FIFA World Cup Final : ‘मैंने जैकेट उतारा और गोल हो गया…’ अंधविश्वास के कारण FIFA वर्ल्ड कप फाइनल नहीं देखेंगे राष्ट्रपति

फीफा वर्ल्ड कप 2026 फाइनल से पहले अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई का एक फैसला चर्चा का विषय बन गया है। उनका कहना है कि टीम की लगातार जीत के दौरान उन्होंने हर मैच एक जैसी परिस्थितियों में देखा और एक खास जैकेट पहनने की परंपरा निभाई। अब वह उसी अंधविश्वास के चलते स्टेडियम नहीं जाएंगे।

FIFA World Cup Final

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 17, 2026

FIFA World Cup Final : फीफा विश्व कप का फाइनल मुकाबला अर्जेंटीना और स्पेन के बीच न्यू जर्सी में खेला जाना है, जिसे देखने के लिए दुनिया भर की बड़ी हस्तियां और राजनेता स्टेडियम में मौजूद रहेंगे। हालांकि, अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई इस महामुकाबले के लिए स्टेडियम नहीं जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया है कि वे इस महत्वपूर्ण मैच को अपने आधिकारिक आवास, ओलिवोस से ही देखेंगे। इसके पीछे का कारण उनका व्यस्त कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक गहरा ‘अंधविश्वास’ है। मिलेई ने बताया कि उन्होंने अर्जेंटीना के पिछले सातों मैच घर से ही देखे हैं और टीम ने उन सभी में जीत हासिल की है। वे इस सिलसिले को तोड़कर अपनी टीम की जीत का क्रम खराब नहीं करना चाहते।

एक खास जैकेट और जीत का कनेक्शन: मिलेई की अनोखी धारणा

राष्ट्रपति मिलेई केवल मैच देखने की जगह को लेकर ही सतर्क नहीं हैं, बल्कि वे एक विशेष जैकेट को लेकर भी काफी भावुक हैं। उनका मानना है कि यह जैकेट उनकी टीम के लिए शुभ है। उन्होंने खुलासा किया कि स्विट्जरलैंड के खिलाफ मैच के दौरान उन्हें गर्मी लगी और उन्होंने जैकेट उतार दी, जिसके तुरंत बाद विपक्षी टीम ने गोल कर दिया। इसके बाद उन्होंने तुरंत जैकेट दोबारा पहन ली और मैच खत्म होने तक उसे नहीं उतारा। फाइनल मुकाबले के दिन भी वे उसी भाग्यशाली जैकेट को पहनकर मैच देखेंगे। मिलेई का यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि खेल के प्रति जुनून के साथ-साथ अर्जेंटीना के लोगों में अंधविश्वास और ‘काबालास’ (अनुष्ठानिक आदतों) की कितनी गहरी जड़ें हैं।

अर्जेंटीना की संस्कृति में रचे-बसे अंधविश्वास और अनोखी रस्में

अर्जेंटीना में फुटबॉल केवल एक खेल नहीं, बल्कि एक धर्म की तरह है, जहाँ प्रशंसक और खिलाड़ी किस्मत बदलने वाली रस्मों पर बहुत भरोसा करते हैं। यहाँ लोग मैचों के दौरान एक ही कपड़े पहनने, विश्व कप के दौरान अपनी जर्सी न धोने, या हर मैच एक ही स्थान पर बैठकर देखने जैसे अंधविश्वासों का सख्ती से पालन करते हैं। कुछ प्रशंसक तो इतने कट्टर हैं कि यदि कोई व्यक्ति अर्जेंटीना के गोल करने के दौरान बाथरूम में होता है, तो उसे दोबारा मैच देखने तक नहीं दिया जाता। यहाँ तक कि प्रतिद्वंद्वी टीम को हराने के लिए उनके खिलाड़ियों के नाम बर्फ में जमा देने जैसी अजीबोगरीब रस्में भी आम हैं।

‘मुफा’ का डर: दशकों से चली आ रही एक पुरानी परंपरा

अर्जेंटीना के राष्ट्रपतियों का विश्व कप मैचों में जाने से परहेज करना कोई नई बात नहीं है। यह परंपरा 1990 के विश्व कप से शुरू हुई थी, जब तत्कालीन राष्ट्रपति कार्लोस मेनेम ने कैमरून के खिलाफ शुरुआती मैच से पहले टीम से मुलाकात की थी और टीम हार गई थी। उस घटना के बाद मेनेम को ‘मुफा’ यानी मनहूस करार दिया गया था। तब से, अर्जेंटीना का कोई भी राष्ट्रपति अपनी राष्ट्रीय टीम का मैच स्टेडियम में जाकर देखने की हिम्मत नहीं जुटा सका है। जेवियर मिलेई भी इसी परंपरा का पालन करते हुए अपनी टीम की जीत की कामना कर रहे हैं, ताकि अर्जेंटीना लगातार दूसरी बार विश्व चैंपियन बनने का गौरव हासिल कर सके।

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