Farooq Abdullah on Delimitation Bill 2026: लोकसभा में परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) पर जारी चर्चा के बीच विपक्षी खेमा पूरी तरह लामबंद नजर आ रहा है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इस विधेयक को वापस लेने की मांग की है। शुक्रवार, 17 अप्रैल को दिए अपने बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार के पास संविधान संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत नहीं है और वे केवल पुराने बिलों के सहारे अपना एजेंडा थोपने की कोशिश कर रहे हैं।
बहुमत का गणित और सरकार की चुनौती
फारूक अब्दुल्ला ने केंद्र सरकार की घेराबंदी करते हुए कहा कि भाजपा को इस बात का पूरा यकीन है कि उन्हें सदन में दो तिहाई बहुमत (Two-Thirds Majority) नहीं मिलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सरकार को लगा कि वे नंबर गेम में पिछड़ रहे हैं, तो उन्होंने रातों-रात 2023 के पुराने बिल को वापस लाने की योजना बनाई। अब्दुल्ला के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए जो संख्या बल चाहिए, वह एनडीए के पास मौजूद नहीं है, और यह कदम संवैधानिक मर्यादाओं के खिलाफ है।
‘गलत इरादों’ पर उठाए सवाल
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्र पर हमला जारी रखते हुए रियासत में हुए पुराने डिलिमिटेशन (Delimitation) का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “आपने यहाँ (कश्मीर) का परिसीमन देखा है, इन्होंने कितना गलत किया। इनका असली मकसद क्या है, यह अब छिपने वाली बात नहीं है।” उन्होंने सरकार को सलाह दी कि उन्हें अपनी जिद छोड़कर जनता की आवाज सुननी चाहिए और इस विवादास्पद विधेयक को तत्काल प्रभाव से वापस लेना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति और पश्चिम बंगाल चुनाव
फारूक अब्दुल्ला ने केवल घरेलू नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी अपनी राय रखी। ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान की मध्यस्थता की खबरों पर उन्होंने कहा कि अगर इससे दुनिया में शांति (Peace) आती है, तो यह अच्छी बात है। वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने ममता बनर्जी का समर्थन किया। उन्होंने कहा, “इंशाअल्लाह, ममता दीदी की जीत होगी, हमारी दुआएं उनके साथ हैं।”
लोकसभा का समीकरण
आज शाम लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन के बाद इस विधेयक पर वोटिंग (Voting) होनी है। वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, जबकि इंडिया गठबंधन 232 सीटों के साथ मजबूती से खड़ा है। इस बिल को पास कराने के लिए सरकार को 360 वोटों की जादुई संख्या की जरूरत है। यदि यह विधेयक कानून बन जाता है, तो देश में लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़कर 816 हो जाएंगी, जो भारतीय राजनीति के ढांचे को पूरी तरह बदल देगा।
शाम 6 बजे अमित शाह का संबोधन
सदन में आज की शाम काफी महत्वपूर्ण होने वाली है। गृह मंत्री अमित शाह शाम 6 बजे परिसीमन के पक्ष में अपनी दलीलें पेश करेंगे। विपक्षी दलों ने पहले ही एकजुट होकर विरोध का बिगुल फूंक दिया है। अब देखना यह होगा कि सरकार अन्य दलों के समर्थन से संख्या बल (Strength of Numbers) जुटा पाती है या फारूक अब्दुल्ला की आशंकाएं सच साबित होती हैं।
मुख्य आंकड़े (लोकसभा शक्ति):
- NDA: 293 (बीजेपी 240, टीडीपी 40, जेडीयू 12, अन्य)
- इंडिया गठबंधन: 232 (कांग्रेस 98, सपा 37, टीएमसी 28, अन्य)
- लक्ष्य: विधेयक पारित करने के लिए 360 वोट अनिवार्य।









