बिहार में किसानों की बढ़ेगी खेती की लागत, दलहन बीज से ड्रिप-स्प्रिंकलर तक सब्सिडी में कटौती

पटना  बिहार में कृषि यंत्रों और फसल सहायता योजनाओं के तहत किसानों को मिलने वाले अनुदान में कटौती की गई है। कई योजनाओं में अतिरिक्त अनुदान का भुगतान भी बंद हो गया है। इससे किसानों की लागत बढ़ने और रबी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। राज्य सरकार का टॉपअप बंद, अब केंद्र के भरोसे किसान वित्तीय वर्ष 2025-26 तक कई योजनाओं में किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलता था। इसमें केंद्र सरकार की सहायता के साथ बिहार सरकार 30 से 35 प्रतिशत तक अतिरिक्त राशि देती थी। अब राज्य सरकार की ओर

Wrriten By :

Editor

Published On :

नवम्बर 8, 2026

Advertisements
728x90 Uttar Pradesh Police Mission Shakti Digital.jpg

पटना
 बिहार में कृषि यंत्रों और फसल सहायता योजनाओं के तहत किसानों को मिलने वाले अनुदान में कटौती की गई है। कई योजनाओं में अतिरिक्त अनुदान का भुगतान भी बंद हो गया है। इससे किसानों की लागत बढ़ने और रबी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

राज्य सरकार का टॉपअप बंद, अब केंद्र के भरोसे किसान
वित्तीय वर्ष 2025-26 तक कई योजनाओं में किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलता था। इसमें केंद्र सरकार की सहायता के साथ बिहार सरकार 30 से 35 प्रतिशत तक अतिरिक्त राशि देती थी।

अब राज्य सरकार की ओर से टॉपअप राशि बंद होने से किसानों को केवल केंद्र सरकार के निर्धारित अनुदान का लाभ मिल रहा है।

दलहन बीज पर अनुदान की व्यवस्था बदली
अरहर, मसूर, मटर, चना, मूंग और उड़द के बीज वितरण कार्यक्रम में पहले किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलता था। इसमें केंद्र की 50 प्रतिशत सहायता के साथ राज्य सरकार की ओर से 30 प्रतिशत टॉपअप दिया जाता था। अब केंद्र ने अनुदान की सीमा 60 से 70 प्रतिशत निर्धारित की है, जबकि राज्य का अतिरिक्त अनुदान बंद हो गया है।

सूक्ष्म सिंचाई योजना पर भी असर
प्रति बूंद अधिक फसल योजना के तहत ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी आधुनिक सिंचाई तकनीकों को बढ़ावा दिया जाता है। पहले इस योजना में किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलता था।

अब राज्य सरकार का टॉपअप बंद होने से किसानों को केंद्र की ओर से निर्धारित 45 से 55 प्रतिशत तक ही अनुदान मिल रहा है।

हाइब्रिड मक्का बीज पर भी घटा लाभ
बिहार में खरीफ, रबी और गरमा तीनों मौसम में मक्का की खेती होती है। हाइब्रिड मक्का उत्पादन कार्यक्रम के तहत पहले किसानों को 80 प्रतिशत तक अनुदान मिलता था।

इसमें राज्य सरकार 30 प्रतिशत राशि टॉपअप के रूप में देती थी। अब अतिरिक्त सहायता बंद होने से किसानों को केंद्र सरकार के निर्धारित 50 प्रतिशत अनुदान पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

छोटे और सीमांत किसानों पर बढ़ सकता है बोझ
अनुदान में कटौती के कारण किसानों को बीज और कृषि उपकरण खरीदने में पहले से अधिक राशि अपनी जेब से खर्च करनी पड़ सकती है।

इसका असर खासकर छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ने की आशंका है। लागत बढ़ने से आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने में भी परेशानी हो सकती है।

रबी उत्पादन पर पड़ सकता है असर
दलहन बीज, हाइब्रिड मक्का और सूक्ष्म सिंचाई योजनाओं में मिलने वाली सहायता कम होने से किसानों के फैसले प्रभावित हो सकते हैं।

यदि किसान लागत के कारण बीज और सिंचाई तकनीकों पर खर्च घटाते हैं, तो रबी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। हालांकि, उत्पादन में वास्तविक कमी कितनी होगी, यह खेती के रकबे, मौसम और किसानों की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा।

 

2