FIFA World Cup 2026 : फीफा वर्ल्ड कप 2026 के आगाज में अब महज एक महीने का समय शेष रह गया है, लेकिन भारतीय फुटबॉल प्रशंसकों के लिए एक चिंताजनक खबर सामने आ रही है। दुनिया के सबसे बड़े खेल आयोजनों में से एक होने के बावजूद, भारत में इस बार वर्ल्ड कप के मैचों का टीवी या ओटीटी (OTT) प्लेटफॉर्म पर प्रसारण होगा या नहीं, इस पर सस्पेंस गहरा गया है। फीफा और भारतीय ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के बीच पैसों के लेन-देन को लेकर मची खींचतान ने इस मेगा इवेंट के कवरेज पर सवालिया निशान लगा दिया है।
रिलायंस-डिज़्नी का ऑफर फीफा ने किया खारिज
प्रसारण अधिकारों की इस जंग में रिलायंस और डिज़्नी के संयुक्त उपक्रम ने फीफा के सामने एक प्रस्ताव रखा था, जिसे फुटबॉल की वैश्विक संस्था ने ठुकरा दिया है। फीफा का मानना है कि रिलायंस-डिज़्नी द्वारा ऑफर की गई राशि उनकी उम्मीदों और अधिकारों की वास्तविक कीमत से बहुत कम है। दूसरी ओर, सोनी जैसे अन्य बड़े नेटवर्क अब इस बोली प्रक्रिया में शामिल होने की इच्छा नहीं दिखा रहे हैं। बाजार की इस उदासीनता ने फीफा को बैकफुट पर ला दिया है, क्योंकि भारत जैसे बड़े बाजार में प्रसारण अधिकारों के लिए कोई खरीदार न मिलना एक बड़ी रणनीतिक हार हो सकती है।
930 करोड़ से 190 करोड़ तक गिरा भाव, फिर भी खरीदार नदारद
भारत में फुटबॉल की लोकप्रियता को देखते हुए फीफा ने 2026 और 2030 वर्ल्ड कप के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स की शुरुआती कीमत करीब 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (लगभग 930 करोड़ रुपये) तय की थी। हालांकि, किसी भी कंपनी के आगे न आने पर मजबूरन फीफा को यह कीमत घटाकर 35 मिलियन डॉलर करनी पड़ी। ताज़ा स्थिति यह है कि रिलायंस-डिज़्नी ने केवल 20 मिलियन डॉलर (करीब 190 करोड़ रुपये) का ऑफर दिया है। 2022 के कतर वर्ल्ड कप के दौरान यही राइट्स 62 मिलियन डॉलर में बेचे गए थे, ऐसे में इस बार की कीमतों में आई भारी गिरावट फीफा के लिए चिंता का विषय है।
चीन और भारत के दर्शक आंकड़ों में अव्वल, बाजार में सुस्त
फीफा के आंकड़ों के अनुसार, 2022 वर्ल्ड कप के दौरान डिजिटल और सोशल मीडिया पर देखे गए कुल घंटों में से लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अकेले चीन की थी। भारत और चीन ने मिलकर कुल डिजिटल ब्रॉडकास्ट का 22.6 प्रतिशत हिस्सा कवर किया था। इन चौंकाने वाले आंकड़ों के बावजूद, इस साल इन दोनों ही बड़े एशियाई देशों में कोई भी कंपनी वर्ल्ड कप दिखाने के लिए उत्साह नहीं दिखा रही है। फीफा का कहना है कि 175 देशों के साथ समझौते हो चुके हैं, लेकिन भारत और चीन के साथ बातचीत अभी भी ‘सीक्रेट’ मोड में चल रही है।
देर रात के मैचों का समय बना सबसे बड़ी बाधा
इस बार वर्ल्ड कप का आयोजन अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको में हो रहा है। भारतीय समयानुसार इन मैचों का समय ब्रॉडकास्टर्स के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। अधिकांश मुकाबले भारतीय समय के मुताबिक रात 12:30 बजे, 1:30 बजे या सुबह 3:30 से 6:30 बजे के बीच होंगे। टीवी कंपनियों और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को डर है कि इतनी देर रात या तड़के होने वाले मैचों के लिए उन्हें पर्याप्त दर्शक और विज्ञापनदाता (Advertisers) नहीं मिलेंगे। प्राइम टाइम कवरेज न मिलने के कारण कंपनियां भारी निवेश करने से बच रही हैं।
फुटबॉल प्रेमियों की उम्मीदें और फीफा की आखिरी कोशिश
भले ही भारतीय फुटबॉल टीम वैश्विक रैंकिंग में पीछे हो, लेकिन देश में अर्जेंटीना, ब्राजील और फ्रांस जैसी टीमों के प्रशंसकों की तादाद करोड़ों में है। वर्ल्ड कप 11 जून से शुरू होने वाला है और अब समय बहुत कम बचा है। यदि फीफा और भारतीय कंपनियों के बीच जल्द ही कोई समझौता नहीं होता है, तो हो सकता है कि भारतीय दर्शकों को इस बार वर्ल्ड कप देखने के लिए किसी वैकल्पिक अंतरराष्ट्रीय स्ट्रीम या फीफा के अपने प्लेटफॉर्म का सहारा लेना पड़े।
फीफा वर्ल्ड कप 2026 के प्रसारण अधिकारों का मामला फिलहाल ‘डेडलॉक’ की स्थिति में है। समय के अंतर और विज्ञापन बाजार की सुस्ती ने इस खेल उत्सव की चमक भारत में धुंधली कर दी है। अब देखना यह होगा कि क्या फीफा आखिरी वक्त पर अपनी कीमतों में और कटौती करता है या भारतीय फुटबॉल प्रेमियों को इस बार टीवी स्क्रीन पर वर्ल्ड कप देखने से वंचित रहना पड़ेगा।










