Ghaziabad Polio Alert: गाजियाबाद में सीवेज के नमूने में वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 मिलने के करीब दो महीने बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की टीम जिले में पहुंची है। टीम ने यहां स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर पोलियो संक्रमण की स्थिति, टीकाकरण अभियान और निगरानी व्यवस्था की जानकारी ली। इसके बाद विशेषज्ञों ने कई संवेदनशील इलाकों और स्वास्थ्य केंद्रों का दौरा भी किया।
WHO की टीम का यह दौरा ऐसे समय में हुआ है, जब जिले में वायरस की पहचान के बाद विशेष सर्वे और टीकाकरण अभियान चलाया जा चुका है। WHO वैश्विक स्तर पर पोलियो वायरस की निगरानी और उच्च टीकाकरण कवरेज को संक्रमण रोकने के लिए बेहद अहम मानता है।
Health Tips: तेज बुखार को न करें नजरअंदाज, इन संकेतों से पहचानें डेंगू
सीएमओ कार्यालय में हुई अधिकारियों के साथ बैठक
गाजियाबाद पहुंचने के बाद WHO की टीम ने सबसे पहले मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान जिले में चलाए गए पोलियो अभियान, टीकाकरण की स्थिति और संवेदनशील क्षेत्रों में की गई स्वास्थ्य गतिविधियों के बारे में जानकारी ली गई। बैठक के बाद टीम कैलाभट्टा, विजयनगर और डासना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहुंची। यहां स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों से टीकाकरण अभियान और क्षेत्र में बच्चों की वैक्सीनेशन कवरेज से संबंधित जानकारी हासिल की गई।
पांच देशों के 21 अधिकारी टीम में शामिल
इस निरीक्षण दल में नेपाल, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश और तिमोर-लेस्ते से आए स्वास्थ्य अधिकारी शामिल हैं। कुल 21 अधिकारियों की यह टीम गाजियाबाद में चलाए गए पोलियो अभियान और उसकी रणनीति का अध्ययन कर रही है। टीम ने ई-वैक्सीन स्टोर का भी दौरा किया और वहां टीकों के भंडारण तथा रखरखाव की व्यवस्था को समझा। अधिकारियों के मुताबिक, इस दौरे का एक उद्देश्य गाजियाबाद में अपनाई गई रणनीति और व्यवस्थाओं को समझना है, ताकि जरूरत पड़ने पर दूसरे देशों में भी ऐसे अनुभवों का इस्तेमाल किया जा सके।
जून में सीवेज सैंपल में मिला था वायरस
गाजियाबाद के डूंडाहेड़ा स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से लिए गए नमूने में 5 जून 2026 को वैक्सीन-डिराइव्ड पोलियोवायरस टाइप-1 की पुष्टि हुई थी। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग और शासन स्तर पर मामले को लेकर बैठकें की गईं और संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाने का फैसला लिया गया।
8 जून को हुई बैठक के बाद जिले के 12 संवेदनशील क्षेत्रों में घर-घर सर्वे और विशेष टीकाकरण अभियान शुरू किया गया। स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों की पहचान कर यह पता लगाने की कोशिश की कि किन बच्चों को पोलियो की खुराक या नियमित टीकाकरण नहीं मिला है।
डेढ़ लाख बच्चों का तैयार हुआ डाटा
अभियान के दौरान 26 जून तक करीब डेढ़ लाख बच्चों का विवरण तैयार किया गया। सर्वे में लगभग एक हजार ऐसे बच्चे भी मिले, जिन्हें पोलियो की खुराक या जरूरी टीकाकरण नहीं मिला था। इन बच्चों पर विशेष ध्यान देते हुए वैक्सीनेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई। इसके बाद 28 जून को जिले में बड़े स्तर पर पोलियो अभियान चलाया गया, जिसमें छह लाख से अधिक बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई गई।
12 संवेदनशील इलाकों में चला अभियान
विजयनगर, कैलाभट्टा, राजनगर और घूकना समेत कई संवेदनशील इलाकों में 100 से ज्यादा टीमें घर-घर पहुंचीं। अभियान का मुख्य उद्देश्य पांच साल तक के बच्चों को चिन्हित करना, छूटे हुए बच्चों तक पोलियो की खुराक पहुंचाना और संक्रमण की निगरानी मजबूत करना था।
WHO और राज्य स्तरीय अधिकारियों की निगरानी में चले इस अभियान के बाद अब अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की टीम गाजियाबाद में किए गए कामकाज और व्यवस्थाओं का अध्ययन कर रही है। WHO की हालिया वैश्विक रिपोर्ट भी पोलियो की निगरानी, नियमित टीकाकरण और समय पर प्रतिक्रिया को संक्रमण रोकने के लिए जरूरी बताती है।
Health Tips: कैंसर को मात देने के बाद भी क्यों नहीं मिलती पूरी राहत? जानें










