Fatehpur News: अखिलेश की ‘चाय’ पड़ी महंगी! दुकानदार ने प्रताड़ना के डर से दुकान पर जड़ा ताला

फतेहपुर में अखिलेश यादव के चाय पीने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। सुल्तानपुर घोष में जिस चाय की दुकान पर सपा प्रमुख रुके थे, वहाँ खाद्य विभाग की छापेमारी और दबंगों की प्रताड़ना से तंग आकर दुकानदार शेषमणी यादव ने अपनी दुकान बंद कर दी है। उनके बेटे का भावुक फेसबुक पोस्ट अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

Wrriten By :

Aanchal Singh

Published On :

अप्रैल 18, 2026

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Fatehpur News: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने राज्य के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। यह पूरा विवाद एक चाय की दुकान के इर्द-गिर्द घूम रहा है, जहां समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने कुछ समय पहले चाय की चुस्की ली थी। अब उस दुकानदार ने प्रशासनिक उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए अपनी दुकान बंद कर दी है।

पूर्व मुख्यमंत्री की ‘चाय पे चर्चा’

बताते चले कि, उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक जमीन अभी से तैयार होने लगी है। इसी क्रम में बीती 20 फरवरी को सपा प्रमुख अखिलेश यादव फतेहपुर दौरे पर थे। सुल्तानपुर घोष थाना क्षेत्र के चौकी चौराहे पर स्थित शेषमणी यादव की चाय की दुकान पर रुककर उन्होंने न केवल चाय पी, बल्कि इसकी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर साझा की थी। उस समय किसी को अंदाजा नहीं था कि यह एक कप चाय दुकानदार के लिए इतनी बड़ी मुसीबत बन जाएगी। दो महीने बीतते-बीतते यह साधारण सी दुकान राजनीतिक उठापटक का केंद्र बन गई है।

खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी

आपको बता दे कि, सियासत तब गरमा गई जब 15 अप्रैल को खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम अचानक चौकी चौराहा स्थित उसी चाय की दुकान पर जा पहुँची। अधिकारियों ने वहाँ गहन निरीक्षण किया और चाय पत्ती के नमूने लेकर जांच के लिए लैब भेज दिए। जैसे ही यह खबर फैली, इलाके में चर्चा शुरू हो गई कि सपा प्रमुख को चाय पिलाने की सजा दुकानदार को दी जा रही है। हालांकि, सहायक आयुक्त खाद्य राजेश दीक्षित ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। विभाग का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया थी जो आईजीआरएस (IGRS) पोर्टल पर मिली शिकायत के आधार पर की गई थी। अधिकारियों के अनुसार, दुकान का लाइसेंस 2028 तक वैध है और उन्होंने केवल नमूने लिए हैं, दुकान सीज नहीं की है।

दुकानदार के उत्पीड़न के आरोप

दुकानदार शेषमणी यादव और उनके परिवार का दर्द कुछ और ही कहानी बयां कर रहा है। उनका आरोप है कि 20 फरवरी के बाद से ही उनकी जिंदगी बदल गई है। दुकानदार का कहना है कि न केवल सरकारी विभाग के अधिकारी आए दिन चक्कर काट रहे हैं और तरह-तरह के सवाल-जवाब कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय दबंग भी उन्हें निशाना बना रहे हैं। आरोप है कि कुछ लोग दुकान पर आकर गाली-गलौज और मारपीट करते हैं। परिवार का दावा है कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया है कि अब उनके पास दुकान बंद करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है।

सोशल मीडिया पर वायरल भावुक पोस्ट

दुकानदार के बेटे आर्यन ने फेसबुक पर एक अत्यंत भावुक पोस्ट लिखकर अपनी व्यथा साझा की है। उसने लिखा, “मैं एक गरीब परिवार से हूं और आज से अपनी दुकान बंद कर रहा हूं। जब से पूर्व सीएम अखिलेश यादव जी ने यहाँ चाय पी है, हमें लगातार परेशान किया जा रहा है।” आर्यन ने अपनी पोस्ट में जिले के ‘कप्तान अंकल’ (SP) और पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि वे लोग झगड़ालू नहीं हैं और दबंगों व अधिकारियों का मुकाबला नहीं कर सकते। इसी डर और दबाव के कारण परिवार ने न केवल दुकान बंद करने बल्कि घर-गांव छोड़कर जाने तक की बात कही है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति में छापेमारी से गरमाया माहौल

फिलहाल, यह चाय की दुकान बंद हो चुकी है, लेकिन इसकी गूँज लखनऊ तक सुनाई दे रही है। विपक्षी दल इसे सत्ता का दुरुपयोग बता रहे हैं, वहीं प्रशासन इसे महज एक कानूनी प्रक्रिया करार दे रहा है। वजह चाहे जो भी हो, लेकिन एक गरीब दुकानदार का अपनी रोजी-रोटी से हाथ धोना और पलायन की बात करना प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में निष्पक्ष जांच होती है या यह चुनावी रंजिश की भेंट चढ़कर रह जाता है।

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