Giriraj Singh: राहुल गांधी के बयानों पर संसद में संग्राम, गिरिराज सिंह ने लगाया गृह युद्ध भड़काने का आरोप

संसद के बजट सत्र में केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह और राहुल गांधी के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। गिरिराज सिंह ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी अपनी टिप्पणियों से देश को गृह युद्ध की ओर ले जाना चाहते हैं और लोगों को भड़का रहे हैं। क्या यह केवल सियासी बयानबाजी है या कोई बड़ी चेतावनी?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 12, 2026

Giriraj Singh:  संसद के बजट सत्र के दौरान लोकसभा में राजनीतिक सरगर्मी अपने चरम पर पहुंच गई है। नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा सदन के भीतर दिए गए विभिन्न बयानों ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील, पूर्व सेनाध्यक्ष एमएम नरवणे की पुस्तक और एपस्टीन फाइल्स जैसे संवेदनशील विषयों पर राहुल गांधी की टिप्पणियों के बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक जारी है। इस हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है।

गिरिराज सिंह का तीखा हमला: “राहुल गांधी देश में चाहते हैं सिविल वॉर”

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर अब तक का सबसे बड़ा हमला बोलते हुए उन्हें “देश का सबसे बड़ा झूठा” करार दिया। सिंह ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी अपने बयानों के जरिए देश में गृह युद्ध (सिविल वॉर) जैसी स्थिति पैदा करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, “राहुल गांधी सच के मंदिर में खड़े होकर झूठ बोल रहे हैं। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किसानों के साथ कभी अन्याय नहीं हो सकता।” गिरिराज सिंह ने यह भी चेतावनी दी कि जब चीन और कंबोडिया से जुड़ी फाइलें खुलेंगी, तब राहुल गांधी की असलियत सामने आएगी। उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (Privilege Motion) लाने की पुरजोर वकालत की।

निशिकांत दुबे की मांग: सदस्यता रद्द हो और चुनाव लड़ने पर लगे आजीवन प्रतिबंध

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की सदस्यता को लेकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने लोकसभा में एक मोशन पेश करते हुए आरोप लगाया कि राहुल गांधी जॉर्ज सोरोस जैसी बाहरी ताकतों की मदद से देश को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं। दुबे ने सदन में मांग रखी कि राहुल गांधी की सदस्यता तत्काल प्रभाव से खत्म की जानी चाहिए और उन पर भविष्य में कभी भी चुनाव लड़ने के लिए आजीवन प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि लोकतांत्रिक संस्थाओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

संवैधानिक मर्यादा का सवाल: चिराग पासवान और जगदंबिका पाल की नसीहत

केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी राहुल गांधी के व्यवहार पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेता का पद बहुत ही गंभीर और गरिमामय होता है, और राहुल गांधी को अपने पद की गंभीरता समझनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना किसी आधार के सदन में बोलना संसदीय मर्यादा के खिलाफ है। वहीं, भाजपा सांसद जगदंबिका पाल, जो राहुल गांधी के भाषण के दौरान आसन पर आसीन थे, उन्होंने भी टिप्पणी की कि लोकतांत्रिक संसदीय प्रणाली में शब्दों और भाषा की मर्यादा का पालन करना अनिवार्य है।

संजय जायसवाल और रवि किशन का विरोध: “बिना सबूत बोलना लोकतंत्र की हत्या”

भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर राहुल गांधी के बजट भाषण से विवादास्पद और आपत्तिजनक शब्दों को हटाने (Expunge) की मांग की है। इसी क्रम में सांसद रवि किशन ने इसे राहुल गांधी की “हताशा” (Frustration) बताया। उन्होंने कहा कि सदन में कोई भी बात रखने के लिए सहायक सबूतों (Supporting Evidence) की आवश्यकता होती है। बिना प्रमाण के आरोप लगाना लोकतंत्र की हत्या करने जैसा है।

संसदीय इतिहास में एक नया गतिरोध

बजट सत्र के दौरान जिस तरह से सत्ता पक्ष ने राहुल गांधी के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है, उससे यह स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में सदन की कार्यवाही और अधिक हंगामेदार रहने वाली है। प्रिविलेज मोशन और सदस्यता रद्द करने की मांग ने विपक्ष को भी एकजुट होने का मौका दे दिया है। अब देखना यह होगा कि लोकसभा अध्यक्ष इन शिकायतों और प्रस्तावों पर क्या निर्णय लेते हैं, क्योंकि यह विवाद न केवल राजनीतिक है बल्कि संसदीय परंपराओं और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच की बारीक रेखा को भी परिभाषित करेगा।