झारखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र घोटाला, रांची-बिहार तक फैला नेटवर्क सामने आया

जमशेदपुर सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में चार हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का बड़ा घोटाला सामने आया है। रसुनिया, रुचाप और चौका जैसी पंचायतों से ये कंप्यूटर जनरेटेड सरकारी प्रमाण पत्र धड़ल्ले से बांटे गए। हैरानी की बात यह है कि इनमें सबसे ज्यादा प्रमाणपत्र रांची जिले के लोगों के हैं। इसके अलावा पड़ोसी राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल के निवासियों को भी फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं। भंडाफोड़ होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू तो की, लेकिन अब इसकी रफ्तार इतनी धीमी हो गई है कि लोगों को लीपापोती का डर सताने

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Published On :

जून 3, 2026

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जमशेदपुर

सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में चार हजार से अधिक फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी होने का बड़ा घोटाला सामने आया है। रसुनिया, रुचाप और चौका जैसी पंचायतों से ये कंप्यूटर जनरेटेड सरकारी प्रमाण पत्र धड़ल्ले से बांटे गए।

हैरानी की बात यह है कि इनमें सबसे ज्यादा प्रमाणपत्र रांची जिले के लोगों के हैं। इसके अलावा पड़ोसी राज्य बिहार और पश्चिम बंगाल के निवासियों को भी फर्जी सर्टिफिकेट जारी किए गए हैं।

भंडाफोड़ होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू तो की, लेकिन अब इसकी रफ्तार इतनी धीमी हो गई है कि लोगों को लीपापोती का डर सताने लगा है।

ऐसे खुला घोटाले का राज
इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा मई के पहले हफ्ते में हुआ। विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के संस्थापक राकेश रंजन महतो ने रुचाप पंचायत में पश्चिम बंगाल (बाघुड़िया) के एक व्यक्ति को पकड़ा। वह व्यक्ति प्रखंड के कंप्यूटर ऑपरेटर राकेश गुप्ता को पैसे देकर अपना फर्जी जन्म प्रमाण पत्र लेकर लौट रहा था।

शिकायत के बाद अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) ने जांच के आदेश दिए। पंचायत सचिवों और ऑपरेटर राकेश गुप्ता से स्पष्टीकरण भी मांगा गया। लेकिन इसके बाद से ही ऑपरेटर राकेश गुप्ता इलाके से गायब है और जांच ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है।

सरकारी प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल
नियम के मुताबिक, एक साल से अधिक उम्र के व्यक्ति का जन्म प्रमाण पत्र बनवाने के लिए ऑनलाइन आवेदन, पंचायत स्तर पर वेरिफिकेशन, प्रखंड कार्यालय की जांच और अंत में अनुमंडल कार्यालय की मंजूरी अनिवार्य होती है।

बड़ा सवाल यह है कि इतनी सख्त और लंबी प्रक्रिया होने के बावजूद चार हजार फर्जी आवेदन कैसे पास हो गए? स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि इतना बड़ा खेल बिना बड़े अधिकारियों की मिलीभगत के नहीं चल सकता।

सिर्फ निचले कर्मचारियों को मोहरा बनाकर असली दोषियों को बचाने की कोशिश हो रही है। इस मामले को लेकर हाल ही में राजनीतिक दलों ने भी धरना-प्रदर्शन कर दोषियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे कांड
झारखंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया और बोकारो में भी बिल्कुल ऐसा ही रैकेट पकड़ा गया था। वहां भी बाहरी लोगों को झारखंड का निवासी बनाने के लिए हजारों फर्जी प्रमाणपत्र बेचे गए थे।

चाकुलिया मामले में पंचायत सचिव और प्रज्ञा केंद्र संचालकों समेत पांच लोग जेल जा चुके हैं। इसके बावजूद चांडिल प्रशासन ने पुरानी घटनाओं से कोई सबक नहीं लिया। अब जनता इस पूरे गिरोह के पर्दाफाश और सख्त कार्रवाई का इंतजार कर रही है।

मामले की जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट को लेकर अभी कुछ नहीं कहा जा सकता। -तालेश्वर रविदास, प्रखंड विकास पदाधिकारी, चांडिल

 

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