कंगन से खाजेकलां तक, पटना के घाटों में बसी विरासत की गाथा

पटना सिटी  पौराणिक व ऐतिहासिक शहर पटना सिटी में गंगा किनारे लगभग 55 घाट हैं। उन घाटों में लगभग एक दर्जन घाट ऐतिहासिकता को दामन में समेटे हैं। ऐतिहासिक गंगा घाटों में कंगन घाट व गायघाट में गंगा सीढ़ियों से दूर है तो खाजेकलां घाट में गंगा सीढ़ियों से सट गई है। कंगन घाट विश्व में सिखों के दूसरे बड़े तख्त श्री हरिमंदिर पटना साहिब से महज 700 गज की दूरी पर स्थित कंगन घाट पर सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज बचपन में प्रतिदिन खेलने आते थे। गंगा में अठखेलियों के दौरान एक दिन उन्होंने अपने

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Published On :

अगस्त 5, 2026

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पटना सिटी
 पौराणिक व ऐतिहासिक शहर पटना सिटी में गंगा किनारे लगभग 55 घाट हैं। उन घाटों में लगभग एक दर्जन घाट ऐतिहासिकता को दामन में समेटे हैं। ऐतिहासिक गंगा घाटों में कंगन घाट व गायघाट में गंगा सीढ़ियों से दूर है तो खाजेकलां घाट में गंगा सीढ़ियों से सट गई है।

कंगन घाट
विश्व में सिखों के दूसरे बड़े तख्त श्री हरिमंदिर पटना साहिब से महज 700 गज की दूरी पर स्थित कंगन घाट पर सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह महाराज बचपन में प्रतिदिन खेलने आते थे। गंगा में अठखेलियों के दौरान एक दिन उन्होंने अपने हाथ का कंगन गंगा में फेंक दिया। जब मांझी गंगा से कंगन निकालने गया तो गंगा में चारों ओर असंख्य कंगन देख अचंभित हुआ।

गुरु जी उसे दूसरे कंगन निकालने से मना करते हुए कहा कि गंगा हमारी तिजोरी है तुम सिर्फ मेरा कंगन पहचान कर निकाल लाओ। बताया जाता है उसी समय से लोग इसे चिमनी घाट की जगह कंगन घाट के नाम से जानने लगे।

इतिहासकारों की माने तो इसी घाट पर गुरु महाराज ने पुजारी पंडित शिवदत्त शर्मा को मानसिक शांति का वरदान दिया था तथा श्री राम रूप में दर्शन देते हुए परम प्रभु की पूजा की प्रेरणा दी थी। इस घाट पर प्रतिदिन देश-विदेश की संगत आते हैं। प्रतिदिन शाम में कंगन घाट पर गंगा आरती होती है। घाट पर प्रतिदिन दूर-दूर से लोग स्नान करने आते हैं। वर्तमान में अभी गंगा सीढ़ियों से दूर है।

खाजेकलां घाट
इतिहासकार बताते हैं कि खाजेकलां फारसी के दो शब्द ख्वाजा और कलां से बना है यानि श्रेष्ठ। जनसामान्य द्वारा सदियों से खाजेकलां घाट का उपयोग स्नान व अंत्येष्टि कर्म के लिए हो रहा है। समाजसेवी विजय कुमार सिंह बताते हैं कि दस्तावेजों में सुप्रसिद्ध सर्वेक्षक फ्रांसिस बुकानन के प्लान आफ पटना 1812 में इस घाट को सुंदर और धार्मिक व व्यापारिक दृष्टि से उन्नत बताया है।

खाजेकलां घाट आज मूलस्थान से लगभग 200 मीटर उत्तर स्थानांतरित हो चुका है। खाजेकलां घाट का आधुनिकीकरण की दिशा में पहला प्रयास बीसवीं सदी में हुआ था। उस समय यहां विद्युत शवदाह गृह की शुरुआत हुई। वर्ष 2018 के चार नवंबर को इंडियन आयल कंपनी के सीएसआर फंड से 30 करोड़ की लागत से आधुनिक सुविधायुक्त स्नान घाट व श्मशान घाट की नींव तत्कालीन उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी व पथ निर्माण मंत्री नंदकिशोर यादव ने रखी।

खाजेकलां घाट पर आधुनिक सुविधायुक्त स्नान घाट व श्मशान घाट बनकर तैयार है। घाट पर दूर-दूर से लोग स्नान करने आते हैं। वर्तमान में गंगा खाजेकलां घाट के सीढ़ियों के पास आ गई है।

गायघाट
इतिहासकार बताते हैं कि गायघाट का निर्माण बादशाह जहांगीर के समय हुआ था। गायघाट गुरुद्वारा में सिखों के प्रथम गुरु नानक देव व नौवें गुरु तेग बहादुर ठहरे थे। वहीं पर श्रद्धालुओं ने गायघाट गुरुद्वारा का निर्माण कराया।

हिन्दुओं का मानना है कि पुराना गौरीशंकर मंदिर में स्थापित शिवलिंग व गऊ की प्रतिमा किसी के द्वारा स्थापित नहीं की गई है बल्कि स्वयं प्रकट हुई है। धार्मिक मान्यताओं को लेकर कालांतर में इसका नाम गऊघाट से गायघाट पड़ गया। यहां पर दूर-दूर से लोग स्नान करने गंगा में आते हैं। यहां पर पटना व वैशाली को जोड़ने वाला गांधी सेतु का निर्माण पांच दशक पहले हुआ था। वर्तमान में गंगा अभी सीढ़ियों से दूर है।

 

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