UP News: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले में उस समय प्रशासनिक भूचाल आ गया, जब एक महिला तहसीलदार ने अपने ही जिले के जिलाधिकारी (DM) पर मोर्चा खोल दिया। टूंडला की तहसीलदार राखी शर्मा ने देर रात अपने सरकारी आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर डीएम रमेश रंजन के खिलाफ आरोपों की बौछार कर दी। इस घटना ने एक बार फिर यूपी की अफसरशाही और उच्च अधिकारियों के बीच तालमेल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महिला अधिकारी के इन बयानों के बाद पूरे राज्य के प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
रिश्वत के तौर पर iPhone और भ्रष्टाचार के गंभीर इल्जाम
बताते चले कि, तहसीलदार राखी शर्मा ने भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए आरोप लगाया कि जिलाधिकारी ने उनके विरुद्ध एक जांच शुरू कराई थी। उन्होंने दावा किया कि उस जांच को रफा-दफा करने के एवज में उनसे 1,75,000 की कीमत वाला iPhone रिश्वत के रूप में लिया गया। तहसीलदार ने यह भी खुलासा किया कि जिले में करोड़ों रुपये की बेशकीमती जमीनों की बंदरबांट में बाबू और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह मामला केवल वित्तीय अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें पद के दुरुपयोग की भी गंभीर परतें सामने आई हैं।
महिला सम्मान के साथ प्रशासनिक खिलवाड़
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राखी शर्मा ने जिलाधिकारी पर यौन शोषण और मानसिक प्रताड़ना जैसे विचलित करने वाले आरोप भी लगाए। हालांकि, उन्होंने कहा कि कुछ बातें इतनी गंभीर और व्यक्तिगत हैं कि उन्हें कैमरे के सामने बोलने में संकोच हो रहा है, लेकिन उनके इशारे डीएम की कार्यशैली और चरित्र पर गहरे सवालिया निशान खड़े करते हैं। महिला अधिकारी का कहना है कि वे इस सिस्टम में खुद को असुरक्षित महसूस कर रही हैं और जिलाधिकारी के दबावपूर्ण रवैये ने उन्हें सार्वजनिक रूप से आने पर मजबूर किया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से कार्रवाई की गुहार
पीड़ित तहसीलदार ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उन्होंने अपील की है कि डीएम रमेश रंजन को उनके पद से हटाकर निष्पक्ष जांच कराई जाए। अब सबकी निगाहें शासन की कार्रवाई और आरोपी जिलाधिकारी के स्पष्टीकरण पर टिकी हैं। लखनऊ स्थित मुख्यालय में भी इस प्रकरण को लेकर फाइलें दौड़ने लगी हैं, क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति और महिला सुरक्षा से जुड़ा हुआ है।
यूपी में अधिकारियों के बीच वर्चस्व की जंग
उत्तर प्रदेश में आईएएस बनाम पीसीएस या वरिष्ठ बनाम कनिष्ठ अधिकारियों के बीच विवाद का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कानपुर में डीएम और सीडीओ के बीच हुए विवाद ने इंटरनेट पर खूब सुर्खियां बटोरी थीं। वहीं, भटगांव भूमि अधिग्रहण घोटाले में आईएएस अभिषेक प्रकाश और कई पीसीएस अधिकारियों की संलिप्तता ने कैडर विवाद को हवा दी थी। वेतन विसंगतियों और प्रमोशन के बाद पोस्टिंग को लेकर भी यूपी के अफसरों के बीच हमेशा से खींचतान चलती रही है, जो अब इस नए मामले के साथ एक बार फिर सार्वजनिक हो गई है।









