FIFA World Cup 2026 : ट्रंप के फोन से हटा बैन, अमेरिकी खिलाड़ी को राहत, बेल्जियम ने उठाए सवाल

फीफा विश्व कप 2026 के दौरान एक नए विवाद ने सुर्खियां बटोर ली हैं। अमेरिकी खिलाड़ी पर लगा फोन प्रतिबंध हटने के बाद राहत मिली, लेकिन बेल्जियम ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। आखिर पूरा मामला क्या है, नियमों को लेकर विवाद क्यों बढ़ा और फीफा की अगली कार्रवाई क्या हो सकती है, जानिए पूरी रिपोर्ट।

FIFA World Cup 2026

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 6, 2026

FIFA World Cup 2026 : फुटबॉल जगत में इस समय एक अभूतपूर्व घटनाक्रम ने हलचल मचा दी है। फीफा विश्व कप 2026 के दौरान अमेरिका के स्टार फॉरवर्ड खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन को मिला लाल कार्ड (Red Card) फीफा द्वारा वापस ले लिया गया है। यह निर्णय इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि 1962 के बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब विश्व कप के दौरान किसी खिलाड़ी को लाल कार्ड मिलने के बावजूद उसका निलंबन निरस्त किया गया हो। इस फैसले के बाद बालोगुन अब बेल्जियम के खिलाफ होने वाले महत्वपूर्ण विश्व कप मैच में खेलने के लिए पूरी तरह उपलब्ध होंगे। बालोगुन मौजूदा टूर्नामेंट में अमेरिका के लिए सबसे अधिक तीन गोल दाग चुके हैं, जिससे उनकी उपस्थिति टीम के लिए अत्यंत निर्णायक मानी जा रही है।

विवाद की जड़: बोस्निया-हर्जेगोविना मैच के दौरान मिला था लाल कार्ड

इस विवाद की शुरुआत राउंड ऑफ 32 में बोस्निया-हर्जेगोविना के विरुद्ध खेले गए मैच के दौरान हुई थी। अमेरिका ने वह मैच 2-0 से जीता था, लेकिन इस मुकाबले में बालोगुन को तारिक मुहारेमोविच के दाहिने टखने पर गलत तरीके से पैर रखने के कारण ब्राजील के रेफरी राफेल क्लॉस द्वारा लाल कार्ड दिखाया गया था। रोचक तथ्य यह है कि रेफरी ने शुरुआत में कार्ड का संकेत नहीं दिया था, लेकिन वीडियो समीक्षा (VAR) के बाद उन्हें यह सख्त निर्णय लेना पड़ा। इस कार्ड के कारण बालोगुन एक मैच के लिए निलंबित हो गए थे, जिसने अमेरिकी खेमे में चिंता पैदा कर दी थी, लेकिन अब फीफा के इस असाधारण बदलाव ने खेल के परिणामों को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।

अमेरिकी राष्ट्रपति का हस्तक्षेप: ट्रंप के फोन कॉल से पलटा फीफा का निर्णय

इस फैसले के पीछे का सबसे चर्चित पहलू अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सीधा हस्तक्षेप बताया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मैच के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो से व्यक्तिगत रूप से फोन पर बात की और उन्हें लाल कार्ड के फैसले की समीक्षा करने का आग्रह किया। सोशल मीडिया पर एक बयान साझा करते हुए ट्रंप ने फीफा के इस निर्णय की प्रशंसा की और लिखा, “सही काम करने और अन्याय को पलटने के लिए फीफा का आभार।” राजनीतिक गलियारों और खेल विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या वैश्विक खेल संस्था के निर्णयों पर किसी देश के राष्ट्राध्यक्ष का प्रभाव पड़ना उचित है।

बेल्जियम टीम का कड़ा विरोध: फीफा की पारदर्शिता पर खड़े हुए सवाल

फीफा के इस फैसले से बेल्जियम की टीम और रॉयल बेल्जियन फुटबॉल एसोसिएशन (आरबीएफए) बेहद नाराज है। बेल्जियम के कोच रूडी गार्सिया ने इस निर्णय का कड़ा मजाक उड़ाते हुए इसे विश्व कप के इतिहास का सबसे विवादास्पद फैसला करार दिया। गार्सिया ने तंज कसते हुए कहा, “मुझे नहीं पता था कि फीफा के कार्यालयों में पांच जुलाई की तारीख यूरोप के ‘अप्रैल फूल डे’ के समान होती है।” बेल्जियम का मानना है कि खेल के नियमों के साथ इस प्रकार की छेड़छाड़ खेल की निष्पक्षता और फीफा की साख पर एक बड़ा सवालिया निशान है। अब पूरी दुनिया की नजरें बेल्जियम बनाम अमेरिका के आगामी मुकाबले पर टिकी हैं, जहां मैदान पर फुटबॉल से अधिक इस विवादास्पद निर्णय का असर देखने को मिल सकता है।

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