भोजशाला मामले में नई चर्चा, फैसले को एक महीना पूरा; SOP लागू करने पर बना असमंजस

धार  इंदौर हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के फैसले को एक माह पूरा हो चुका है, लेकिन भोजशाला को लेकर पुरातत्व विभाग की तरफ से दिशा-निर्देशों को लेकर एसओपी जारी नहीं की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि हमने विभाग को मेल किए तो अफसर सुप्रीम कोर्ट में केस होने का हवाला देकर मामला टाल रहे हैं, जबकि अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी नहीं हुई है। हमने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। पुरातत्व विभाग की तरफसे हाईकोर्ट के फैसले के बाद कोई प्रक्रिया शुरू

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Published On :

जून 16, 2026

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धार 

इंदौर हाईकोर्ट द्वारा भोजशाला को मंदिर घोषित किए जाने के फैसले को एक माह पूरा हो चुका है, लेकिन भोजशाला को लेकर पुरातत्व विभाग की तरफ से दिशा-निर्देशों को लेकर एसओपी जारी नहीं की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि हमने विभाग को मेल किए तो अफसर सुप्रीम कोर्ट में केस होने का हवाला देकर मामला टाल रहे हैं, जबकि अभी तक सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई भी नहीं हुई है। हमने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर कहा है कि वे इस मामले में हस्तक्षेप करें। पुरातत्व विभाग की तरफसे हाईकोर्ट के फैसले के बाद कोई प्रक्रिया शुरू नहीं की गई। हमारी मांग है कि पूर्व में खुदाई के दौरान भोजशाला से निकली प्रतिमाओं को फिर से भोजशाला में स्थापित किया जाए।

आपको बता दें कि पिछले माह 15 मई को इंदौर हाईकोर्ट ने भोजशाला को मंदिर मानते हुए हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया था। फैसले के बाद भोजशाला में नमाज बंद हो गई और अब हर दिन भोजशाला में पूजा होती है। कोर्ट के फैसले के बाद आए मंगलवार और शुक्रवार को भोजशाला में विशेष आरती की गई और हजारों हिंदू परिवारों ने वहां जाकर पूजा की थी।

याचिकाकर्ता आशीष गोयल का कहना है कि मुख्यमंत्री मोहन यादव धार में सरस्वती लोक बनाने की घोषणा कर चुके हैं। इसकी कैबिनेट बैठक में मंजूरी भी मिल चुकी है। अब इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उधर लंदन के संग्रहालय में रखी मां वाग देवी की प्रतिमा को लाने की कवायद भी चल रही है। इसे लेकर मंत्री सावित्री ठाकुर प्रयास कर रही है। 

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