Farmer Protest: किसान घाट पर RAF का एक्शन, अमेरिका-भारत ट्रेड डील विरोध में कई किसान हिरासत में

अमेरिका-भारत ट्रेड डील के विरोध में किसान घाट पर प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई देखने को मिली। RAF की तैनाती के बीच कई किसानों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों की मांग, पुलिस की कार्रवाई और आगे की रणनीति को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। जानिए पूरे घटनाक्रम की बड़ी बातें।

Farmer Protest

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

जुलाई 21, 2026

Farmer Protest:  भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में संपन्न हुई ट्रेड डील को लेकर देश के अन्नदाताओं में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। इसी नाराजगी के चलते आज यानी मंगलवार, 21 जुलाई को देश के विभिन्न हिस्सों से आए किसान अपनी आवाज बुलंद करने के लिए दिल्ली के ऐतिहासिक किसान घाट पर इकट्ठा हुए। किसान इस बात से बेहद आहत हैं कि यह व्यापारिक समझौता उनकी आजीविका पर सीधा प्रहार करता है। विरोध प्रदर्शन की पूर्व सूचना के बावजूद किसान बड़ी संख्या में किसान घाट पहुंचे और सरकार विरोधी नारे लगाते हुए ट्रेड डील को तुरंत प्रभाव से रद्द करने की पुरजोर मांग की। किसानों का यह विरोध प्रदर्शन देश की कृषि व्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बीच के टकराव को एक बार फिर से राष्ट्रीय पटल पर ले आया है।

भारी सुरक्षा बल तैनात

जैसे ही किसान अपनी मांगों को लेकर किसान घाट पर शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन शुरू करने के लिए एकत्र हुए, वैसे ही प्रशासन हरकत में आ गया। मौके की नजाकत को भांपते हुए रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों ने तुरंत मोर्चा संभाल लिया। प्रदर्शन शुरू होते ही सुरक्षा बलों ने तत्परता दिखाते हुए आंदोलनरत किसानों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया।

स्थिति को पूरी तरह नियंत्रण में रखने और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए पूरे परिसर को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। प्रशासन ने बिना कोई देर किए वहां पहले से ही बसों का इंतजाम कर रखा था, जिनमें जबरन किसानों को बैठाकर सुरक्षित स्थानों या थानों के लिए ले जाया गया। सुरक्षा बलों की इस सख्त कार्रवाई के बाद भी किसानों का हौसला और सरकार के प्रति गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है।

हरियाणा और पंजाब की सीमाओं पर रोके गए किसान

दिल्ली के किसान घाट पर चल रहे इस प्रदर्शन के समर्थन में हरियाणा और पंजाब जैसे पड़ोसी राज्यों से भी बड़ी संख्या में किसान दिल्ली की ओर कूच कर रहे थे। हालांकि, राज्य और केंद्र की सुरक्षा एजेंसियों ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए इन किसानों को राजधानी की सीमाओं पर ही रोक दिया। सीमाओं पर भारी बैरिकेडिंग और पुलिस बल की तैनाती के कारण दूर-दराज से आ रहे किसानों के काफिले को आगे बढ़ने नहीं दिया गया। प्रशासन की इस सख्त रणनीति का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि कोई भी नया जत्था मुख्य प्रदर्शन स्थल तक न पहुंच सके। इसके बावजूद, सीमावर्ती क्षेत्रों में तनाव का माहौल बना हुआ है और किसान अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

ट्रेड डील रद्द कराने पर अड़े किसानों का गंभीर तर्क और आशंकाएं

एबीपी न्यूज़ के साथ की गई एक खास बातचीत के दौरान आंदोलनरत किसानों ने खुलकर अपनी बात रखी और इस ट्रेड डील के विरोध के पीछे की मुख्य वजहों को साझा किया। किसानों का साफ तौर पर कहना है कि यह भारत-अमेरिका ट्रेड डील किसी भी कीमत पर उन्हें मंजूर नहीं है। उनका मानना है कि इस समझौते के लागू होने से भारतीय बाजारों में विदेशी कृषि उत्पादों की भरमार हो जाएगी, जिसके कारण स्थानीय किसानों को उनकी फसलों का उचित और लाभकारी मूल्य नहीं मिल पाएगा। किसानों को डर है कि इससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा और उनका परिवार भुखमरी के कगार पर पहुंच जाएगा। इसी आशंका के चलते वे इस पूरे समझौते को पूरी तरह से रद्द कराने की मांग कर रहे हैं।

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