Gold Silver Volatility : सावधान! सोने की कीमतों में आने वाला है बड़ा तूफान, एक्सपर्ट्स ने दी चेतावनी

मिडिल ईस्ट में ईरान-इजरायल तनाव और अमेरिकी डॉलर की ऐतिहासिक कमजोरी ने कमोडिटी मार्केट में आग लगा दी है। निवेशकों के बीच मची भगदड़ और सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने के भाव आसमान छू रहे हैं। क्या अगले कुछ महीनों में सोना और चांदी पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ देंगे? देखें भविष्य के संकेत।

Gold Silver Volatility

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

मई 2, 2026

Gold Silver Volatility : वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों ने सर्राफा बाजार को एक ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है, जहां निवेशक और बाजार विशेषज्ञ दोनों ही कीमतों की चाल देखकर अचंभित हैं। मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने सोने और चांदी की कीमतों (Gold Silver Prices) को अस्थिर कर दिया है। ज्वैलरी मार्केट में सोने की कीमतें अब 1.5 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के मनोवैज्ञानिक स्तर के इर्द-गिर्द घूम रही हैं। शनिवार को बाजार में 24 कैरेट सोने के भाव 1,50,150 रुपये दर्ज किए गए, जबकि 22 कैरेट और 18 कैरेट की कीमतें क्रमशः 1,37,560 रुपये और 1,12,600 रुपये प्रति 10 ग्राम पर रहीं।

MCX मार्केट का हाल और वायदा कारोबार की स्थिति

घरेलू वायदा बाजार (MCX) में शुक्रवार को एक संक्षिप्त अवकाश के बाद शाम के सत्र में कारोबार फिर से शुरू हुआ। यहां 5 जून की मैच्योरिटी वाला सोना मामूली बढ़त के साथ 1,51,363 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर बंद हुआ। वहीं, चांदी की बात करें तो 2 मई की डिलीवरी वाली चांदी 2,47,500 रुपये के उच्च स्तर पर जाकर रुकी। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिरता अस्थायी हो सकती है, क्योंकि वैश्विक संकेत लगातार बदल रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं का दबदबा

वैश्विक मंच पर अमेरिकी डॉलर की कमजोरी ने बुलियन मार्केट को ऑक्सीजन देने का काम किया है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों ने सुरक्षित निवेश के रूप में सोने का रुख किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 4,600 डॉलर प्रति औंस के ऊपर अपनी पकड़ बनाए हुए है। जापानी येन में संभावित हस्तक्षेप की खबरों ने डॉलर इंडेक्स को नरम किया, जिससे सोने की खरीदारी सस्ती हो गई। हालांकि, इस बढ़त के बावजूद साप्ताहिक आधार पर सोने में कुछ गिरावट का रुख देखा गया है, जो निवेशकों के लिए चिंता का विषय हो सकता है।

चांदी की चमक: 74 डॉलर के पार निकले भाव

चांदी ने भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी चमक बिखेरी है और यह 74 डॉलर प्रति औंस के महत्वपूर्ण स्तर को पार कर गई है। कीमती धातुओं का मूल्य डॉलर में आंका जाता है, इसलिए जब भी डॉलर कमजोर होता है, चांदी जैसी धातुओं की मांग में इजाफा होता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट बताती है कि केवल निवेशक ही नहीं, बल्कि दुनिया भर के केंद्रीय बैंक भी अपने स्वर्ण भंडार को लगातार बढ़ा रहे हैं, जिससे लंबी अवधि में कीमतों को समर्थन मिल रहा है।

इस हफ्ते की गिरावट: सस्ता हुआ या महंगा?

भले ही कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर हों, लेकिन पिछले एक हफ्ते के आंकड़ों पर गौर करें तो सोना और चांदी थोड़े सस्ते हुए हैं। इंडिया बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोना इस हफ्ते लगभग 1,216 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ है। वहीं चांदी में 3,000 रुपये से ज्यादा की बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जिससे यह 2,40,331 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गई। इस उतार-चढ़ाव के बीच 29 अप्रैल को कीमतें अपने न्यूनतम स्तर पर थीं, जबकि 27 अप्रैल को उच्चतम शिखर पर देखी गई थीं।

बैंक ऑफ अमेरिका की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

भविष्य की कीमतों को लेकर बैंक ऑफ अमेरिका ने बेहद तेजी वाले संकेत दिए हैं। उनके अनुमान के मुताबिक, अगले एक साल के भीतर सोने की कीमतें 2 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आंकड़े को छू सकती हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह $6,000 प्रति औंस तक जा सकता है। वहीं चांदी के लिए अनुमान और भी अधिक उत्साहजनक है, जिसके 2.84 लाख रुपये प्रति किलो (लगभग $85.93 प्रति औंस) के पार जाने की संभावना जताई गई है।

क्यों बढ़ रहे हैं दाम? विशेषज्ञों की राय

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों पर दबाव के दो मुख्य कारण हैं: पहला, अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में कटौती की संभावना का कम होना और दूसरा, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर सप्लाई चेन का संकट। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा है, जिससे केंद्रीय बैंक लंबे समय तक ब्याज दरों को उच्च स्तर पर रख सकते हैं। अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता विफल होने की आशंका ने भी बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है।

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