Global Energy Crisis: वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच भारत कैसे रहा सुरक्षित? PM मोदी ने बताई वजह

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा कि क्लीन एनर्जी में निवेश और पिछले एक दशक में विकसित नई व्यवस्थाओं ने भारत को वैश्विक ऊर्जा संकट के गंभीर प्रभावों से बचाने में अहम भूमिका निभाई है।

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Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

नवम्बर 2, 2026

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Global Energy Crisis: वैश्विक अर्थव्यवस्था में पिछले कुछ वर्षों के दौरान आए अभूतपूर्व संकटों और चुनौतियों के बावजूद भारत की विकास दर मजबूत बनी हुई है। राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘भारत रिन्यूएबल एनर्जी समिट एंड एक्सपो’ को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक ऊर्जा संकट और भारत के प्रगतिशील कदम पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि क्लीन एनर्जी (स्वच्छ ऊर्जा) में समय रहते किए गए बड़े निवेश और नीतिगत सुधारों के कारण ही भारत बड़े वैश्विक झटकों से सुरक्षित रहा है।

अभूतपूर्व वैश्विक संकटों के बीच भारत का बेहतर प्रबंधन

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PM मोदी ने बताई वजह

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना महामारी से लेकर पश्चिम एशिया (वेस्ट एशिया) में जारी जारी तनाव तक, दुनिया ने कई भीषण संकटों का सामना किया है। वेस्ट एशिया का संकट आज भी बना हुआ है, जिसने कई देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा प्रणाली को हिलाकर रख दिया है।

पीएम मोदी ने गर्व जताते हुए कहा कि 140 करोड़ भारतीयों के लिए यह गर्व की बात है कि भारत ने इस वैश्विक ऊर्जा संकट को बेहद सुदृढ़ और बेहतर तरीके से संभाला है। दुनिया में जहाँ आर्थिक मंदी और ऊर्जा संकट (एनार्जी शॉक) की चिंता बनी हुई है, वहीं भारत की विकास दर उच्च स्तर पर कायम है। यदि भारत ने पिछले एक दशक में रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में दूरदर्शी निवेश नहीं किया होता और नई व्यवस्थाएं नहीं बनाई होतीं, तो भारत में यह संकट दुनिया के अन्य देशों से कहीं अधिक गंभीर हो सकता था।

2025 में ही हासिल किया पेरिस समझौते का बड़ा लक्ष्य

शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी ने भारत की रिन्यूएबल एनर्जी यात्रा की उपलब्धियों का उल्लेख किया। पेरिस समझौते के तहत भारत ने अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत हिस्सा नॉन-फॉसिल फ्यूल (गैर-जीवाश्म ईंधन) स्रोतों से प्राप्त करने का संकल्प लिया था। भारत ने इस लक्ष्य को वर्ष 2030 की समय सीमा से 5 साल पहले, यानी 2025 में ही हासिल कर लिया।

आज भारत की कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत से अधिक हिस्सा सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और अन्य गैर-जीवाश्म स्रोतों से आ रहा है। पीएम मोदी ने COP26 का जिक्र करते हुए दोहराया कि भारत वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नॉन-फॉसिल फ्यूल आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के अपने वादे को पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

इंटरनेशनल सोलर अलायंस की 9वीं असेंबली का आयोजन

प्रधानमंत्री ने इस बात पर भी प्रसन्नता जताई कि इस समिट के दौरान ‘इंटरनेशनल सोलर अलायंस’ (ISA) की 9वीं असेंबली का आयोजन होना एक सुखद संयोग है। उन्होंने कहा कि पिछले 12 सालों में भारत का रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर मजबूत इच्छाशक्ति, जुनून और उत्कृष्ट प्रदर्शन का उदाहरण बना है। आज पूरा विश्व यह देख रहा है कि विकास और पर्यावरण संरक्षण साथ-साथ कैसे संभव हो सकते हैं।

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