जाट सिख, ओबीसी और एससी वोट बैंक पर नजर, BJP से लेकर कांग्रेस तक ने बनाई नई रणनीति

 चंडीगढ़  पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की कवायद तेज कर दी है। राज्य की चारों प्रमुख पार्टियां—भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिरोमणि अकाली दल (शिअद), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस अपने पारंपरिक जनाधार को बचाने के साथ-साथ नए सामाजिक समूहों में पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं। जाट सिख, ओबीसी, एससी-बीसी, व्यापारी, महिला और युवा वर्ग अब सभी दलों की राजनीतिक रणनीति के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा ने पिछले कुछ समय में अपने सामाजिक विस्तार पर विशेष जोर दिया है। पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व

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Published On :

जून 15, 2026

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 चंडीगढ़
 पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों ने सामाजिक और जातीय समीकरणों को साधने की कवायद तेज कर दी है। राज्य की चारों प्रमुख पार्टियां—भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), शिरोमणि अकाली दल (शिअद), आम आदमी पार्टी (आप) और कांग्रेस अपने पारंपरिक जनाधार को बचाने के साथ-साथ नए सामाजिक समूहों में पैठ बनाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।

जाट सिख, ओबीसी, एससी-बीसी, व्यापारी, महिला और युवा वर्ग अब सभी दलों की राजनीतिक रणनीति के केंद्र में आ गए हैं। भाजपा ने पिछले कुछ समय में अपने सामाजिक विस्तार पर विशेष जोर दिया है। पार्टी ने प्रदेश नेतृत्व में जाट सिख चेहरे को आगे किया है और साथ ही ओबीसी, सैनी तथा अन्य पिछड़े वर्गों के बीच लगातार कार्यक्रम और संवाद अभियान चला रही है।

पार्टी का प्रयास शहरी और व्यापारी दल की पारंपरिक छवि से बाहर निकलकर ग्रामीण और कृषि प्रधान वर्गों तक पहुंच बढ़ाने का है।

अकाली दल बढ़ा रहा सामाजिक दायरा
शिरोमणि अकाली दल भी बदलते राजनीतिक हालात के बीच अपना सामाजिक दायरा बढ़ाने में जुटा है। पार्टी पहले ही 70 से अधिक विधानसभा क्षेत्रों में एससी-बीसी, महिला और यूथ विंग को सक्रिय कर चुकी है। इसके अलावा हाल ही में 67 विधानसभा हलकों में उद्योग एवं व्यापार विंग के हलका प्रधान नियुक्त किए गए हैं।

पार्टी नेताओं का मानना है कि संगठन में विभिन्न वर्गों की भागीदारी बढ़ाकर शहरी और गैर-पारंपरिक वोट बैंक में पकड़ मजबूत की जा सकती है।

आप ने कल्याण बोर्ड गठित किए
उधर, आम आदमी पार्टी सरकार ने भी विभिन्न समुदायों तक सीधी पहुंच बनाने के लिए जिला और विधानसभा स्तर पर कल्याण बोर्ड गठित करने की तैयारी शुरू कर दी है। सरकार पहले ही 21 राज्य स्तरीय कल्याण बोर्ड बना चुकी है और अब इनका विस्तार सभी जिलों और 117 विधानसभा क्षेत्रों तक करने की योजना पर काम चल रहा है।

आधिकारिक तौर पर इन बोर्डों का उद्देश्य समुदायों से जुड़े मुद्दों और सुझावों को सरकार तक पहुंचाना बताया जा रहा है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे चुनावी तैयारी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

कांग्रेस सामाजिक संतुलन बनाने में जुटी
वहीं, कांग्रेस भी संगठन के पुनर्गठन के साथ सामाजिक संतुलन बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। पार्टी ने हाल के महीनों में जिला और हलका स्तर पर नियुक्तियों में विभिन्न सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दिया है। इसके अलावा कांग्रेस के एससी विभाग, ओबीसी विभाग, किसान कांग्रेस, महिला कांग्रेस, यूथ कांग्रेस और व्यापार प्रकोष्ठ को फिर से सक्रिय करने की कवायद चल रही है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि प्रदेश नेतृत्व को सभी फ्रंटल संगठनों और विभागों को विधानसभा स्तर तक सक्रिय करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि चुनाव से पहले हर सामाजिक वर्ग के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जा सके। कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, पार्टी जिला और विधानसभा स्तर पर सामाजिक समूहों के प्रभावशाली प्रतिनिधियों के साथ नियमित बैठकें शुरू करने की तैयारी में है।

इसका मकसद उन वर्गों में अपनी पकड़ मजबूत करना है, जहां पिछले चुनावों में पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ था। सूत्रों का कहना है कि संगठनात्मक फेरबदल में भी सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को प्राथमिकता दी जा रही है।

पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़ी राजनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब की राजनीति अब केवल पारंपरिक वोट बैंक के इर्द-गिर्द नहीं घूम रही। सभी प्रमुख दल अपने पुराने आधार को बरकरार रखते हुए नए सामाजिक समूहों में स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। संगठनात्मक नियुक्तियों, अलग-अलग विंगों की सक्रियता और समुदाय आधारित संपर्क अभियानों से यह संकेत मिल रहे हैं कि 2027 के विधानसभा चुनाव में जातीय और सामाजिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

 

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