FII investment in India: बिकवाली के बाद खरीदारी का दौर, क्या टिकेगा FIIs का भरोसा?

लंबे समय की बिकवाली के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में जोरदार वापसी की है। लगातार खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली है, लेकिन सवाल यह है कि क्या वैश्विक हालात, डॉलर की चाल और कंपनियों की कमाई FIIs के भरोसे को आगे भी कायम रख पाएगी?

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

फ़रवरी 10, 2026

FII investment in India: भारतीय शेयर बाजार में एक बार फिर रौनक लौटती नजर आ रही है और इसके पीछे सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की जोरदार वापसी मानी जा रही है। लंबे समय तक लगातार बिकवाली करने के बाद अब विदेशी निवेशक भारतीय इक्विटी मार्केट में दोबारा दिलचस्पी दिखा रहे हैं। हाल के दिनों में हुई भारी खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली है और निवेशकों के सेंटीमेंट में भी सुधार देखने को मिला है।

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लगातार खरीदारी से बदला बाजार का रुख

पिछले करीब नौ ट्रेडिंग सेशंस में FIIs का रुख साफ तौर पर सकारात्मक रहा है। इस अवधि में उन्होंने भारतीय शेयर बाजार में 2 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। 28 जनवरी से 6 फरवरी के बीच नौ कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशक छह दिनों तक नेट खरीदार रहे, जबकि केवल तीन सेशंस में हल्की बिकवाली दर्ज की गई।9 फरवरी को तो FIIs ने करीब 2,200 करोड़ रुपये की शुद्ध खरीदारी की, जिससे बाजार को मजबूत सपोर्ट मिला। इस लगातार खरीदारी का असर यह रहा कि बाजार में गिरावट का सिलसिला थमा और इंडेक्स में मजबूती देखने को मिली।

घरेलू निवेशकों का भी मजबूत साथ

घरेलू निवेशकों का भी मजबूत साथ
घरेलू निवेशकों का भी मजबूत साथ

सिर्फ विदेशी निवेशक ही नहीं, बल्कि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने भी बाजार में भरोसा बनाए रखा है। इस दौरान घरेलू निवेशकों ने करीब 9,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की खरीदारी की। विदेशी और घरेलू निवेशकों की इस साझा भागीदारी ने बाजार को स्थिरता प्रदान की है। पिछले दो कारोबारी सत्रों में सेंसेक्स और निफ्टी में आई तेजी इस बात का संकेत है कि निवेशक धीरे-धीरे बाजार को लेकर आशावादी हो रहे हैं।

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संतुलित वैल्यूएशन बना FIIs की वापसी की वजह

संतुलित वैल्यूएशन बना FIIs की वापसी की वजह
संतुलित वैल्यूएशन बना FIIs की वापसी की वजह

विशेषज्ञों का मानना है कि विदेशी निवेशकों की इस वापसी के पीछे सबसे बड़ी वजह बाजार का आकर्षक वैल्यूएशन है। हालिया करेक्शन के बाद अब सेंसेक्स और निफ्टी अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन के आसपास कारोबार कर रहे हैं। कुछ समय पहले तक भारतीय बाजार को एशिया के अन्य उभरते बाजारों की तुलना में काफी महंगा माना जा रहा था। लेकिन हाल की गिरावट के बाद यह अंतर काफी हद तक कम हो गया है। यही वजह है कि अब भारतीय बाजार फिर से विदेशी निवेशकों को आकर्षित करता दिख रहा है।

आगे क्या जारी रहेगा यह ट्रेंड?

हालांकि बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल किसी ठोस नतीजे पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। आने वाले समय में विदेशी निवेशकों का रुख कई कारकों पर निर्भर करेगा, जैसे वैश्विक आर्थिक स्थिति, डॉलर की चाल, ब्याज दरें और भारतीय कंपनियों के तिमाही नतीजे। अगर इन सभी मोर्चों पर बाजार को समर्थन मिलता है, तो FIIs की खरीदारी आगे भी जारी रह सकती है। फिलहाल संकेत सकारात्मक हैं और बाजार में स्थिरता लौटने की उम्मीद की जा रही है।

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