सरकार देगी 60 प्रतिशत अनुदान, किसान करेंगे मोती और झींगा पालन

पटना किसान अब मछली के साथ मोती पालन कर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे। मोती एवं झींगा पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की पहल है कि किसान एक साथ कई प्रकार की जलीय कृषि से न सिर्फ अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि यह जलवायु अनुकूल खेती के लिए भी कारगर साबित हो सकता है। चालू वित्तिय वर्ष में करीब 50 एकड़ में मोती पालन का लक्ष्य है। एक अनुमान के मुताबिक, इससे 1.2 लाख मोती का उत्पादन हो सकेगा। लाभुकों के चयन के लिए विभाग मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करेगा। योजना के तहत मोती

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Published On :

जुलाई 10, 2026

पटना
किसान अब मछली के साथ मोती पालन कर अपनी आमदनी बढ़ा सकेंगे। मोती एवं झींगा पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार की पहल है कि किसान एक साथ कई प्रकार की जलीय कृषि से न सिर्फ अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि यह जलवायु अनुकूल खेती के लिए भी कारगर साबित हो सकता है।

चालू वित्तिय वर्ष में करीब 50 एकड़ में मोती पालन का लक्ष्य है। एक अनुमान के मुताबिक, इससे 1.2 लाख मोती का उत्पादन हो सकेगा। लाभुकों के चयन के लिए विभाग मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित करेगा। योजना के तहत मोती पालकों को 60 प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा।

डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के प्रयास वर्ष 2026-27 में, मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत मछली के साथ मोती एवं झींगा पालन को बढ़ावा दिया जाए

माना जा रहा है कि इस पहल से किसान एक साथ कई प्रकार की जलीय कृषि कर न सिर्फ अपनी आय बढ़ा सकते हैं, बल्कि यह जलवायु अनुकूल खेती के लिए भी कारगर साबित हो सकता है।

100 यूनिट, यानी करीब 50 एकड़ में मोती पालन का लक्ष्य है। एक अनुमान के मुताबिक, इससे 1.2 लाख मोती का उत्पादन हो सकेगा। लार्थियों के चयन के लिए विभाग मत्स्य प्रजाति विविधीकरण योजना के तहत आनलाइन आवेदन आमंत्रित करेगा।

समय की मांग और अधिक मुनाफे के लिए मछली पालन के साथ-साथ मोती पालन में किसानों की रुचि बढ़ी है। इस मांग को देखते हुए राज्य सरकार इस वर्ष उपलब्ध जल निकायों एवं तालाबों में मोती पालन की योजना शुरू करने जा रही है।

बिहार में मोती पालन की है असीम संभावनाएं
भारत तथा अन्य देशों में मोती की मांग लगातार बढ़ रही है। भारत अपनी घरेलू मांग को पूरा करने के लिए प्रतिवर्ष अंतरराष्ट्रीय बाजार से काफी अधिक मात्रा में संवर्धित, यानी कल्चर्ड मोती का आयात करता है। विज्ञानी ने पाया है कि बिहार में इसकी अपार संभावनाएं हैं।

हाल के वर्षों में मीठे पानी का मोती संवर्धन कुल मोती उत्पादन का एक बड़ा हिस्सा रहा है। मीठे पानी से मोती संवर्धन में समुद्री मोती संवर्धन की तुलना में कई फायदे हैं, जैसे प्रचुर मात्रा में खेती योग्य क्षेत्र उपलब्ध होना और शिकारी जीवों की कमी आदि। इस कारण यह अधिक किफायती है।

भारत, चीन, जापान, कोरिया, मलेशिया और म्यांमार जैसे कई एशियाई देशों में बड़े पैमाने पर मीठे पानी के मोती संवर्धन को विकसित कर अपनाया गया है और मोतियों की वैश्विक मांग को पूरा करने के लिए नए अनुसंधान किए जा रहे हैं।

केंद्रीय मीठा जल जीव पालन संस्थान (सीआईएफए), भुवनेश्वर ने देश भर में फैले मीठे जल निकायों में मीठे जल की मोती पालन या संवर्धन की प्रौद्योगिकी विकसित की है। साथ ही, मीठे पानी में मोती की खेती और उत्पादन पर शोध एवं तकनीक भी विकसित की गई है।