FIFA World Cup 2026: ब्रॉडकास्टिंग राइट्स विवाद में फंसा FIFA, कोर्ट में सुनवाई जारी

FIFA World Cup 2026 के ब्रॉडकास्टिंग राइट्स को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, जिससे भारत में मैचों के प्रसारण पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मामला दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच चुका है, जहां सुनवाई जारी है। आखिर कौन जीतेगा यह कानूनी लड़ाई और कैसे होगा वर्ल्ड कप का प्रसारण, जानिए पूरी कहानी।

ब्रॉडकास्टिंग राइट्स विवाद में फंसा FIFA

Wrriten By :

Neha Mishra

Published On :

मई 14, 2026

FIFA World Cup 2026: दुनिया के सबसे बड़े और लोकप्रिय खेल टूर्नामेंट, फीफा वर्ल्ड कप (FIFA World Cup) के शुरू होने में अब एक महीने से भी कम समय बचा है। आगामी 11 जून से अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा की संयुक्त मेजबानी में इस महामुकाबले का आगाज होने जा रहा है। इस बार का विश्व कप इतिहास में सबसे बड़ा होने वाला है, क्योंकि इसमें पहली बार 48 देशों की टीमें वर्ल्ड चैंपियन का प्रतिष्ठित खिताब हासिल करने के लिए आपस में भिड़ेंगी। हालांकि, इस वैश्विक उत्साह के बीच भारतीय फुटबॉल प्रेमियों के मन में एक बड़ा सवाल लगातार कौंध रहा है कि क्या वे इस बार के रोमांचक मुकाबले अपने टेलीविजन स्क्रीन या डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाइव देख पाएंगे या नहीं?

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भारत में ब्रॉडकास्टिंग एग्रीमेंट अधर

फुटबॉल की वैश्विक नियामक संस्था फीफा (FIFA) अब तक भारत में वर्ल्ड कप के सीधे प्रसारण (लाइव ब्रॉडकास्ट) के लिए किसी भी मीडिया या स्पोर्ट्स नेटवर्क के साथ अंतिम समझौता करने में विफल रही है। हालांकि, फीफा ने उम्मीदें पूरी तरह नहीं तोड़ी हैं। एक अखिल भारतीय मीडिया आउटलेट से बात करते हुए फीफा के प्रवक्ता ने बताया कि वे दुनिया भर के 180 से अधिक देशों के साथ पहले ही प्रसारण समझौते पूरे कर चुके हैं। भारत में मैच दिखाने को लेकर भी विभिन्न कंपनियों से गंभीर चर्चा चल रही है। संस्था की सर्वोच्च प्राथमिकता है कि इस सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट की पहुंच भारतीय दर्शकों तक जरूर सुनिश्चित हो।

दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा प्रसारण का मामला

दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा प्रसारण का मामला
दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा प्रसारण का मामला

दिलचस्प बात यह है कि ब्रॉडकास्टिंग राइट्स (प्रसारण अधिकारों) को लेकर केवल भारत ही नहीं, बल्कि चीन जैसे विशाल बाजार में भी अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। सूत्रों के मुताबिक, स्थिति को सुलझाने के लिए फीफा के शीर्ष अधिकारी जल्द ही बीजिंग का दौरा करने वाले हैं ताकि दुनिया भर में ब्रॉडकास्टिंग सिस्टम को अंतिम रूप दिया जा सके। इसी बीच भारत में यह असमंजस का विषय अब कानूनी चौखट पर पहुंच चुका है। देश में वर्ल्ड कप के अनिवार्य प्रसारण की मांग को लेकर दायर की गई एक याचिका पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्रालय तथा प्रसार भारती को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इस बेहद महत्वपूर्ण केस की सुनवाई अगले सप्ताह होनी तय हुई है।

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करोड़ों रुपये की भारी कीमत

भारत भले ही फीफा रैंकिंग में काफी पीछे हो, लेकिन देश में फुटबॉल के दीवानों की कोई कमी नहीं है। ब्राजील, अर्जेंटीना, फ्रांस और स्पेन जैसे दिग्गज देशों के मैच देखने के लिए यहां करोड़ों की संख्या में दर्शक देर रात तक टीवी से चिपके रहते हैं। इस भारी लोकप्रियता को देखते हुए ही फीफा ने 2026 और 2030 के विश्व कप प्रसारण अधिकारों को बेचने की प्रक्रिया शुरू की थी। शुरुआत में इन अधिकारों की बेस प्राइज लगभग 100 मिलियन अमेरिकी डॉलर (भारतीय मुद्रा में करीब 930 करोड़ रुपये) रखी गई थी। इतनी बड़ी रकम निवेश करने में जब किसी भारतीय कंपनी ने रुचि नहीं दिखाई, तो फीफा को विवश होकर इस कीमत को घटाकर 35 मिलियन डॉलर (लगभग 290 करोड़ रुपये) करना पड़ा। इसके बावजूद बाजार में अभी तक सन्नाटा पसरा हुआ है।

क्या निकलेगा बीच का कोई रास्ता?

विश्व कप की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है, लेकिन भारतीय उपमहाद्वीप में इसके प्रसारण को लेकर बनी अनिश्चितता की धुंध अभी तक पूरी तरह छंटी नहीं है। विज्ञापन राजस्व में कमी और महंगे राइट्स की वजह से निजी खेल चैनल हाथ पीछे खींच रहे हैं। हालांकि, दिल्ली हाई कोर्ट के दखल और फीफा के हालिया आधिकारिक बयानों से यह साफ संकेत मिलता है कि वे भारतीय बाजार को खाली नहीं छोड़ना चाहते। फीफा और सरकार मिलकर कोई ऐसा समाधान निकालने के लिए बेताब हैं जिससे दूरदर्शन या किसी अन्य माध्यम से करोड़ों भारतीय फैंस को ऐन वक्त पर निराशा न हाथ लगे।

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