FCRA Bill: ‘इलेक्टोरल बॉन्ड अवैध तो पैसा वैध कैसे?’ नए एफसीआरए बिल पर अखिलेश यादव के तीखे सवाल

केंद्र सरकार द्वारा एनजीओ (NGOs) की विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने के लिए लाए जा रहे नए एफसीआरए बिल पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने सरकार पर एनजीओ की संपत्तियां हड़पने का आरोप लगाते हुए पीएम केयर्स फंड और इलेक्टोरल बॉन्ड के पैसे पर बड़े सवाल उठाए हैं।

FCRA Bill

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 1, 2026

FCRA Bill: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) को मिलने वाले विदेशी चंदे को लेकर केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे नए नियमों पर बेहद तीखा हमला बोला है। केंद्र सरकार विदेशी पैसे से चलने वाली सामाजिक संस्थाओं को ‘रेगुलेटरी’ से पूरी तरह ‘कंट्रोल ओरिएंटेड’ बनाने जा रही है। इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए सपा सुप्रीमो ने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार इस कानून की आड़ में इन स्वतंत्र संस्थाओं की संपत्तियां हड़प लेना चाहती है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (X) पर एक लंबा पोस्ट लिखकर सरकार से तीखे सवाल पूछे हैं कि क्या विदेशों से ‘पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES Fund) में आया पैसा भी ऑडिट की विशेष छूट खत्म कर जनता को लौटाया जाएगा?

चुनावी बॉन्ड और चंदे का मुद्दा

सपा मुखिया ने बीजेपी को कटघरे में खड़ा करते हुए पूछा कि जो अकूत धन सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध घोषित किए जा चुके ‘इलेक्टोरल बॉन्ड’ (Electoral Bonds) के जरिए पार्टी के खजाने में आया था, उसे भाजपा कब वापस करने वाली है? उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब यह चुनावी बॉन्ड ही पूरी तरह गैर-कानूनी घोषित हो चुके हैं, तो उससे जुटाया गया फंड वैध कैसे हो सकता है? इसके अलावा, अखिलेश यादव ने धर्मार्थ कार्यों और मंदिर निर्माण के नाम पर मुखौटा संगठनों द्वारा बटोरे गए चंदे का भी पूरा हिसाब मांगा है और मांग की है कि ऐसे पदाधिकारियों की संपत्तियों की सघन जांच कर वसूली की जाए।

एनजीओ को कठपुतली बनाने की कोशिश का आरोप

अखिलेश यादव ने केंद्र की इस नई कप्तानी और नीति को अलोकतांत्रिक, एकाधिकारी और अति-नियंत्रणवादी करार दिया है। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर जनता अक्सर कहती है कि सरकार से ज्यादा बेहतर काम तो ये गैर-सरकारी संस्थाएं (NGOs) कर दिखाती हैं। यही बात सरकार को हजम नहीं हो रही है क्योंकि इससे कई मोर्चों पर भाजपाइयों की नाकामी खुलकर जनता के सामने उजागर हो जाती है। अखिलेश ने यह भी पूछा कि जो पैसा नियमों के तहत विदेश से आ रहा है, उस पर तो सरकार इतने कड़े पहरे लगा रही है, लेकिन जो अकूत काला धन अवैध रास्तों से देश से बाहर जा रहा है और जिसके दम पर ‘भगोड़े भाई’ विदेशों में ऐश कर रहे हैं, उनकी जब्ती कब होगी?

कागजों के आगे अब संपत्तियों पर भी होगी पैनी नजर

दरअसल, भारत सरकार ‘फॉरेन कंट्रीब्यूशन रेगुलेशन अमेंडमेंट बिल, 2026’ (FCRA Amendment Bill, 2026) लाने की पुरजोर तैयारी में है। इस नए प्रस्तावित कानून के लागू होने के बाद विदेशी फंडों का हिसाब-किताब केवल कागजी फाइलों तक ही सीमित नहीं रहेगा। नए कड़े नियमों के मुताबिक, विदेशी चंदे की मदद से भारत में तैयार की गई एनजीओ की हर एक चल-अचल संपत्ति पर सरकार की सीधी नजर होगी और लाइसेंस रद्द होने की स्थिति में सरकार उस पर सीधे अपना पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर सकेगी।

बीजेपी का पलटवार

विपक्ष के इन तीखे हमलों और चौतरफा विरोध के बीच सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी ने इस बिल का पुरजोर बचाव किया है। बीजेपी के कद्दावर नेता और पूर्व उप-मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा कि देश की सुरक्षा और संप्रभुता के लिहाज से यह एफसीआरए (FCRA) बिल बेहद जरूरी है। उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई बार देखने में आया है कि विदेश से आने वाले गुप्त चंदे का गलत उपयोग देश विरोधी एजेंडा चलाने और चुनी हुई सरकारों के खिलाफ हिंसक आंदोलन भड़काने में किया जाता है। उन्होंने साफ कर दिया कि चाहे बहुसंख्यक संस्थान हों या अल्पसंख्यक, किसी को भी देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने की कतई इजाजत नहीं दी जा सकती।