Fake LLB Degree Case: पाकिस्तान में बड़ा कांड, फर्जी LLB डिग्री पर जज बर्खास्त, न्यायपालिका में मचा हड़कंप

पाकिस्तान में कानून के रखवाले ही निकले कानून तोड़ने वाले! एक सिविल जज की एलएलबी डिग्री फर्जी पाए जाने के बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया गया है। इस खुलासे ने हड़कंप मचा दिया है कि क्या और भी न्यायिक अधिकारी फर्जी दस्तावेजों के सहारे सिस्टम में घुसे हैं?

Wrriten By :

Chandan Das

Published On :

फ़रवरी 24, 2026

Fake LLB Degree Case: पाकिस्तान की न्यायिक व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। जिस एलएलबी डिग्री के बिना कोई भी व्यक्ति वकालत नहीं कर सकता, उसी डिग्री के अभाव में एक व्यक्ति करीब पांच वर्षों तक इस्लामाबाद हाईकोर्ट में न्यायाधीश के रूप में कार्य करता रहा। इस खुलासे के बाद पूरे देश में हैरानी और आक्रोश का माहौल है। मामला पूर्व जज Tariq Mahmood Jahangiri से जुड़ा है, जिनकी शैक्षणिक योग्यता को अदालत ने अवैध करार दिया है।

116 पन्नों के फैसले में नियुक्ति अवैध घोषित

पाकिस्तानी अखबार Dawn की रिपोर्ट के अनुसार, 23 फरवरी को Islamabad High Court ने 116 पृष्ठों का विस्तृत निर्णय जारी किया। इस फैसले में जस्टिस तारिक महमूद जहांगीरी को उनके पद से हटा दिया गया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि उनकी नियुक्ति प्रारंभ से ही गैरकानूनी थी, क्योंकि उनके पास वैध कानून की डिग्री नहीं थी। कोर्ट ने टिप्पणी की कि यदि किसी व्यक्ति की मूल योग्यता ही संदिग्ध हो, तो उसकी नियुक्ति स्वतः अमान्य मानी जाएगी।

पांच साल तक संभाली न्यायिक जिम्मेदारी

तारिक महमूद जहांगीरी को 30 दिसंबर 2020 को इस्लामाबाद हाईकोर्ट का जज नियुक्त किया गया था। उन्होंने कई महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई की और फैसले भी सुनाए। हालांकि सितंबर 2024 में उन्हें न्यायिक कार्य करने से रोक दिया गया था, जब उनकी डिग्री को लेकर सवाल उठे। अब अंतिम निर्णय में अदालत ने उनकी एलएलबी डिग्री को पूरी तरह फर्जी और अमान्य घोषित कर दिया है।

दो जजों की पीठ ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला

यह महत्वपूर्ण फैसला चीफ जस्टिस Sardar Muhammad Sarfraz Dogar और जस्टिस Muhammad Azam Khan की खंडपीठ ने सुनाया। अदालत ने University of Karachi के आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच के आधार पर निष्कर्ष निकाला कि जहांगीरी की शैक्षणिक योग्यता में गंभीर अनियमितताएं थीं। रिकॉर्ड से पता चला कि उन्होंने परीक्षा देने के लिए गलत नाम और किसी अन्य छात्र के एनरोलमेंट नंबर का इस्तेमाल किया था।

फर्जी एनरोलमेंट और नकल का आरोप

फैसले में उल्लेख किया गया कि 1988 में एलएलबी पार्ट-1 की परीक्षा जहांगीरी ने फर्जी एनरोलमेंट नंबर से दी थी। 1989 में उन पर नकल का आरोप सिद्ध हुआ और उन्हें तीन वर्षों के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया। इसके बाद उन्होंने 1990 में “तारिक जहांगीरी” नाम से पुनः परीक्षा दी और एक अन्य छात्र, इम्तियाज अहमद, के एनरोलमेंट नंबर का उपयोग किया। बाद में एलएलबी पार्ट-2 की परीक्षा अपने वास्तविक नाम से दी, लेकिन अलग एनरोलमेंट नंबर अपनाया। अदालत ने स्पष्ट कहा कि किसी एक कोर्स के लिए दो अलग-अलग एनरोलमेंट नंबर होना संभव नहीं है।

कॉलेज रिकॉर्ड में भी नहीं मिला वैध प्रवेश

मामले की जांच के दौरान Government Islamia Law College के प्राचार्य ने भी पुष्टि की कि जहांगीरी का कॉलेज में कभी विधिवत दाखिला नहीं हुआ था। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जो कार्य आरंभ से ही अवैध हो, उसे बाद में किसी प्रशासनिक आदेश से वैध नहीं ठहराया जा सकता।

30 साल के करियर पर लगा सवाल

इस फैसले के साथ ही जहांगीरी का तीन दशकों से अधिक लंबा कानूनी करियर विवादों में घिर गया है। अदालत ने उनकी डिग्री और न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति दोनों को निरस्त कर दिया। इस प्रकरण ने पाकिस्तान की न्यायिक प्रणाली में पारदर्शिता और सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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