो गई है और मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने उन्हें केंद्र सरकार की कठपुतली बता दिया है। उन्होंने कहा कि गवर्नर का व्यवहार ऐसा था कि जैसे वह केंद्र सरकार की कठपुतली हों। विधानसभा सत्र की गुरुवार को शुरुआत थी और इस दौरान राज्यपाल ने सिर्फ शुरुआत की दो लाइनें ही पढ़ीं। उन्होंने हिंदी में पढ़ा, 'मेरी सरकार प्रदेश के आर्थिक और सामाजिक विकास की गति को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है। जय हिंद, जय कर्नाटक।' यह पढ़ने के बाद वह निकल गए।

उनके इस तरह दो ही लाइनों में स्पीच खत्म करने पर हंगामा बरप गया। सत्ताधारी दल कांग्रेस के विधायकों ने राज्यपाल के खिलाफ शेम-शेम के नारे लगाने शुरू कर दिए। सीएम सिद्धारमैया ने कहा कि राज्यपाल ने पूरा भाषण ना पढ़कर संविधान का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का व्यवहार एक कठपुतली जैसा ही था। सीएम ने कहा, 'गवर्नर गहलोत ने संविधान के अनुसार अपनी जिम्मेदारी का पालन नहीं किया। हम उनके इस व्यवहार के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि हम देखेंगे कि क्या राज्यपाल के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में भी अपील दाखिल की जा सकती है।

बीते कुछ समय से राज्य में गवर्नर और मुख्यमंत्री के बीच एक तनाव देखने को मिला है। हालांकि इसके बाद भी गुरुवार को जब राज्यपाल विधानसभा पहुंचे तो दरवाजे पर ही मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, असेंबली स्पीकर यूटी खडेकर समेत कई मंत्रियों ने उनकी अगवानी की। गहलोत ने बुधवार को मना कर दिया था कि वह असेंबली में स्पीच नहीं देंगे। इसके चलते खतरा पैदा हो गया था कि सदन की शुरुआत में राज्यपाल की ओर से अभिभाषण देने वाली परंपरा का पालन हो सकेगा या नहीं।

राज्यपाल की स्पीच कुल 11 पैराग्राफ की थी और आरोप है कि इसमें ज्यादातर हिस्सा केंद्र सरकार की आलोचना से भरा था। इसी को लेकर सरकार और राज्यपाल में तनातनी हो गई। राज्यपाल चाहते थे कि केंद्र सरकार की आलोचना वाले ज्यादातर हिस्से को हटा दिया जाए। सिद्धारमैया सरकार इस पर राजी नहीं हुई। अंत में गवर्नर सदन में तो पहुंचे, लेकिन दो ही लाइनों में संबोधित करके वह निकल गए।

 

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