France Food Law: फ्रांस में खाने की बर्बादी रोकने के लिए दुनिया का पहला देश बना जिसने 2016 में सुपरमार्केट को खाने लायक बचा हुआ भोजन फेंकने पर रोक लगा दी। इस कानून के तहत 400 स्क्वायर मीटर से बड़े सुपरमार्केट को खाने योग्य सरप्लस आइटम नष्ट करने की अनुमति नहीं है। उन्हें चैरिटी संस्थाओं और फूड बैंकों के साथ औपचारिक समझौते कर भोजन दान करना अनिवार्य है।
अगर कोई स्टोर जानबूझकर खाने योग्य भोजन डोनेट करने के बजाय बर्बाद करता है तो उस पर €75,000 (लगभग 80 लाख रुपये) तक का जुर्माना या फिर दो साल तक की जेल हो सकती है। यह फ्रेमवर्क खाने की बर्बादी और भूख की समस्या से एक साथ निपटने का प्रयास है और इसे दुनिया के सबसे सख्त कानूनों में गिना जाता है।
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भारत में खाने की बर्बादी पर कानून

भारत में खाने की बर्बादी रोकने के लिए ऐसा कोई सीधा कानून नहीं है जो जुर्माना या सजा का प्रावधान करता हो। यहां कोई देशव्यापी नियम नहीं है जो सुपरमार्केट या आयोजकों को बचा हुआ खाना फेंकने पर दंडित करे। हालांकि, भारत में जागरूकता और रेगुलेटरी स्तर पर कुछ पहलें जरूर की गई हैं। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने इंडियन फूड शेयरिंग अलायंस जैसी पहल शुरू की है। यह संगठन फूड रिकवरी ग्रुप्स को बिजनेस और इवेंट आयोजकों से जोड़ता है ताकि सरप्लस खाना जरूरतमंदों तक पहुंचाया जा सके।
मौजूदा कानून और दंड
भारत में लागू फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट मुख्य रूप से खाने की सुरक्षा पर केंद्रित है। असुरक्षित या घटिया खाना बेचने पर ₹1 लाख से ₹10 लाख तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। लेकिन यह कानून खाने की बर्बादी पर सीधे लागू नहीं होता।
मुख्य अंतर
फ्रांस और भारत के बीच सबसे बड़ा अंतर एनफोर्समेंट का है। फ्रांस में सुपरमार्केट को कानूनी रूप से बचा हुआ खाना दान करना अनिवार्य है और नियम तोड़ने पर सजा मिलती है। वहीं भारत में यह प्रक्रिया जागरूकता और स्वेच्छा पर आधारित है।









