Fuel Rule 2026: डीजल-पेट्रोल खरीदने वालों के लिए बड़ा झटका, 90 दिन तक लागू रहेगा नया नियम

पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति में आई बाधाओं को देखते हुए भारत सरकार ने देश में ईंधन की किल्लत और जमाखोरी रोकने के लिए पेट्रोल पंपों से थोक (Bulk) खरीद पर 90 दिनों का प्रतिबंध लगा दिया है।

Fuel Rule 2026

Wrriten By :

Nivedita Kasaudhan

Published On :

जून 12, 2026

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Fuel Rule 2026: पश्चिम एशिया (Middle East) में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति में आ रही बाधाओं के बीच भारत सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। देश के भीतर ईंधन की जमाखोरी को रोकने और आम उपभोक्ताओं के लिए पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक नया और बेहद सख्त आदेश जारी किया है। सरकार ने इंडस्ट्रियल, कमर्शियल और इंस्टीट्यूशनल यूजर्स के रिटेल पेट्रोल पंपों से सीधे तेल खरीदने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। गुरुवार को जारी इस नए नोटिफिकेशन के तहत रिटेल आउटलेट्स पर हाई-स्पीड डीजल (HSD) की बिक्री की अधिकतम दैनिक सीमा भी तय कर दी गई है।

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खुदरा और थोक कीमतों में ₹39 का अंतर

इस सख्त फैसले के पीछे की मुख्य वजह खुदरा (Retail) और थोक (Bulk) बाजार में डीजल की कीमतों का भारी अंतर है। वर्तमान में दिल्ली के पेट्रोल पंपों पर आम जनता और आम वाहनों के लिए डीजल की कीमत ₹95.20 प्रति लीटर है। वहीं, बड़े उद्योगों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के लिए थोक बाजार में डीजल की कीमत ₹134.50 प्रति लीटर तक पहुंच चुकी है।

प्रति लीटर लगभग ₹39.30 के इस बहुत बड़े अंतर के कारण बड़े कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूजर्स भारी मात्रा में ईंधन सीधे खुदरा पेट्रोल पंपों से खरीदने लगे थे। सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में मची उथल-पुथल से आम जनता को राहत देने के लिए खुदरा कीमतें स्थिर रखी हैं, लेकिन इस विसंगति के कारण रिटेल पंपों पर असामान्य मांग और किल्लत पैदा होने लगी थी। इसी वजह से सरकार को यह हस्तक्षेप करना पड़ा।

90 दिनों का बैन और एक दिन में अधिकतम 200 लीटर डीजल की सीमा तय

सरकार के नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, इस व्यवस्था को संतुलित करने के लिए दो प्रमुख नियम लागू किए गए हैं। बड़े कमर्शियल और इंडस्ट्रियल ग्राहकों के खुदरा पेट्रोल पंपों से तेल खरीदने पर शुरुआती तौर पर 90 दिनों (3 महीने) तक की रोक रहेगी। इन्हें अपनी जरूरत का ईंधन अनिवार्य रूप से केवल अधिकृत बल्क सेल पॉइंट्स से ही ऊंचे दामों पर लेना होगा।

200 लीटर की दैनिक सीमा: रिटेल आउटलेट डीलरों को आदेश दिया गया है कि वे किसी भी एक ग्राहक या गाड़ी (जैसे भारी ट्रक) को एक दिन में 200 लीटर से अधिक हाई-स्पीड डीजल नहीं बेच सकते। इसके साथ ही, पंपों से खरीदे गए इस डीजल को बाजार में मुनाफा कमाने के लिए दोबारा बेचने (Re-selling) पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

क्या है हाई-स्पीड डीजल (HSD) और किन उद्योगों पर पड़ेगा इसका असर?

हाई-स्पीड डीजल (High-Speed Diesel) पेट्रोलियम से परिष्कृत किया गया एक मानक और शक्तिशाली ईंधन है, जो भारी वाणिज्यिक वाहनों और भारी मशीनों को चलाने के लिए अनिवार्य है। इसका सबसे ज्यादा इस्तेमाल निम्नलिखित क्षेत्रों में होता है:

परिवहन और निर्माण: भारी कमर्शियल ट्रक, ऑफ-रोड कंस्ट्रक्शन क्रेन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में प्रयुक्त मशीनें।

कृषि क्षेत्र: खेतों में चलने वाले बड़े ट्रैक्टर, कंबाइन हार्वेस्टर और थ्रेशर।

बिजली और उद्योग: फैक्ट्रियों, अस्पतालों और सोसायटियों में बैकअप के लिए इस्तेमाल होने वाले बड़े डीजल जनरेटर (DG Sets) तथा गैस टर्बाइन।

सरकार के इस नए मास्टरस्ट्रोक से यह सुनिश्चित होगा कि एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड, कृषि कार्यों और आम जनता के निजी वाहनों के लिए देश में ईंधन की कोई कमी न हो। उद्योगों को अब अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए बल्क डीलरों का ही रुख करना पड़ेगा।

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